घर खरीदारों के लिए खुशखबरी, पुराने ठप पड़े प्रोजेक्ट पर सरकार ने संभाला मोर्चा
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को संकेत दिया कि रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के कार्यान्वयन से पहले की रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एक समर्पित कोष स्थापित किया जा सकता है।

लंबे समय से रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं को लेकर अब मोदी सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को संकेत दिया कि रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के कार्यान्वयन से पहले की रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एक समर्पित कोष स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह कदम रियल एस्टेट उद्योग के उन सुझावों के अनुरूप है जिनका उद्देश्य प्रवर्तकों और घर खरीदारों, दोनों के लिए फायदेमंद समाधान सुनिश्चित करना है।
क्या कहा केंद्रीय मंत्री ने?
उन्होंने रियल एस्टेट निकाय नारेडको की तरफ से आयोजित 'नेशनल अर्बन एंड रियल एस्टेट डेवलपमेंट कॉन्क्लेव' के दूसरे दिन निम्न आय वर्ग (एलआईजी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणियों में किफायती आवास के फंड के लिए धर्मार्थ संस्थानों की स्थापना के विषय पर विस्तार से चर्चा की।
कहां से पैसों का इंतजाम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समाज के निर्धन वर्गों के लिए धन जुटाने हेतु ऐसे प्रस्तावित धर्मार्थ संस्थानों में कॉरपोरेटे सामाजिक दायित्व (सीएसआर) योगदान के माध्यम से पैसे का इंतजाम हो सकता है, क्योंकि बैंकिंग और वित्तीय संस्थान इस वर्ग की सहायता में बहुत कम सक्रिय रहते हैं। नारेडको की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, मनोहर लाल ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) और उसके आसपास की लगभग 700-750 झुग्गी बस्तियों का सरकार द्वारा विकास किया जाएगा। इसके लिए नीतिगत ढांचे पर सरकार के विभिन्न प्राधिकरणों के भीतर उच्च स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
इस अवसर पर नारेडको के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि आवासीय क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था में प्राथमिकता दिलाने के लिए सरकार ने काफी प्रयास किए हैं, लेकिन 2047 तक अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र का योगदान बढ़कर 15 प्रतिशत करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
किफायती आवास, किराये के घरों के लिए प्रोत्साहन की वकालत की
इस बीच, रियल एस्टेट क्षेत्र के शीर्ष निकाय नारेडको ने कहा कि सरकार को 'सभी के लिए आवास' के लक्ष्य को हासिल करने और क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए किफायती आवास श्रेणी को प्रोत्साहित करना चाहिए और किराये के आवास के विकास के लिए छूट प्रदान करनी चाहिए। एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने रियल एस्टेट कानून 'रेरा' को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जैन ने सभी के लिए आवास पर जोर देते हुए कहा कि किफायती आवास को बढ़ावा देने और बिल्डरों व घर खरीदारों दोनों के लिए वित्त तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत है। जैन ने कहा कि सरकार को किराये के मकानों के लिए रियायतें देनी चाहिए।





