
टाटा के इस शेयर को चुपचाप बेच निकल लिए राधाकिशन दमानी, 35% टूट गया था भाव
ट्रेंट के शेयर बीते शुक्रवार को मामूली गिरावट के साथ 4,782.30 रुपये पर बंद हुए थे। कंपनी के शेयर इस साल अब तक 35 पर्सेंट तक टूट चुका है। हालांकि, पांच साल में यह शेयर 600 पर्सेंट तक चढ़ गया है।
Radhakishan Damani Portfolio: भारत के लो-प्रोफाइल अरबपति और रिटेल किंग राधाकिशन दमानी ने टाटा ग्रुप की प्रमुख रिटेल कंपनी ट्रेंट लिमिटेड (Trent Ltd) में अपनी लगभग एक दशक पुरानी हिस्सेदारी से एग्जिट कर लिया है। इस कदम ने दलाल स्ट्रीट पर नई हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि दमानी ने इस निवेश से सालों तक शानदार रिटर्न हासिल किए थे। ट्रेंट के शेयर बीते शुक्रवार को मामूली गिरावट के साथ 4,782.30 रुपये पर बंद हुए थे। कंपनी के शेयर इस साल अब तक 35 पर्सेंट तक टूट चुका है। हालांकि, पांच साल में यह शेयर 600 पर्सेंट तक चढ़ गया है।

सितंबर तिमाही की शेयरहोल्डिंग से खुलासा
सितंबर 2025 तिमाही की BSE फाइलिंग्स के अनुसार, दमानी की Trent में हिस्सेदारी, जो डेरिव ट्रेडिंग एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से रखी गई थी, घटकर 1% से नीचे आ गई है। पिछली जून तिमाही में उनकी हिस्सेदारी 1.2% दर्ज की गई थी। मार्केट सूत्रों के मुताबिक, दमानी ने करीब 2010 में ट्रेंट में 2.74% हिस्सेदारी खरीदी थी। अब उनकी होल्डिंग 1% से कम रह जाने के चलते, उनका नाम कंपनी के पब्लिक शेयरहोल्डर्स की सूची से बाहर हो गया है।
ट्रेंट में दमानी का निवेश
ट्रेंट, जो टाटा ग्रुप की रिटेल शाखा है, अपने प्रमुख ब्रांड वेस्टसाइड, जूडियो, लैंडमार्क और उत्सा के लिए जानी जाती है। दमानी ने इसमें उस समय निवेश किया था जब कंपनी का शेयर भाव सीमित दायरे में था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ट्रेंट के शेयरों ने जबरदस्त तेजी दिखाई है। जानकारों के अनुसार, दमानी ने ट्रेंट में निवेश से कई गुना रिटर्न अर्जित किया। कंपनी के शेयर पिछले पांच वर्षों में लगभग 500% से अधिक बढ़े हैं।
टाटा ग्रुप की नई चमकती कंपनी
ट्रेंट ने हाल के वर्षों में Zudio ब्रांड की सफलता के चलते रिटेल सेक्टर में बड़ी छलांग लगाई है। कंपनी का मार्केट कैप अब ₹1.5 लाख करोड़ के करीब पहुंच चुका है। Trent की तेजी के पीछे टाटा ग्रुप की आक्रामक विस्तार नीति, मजबूत ब्रांड पोजिशनिंग और फैशन रिटेलिंग में बढ़ती मांग रही है। विश्लेषकों का मानना है कि दमानी की निवेश रणनीति लंबी अवधि के वैल्यू इन्वेस्टमेंट पर आधारित रही है, और वे तब बाहर निकलते हैं जब उन्हें लगता है कि मूल्यांकन अपने शिखर पर पहुंच चुका है।





