बाजार में गिरावट के दौरान भी चैन की नींद! राधिका गुप्ता ने बताया नए निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड का सही तरीका
मुख्य बातें
- म्यूचुअल फंड निवेशक बाजार में गिरावट आते ही काफी चिंतित हो जाते हैं
- लेकिन, आज हम इस आर्टिकल में एडलवाइस म्यूचुअल फंड की प्रबंध निदेशक राधिका गुप्ता से जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर नए निवेशकों को म्यूचुअल फंड में सही तरीके से कैसे निवेश करने चाहिए, जिससे वे चैन की सांस ले सकें

म्यूचुअल फंड से भारत में बचत और निवेश की संस्कृति में बदलाव आ रहा है। अब, प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां कई गुना बढ़ गई हैं, एसआईपी आम बोलचाल का हिस्सा बन गया है और म्यूचुअल फंड के विज्ञापनों में अब बुनियादी अवधारणा समझाने के बजाय इसके तरीके और श्रेणी पर बात होती है। फिर भी, पहली बार निवेश करने वाले लोग, अक्सर म्यूचुअल फंड को दीर्घकालिक निवेश के ज़रिये के बजाय 'लीग टेबल' (तुलना करने वाली सूची) की तरह देखते हैं। ऐसे में म्यूचुअल फंड के आसान ढांचे से नए निवेशकों के बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिम को देखने का नजरिया बदल सकता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि ज्यादातर परिवारों के पास विभिन्न कंपनियों की जांच-पड़ताल करने या रोजाना बाजार पर नजर रखने का समय या क्षमता नहीं होती है। उनके लिए असली फैसला यह नहीं है कि कौन सा स्टॉक खरीदें, बल्कि यह है कि कौन सा ढांचा उन्हें वृद्धि की संभावना में हिस्सा लेने का अवसर प्रदान करेगा, वह भी बाजार में गिरावट के दौरान परेशान हुए बगैर। म्यूचुअल फंड पैसे को इकट्ठा कर, अलग-अलग सेक्टर और पूंजीकरण वाले स्टॉक निवेश कर और रोजमर्रा के फैसले को प्रोफेशनल फंड मैनेजर पर छोड़कर इस समस्या का हल करते हैं। इन प्रबंधकों को स्पष्ट नियमों और दिशानिर्देश का पालन करना होता है। यह बात एडलवाइस म्यूचुअल फंड की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी, राधिका गुप्ता ने ग्रो की ओर से प्रकाशित किताब, 'द अल्फा बेट्स' में कही है। उनका तर्क है कि ज़्यादातर नए निवेशकों को इक्विटी में पहला निवेश म्यूचुअल फंड के ज़रिए करना चाहिए, क्योंकि वे पूरे समय बाज़ार पर नज़र रखने के बजाय अपना करियर बनाने में व्यस्त होते हैं।
गुप्ता की सलाह ऐसे समय में आई है, जब लाखों नए निवेशक एसआईपी के ज़रिए इक्विटी बाज़ार में आ रहे हैं। हालांकि, सोशल मीडिया की वजह स्टॉक से जुड़े सुझाव आसानी से मिल जाते हैं, साथ ही इससे यह भ्रम भी पैदा हुआ है कि सफल निवेश के लिए लगातार अगले 'मल्टीबैगर' की तलाश करनी पड़ती है। गुप्ता की राय इससे अलग है। उनका मानना है कि निवेशकों को पहले इक्विटी निवेश की बुनियादी बातें समझनी चाहिए, यह स्वीकार करना चाहिए कि उतार-चढ़ाव होना तय है और खुद स्टॉक पोर्टफोलियो बनाने की कोशिश करने के बजाय पेशेवर तरीके से प्रबंधित उत्पाद से शुरुआत करनी चाहिए।
वह बहुत सीधी और साफ सलाह देती हैं। उनका कहना है कि नए निवेशक या तो डाइवर्सिफाइड एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी फंड चुन सकते हैं या फिर ब्रॉड-बेस्ड इंडेक्स फंड। निवेश का लक्ष्य पहले साल में ही बेहतरीन प्रदर्शन हासिल करना नहीं, बल्कि यह होना चाहिए कि इतने लंबे समय तक निवेशित रहा जाए कि कंपाउंडिंग का लाभ मिल सके। किताब में गुप्ता बताती हैं कि उन्होंने खुद भी इसी दृष्टिकोण को अपनाया है और अपने नन्हे से बेटे के लिए लार्ज और मिड-कैप इंडेक्स फंड में एसआईपी शुरू की है। इससे पता चलता है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि दीर्घकालिक स्तर पर संपत्ति सृजन की शुरुआत जटिल प्रक्रिया अपनाने के बजाय सादगी से होती है।
इस सलाह के पीछे व्यावहारिक तर्क है। ज़्यादातर युवा पेशेवरों का समय करियर बनाने, नया कौशल सीखने और अपनी आय क्षमता बढ़ाने में जाता है। बहुत कम लोगों के पास वार्षिक रिपोर्ट का विश्लेषण करने, बैलेंस शीट की जांच-परख करने या हर दिन कॉर्पोरेट गतिविधियों पर नज़र रखने का समय या विशेषज्ञता होती है। इन ज़िम्मेदारियों को अनुभवी फंड प्रबंधकों को सौंपने से निवेशक बाज़ार की हर खबर पर पहल करने के भावनात्मक बोझ के बगैर निवेश बरकरार रख सकते हैं।
राधिका गुप्ता, निवेश से रिटर्न पाने की कोशिश करने से पहले अच्छी वित्तीय आदतें बनाने पर भी उतना ही ज़ोर देती हैं। उनके मुताबिक बचत के बगैर निवेश संभव नहीं है। जिस तरह सामान्य प्रक्रिया के तहत कर की कटौती होती है, उसी तरह वह लोगों को बचत को भी अपनी मासिक आय से एक और अनिवार्य कटौती के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। कर चुकाने के बाद बची कमाई का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा बचाकर भी दीर्घकालिक स्तर पर संपत्ति सृजन के लिए जरूरी अनुशासन पैदा किया जा सकता है और आय बढ़ने के साथ-साथ इस हिस्से को भी बढ़ाया जा सकता है।
पहली बार निवेश करने वालों के लिए यह लाभ की चीज हो सकती है। सही स्टॉक खोजना बहुत बड़ी बात नहीं है, बल्कि उनके लिए निवेश का ऐसा तरीका चुनना अधिक महत्वपूर्ण है, जिससे बाजार के अनिश्चित होने पर भी निवेश बनाए रखना आसान हो। राधिका गुप्ता का कहना है कि म्यूचुअल फंड ठीक यही काम करते हैं। वे निवेश करना आसान बनाते हैं, अनुशासन को बढ़ावा देते हैं और आम बचतकर्ताओं को तब भी चैन की नींद सोने में मदद करते हैं जब बाज़ार का रुख प्रतिकूल हो।
डिस्क्लेमर- लाइव हिंदुस्तान निवेशकों को किसी भी निवेश से पहले फाइनेंशियल एक्सपर्ट की राय लेने की सलाह देता है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते
हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई
स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही
क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही
नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।


