
फूटने के करीब है क्विक कॉमर्स सेगमेंट का ‘गुब्बारा’, Blinkit के CEO ने क्यों कही यह बात
जल्द ही क्विक कामर्स सेक्टर का गुब्बारा फुटने वाला है। यह बात ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में ब्लिंकिट के सीईओ अलबिंदर ढींडसा (Albinder Dhindsa) ने कही है। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि कुछ प्लेयर्स (कंपनियां) लम्बे समय से घाटे में चल रही हैं।
जल्द ही क्विक कामर्स सेक्टर का गुब्बारा फुटने वाला है। यह बात ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में ब्लिंकिट के सीईओ अलबिंदर ढींडसा (Albinder Dhindsa) ने कही है। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि कुछ प्लेयर्स (कंपनियां) लम्बे समय से घाटे में चल रही हैं। हालांकि, इसी इंटरव्यू में उन्होंने अपनी कंपनी के विषय में कहा कि वह विस्तार करती रहेगी और आगे बढ़ेगी। बता दें, ढींडसा ने इस इंटरव्यू में कहा कि जो कंपनियां लगातार फंडरेजिंग पर निर्भर हैं उन्हें अब अन्य विकल्पों के विषय में सोचना होगा। क्योंकि कंपनियों को तय करना होगा कि कब तक वह अपना संचालन नुकसान में करती रहेंगी। इसकी भी एक सीमा है। जिसके बेहद करीब कंपनियां पहुंच गई हैं।
ब्लूमबर्ग ने जारी की रिपोर्ट बताया है कि सॉफ्टबैंक ग्रुप, टीमसेक होल्डिंग्स पीटीई और मिडिल ईस्टर्न सॉवरेन फंड्स ने इस सेक्टर में खूब निवेश किया है। ऐसे ही वेंचर्स अमेरिका, यूरोप और एशिया के अन्य देशों में फेल हो चुके हैं।
स्विगी की वित्तीय स्थिति कैसी?
ब्लिंकिट की प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी को सितंबर तिमाही के दौरान 1092 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। एक साल पहले इसी सितंबर तिमाही के दौरान 626 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा था। भले ही स्विगी को सितंबर तिमाही में घाटा हुआ है। लेकिन इसके बाद भी कंपनी का रेवन्यू (ऑपरेशंस) में 54.42 प्रतिशत की बढ़ोतरी सालाना आधार पर हुई है। जुलाई से सितंबर के दौरान कंपनी का रेवन्यू 5561 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी के शेयर इस समय भी आईपीओ की कीमत के आस-पास बने हुए हैं। जो दर्शाता है कि निवेशक अपने इंवेस्टमेंट को लेकर लगातार सोच रहे है
क्विक कॉमर्स सेगमेंट की एक और कंपनी जेप्टो ने 450 मिलियन डॉलर फंड अगले साल के आईपीओ से पहले जुटाया है।
(यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।)





