घर की रजिस्ट्री हो गई? फिर भी आपका नहीं माना जाएगा मालिकाना हक! ये डॉक्यूमेंट नहीं, तो होगी बड़ी परेशानी

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मुख्य बातें

  • अगर आपने घर खरीद लिया है, पूरी कीमत चुका दी है और रजिस्ट्री भी अपने नाम करवा ली है
  • अब आपको लगेगा प्रॉपर्टी के मालिक बन गए लेकिन ऐसा नहीं हैं
  • मालिकाना हक के तौर पर सिर्फ रजिस्ट्री काफी नहीं है
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अगर आपने घर खरीद लिया है, पूरी कीमत चुका दी है और रजिस्ट्री भी अपने नाम करवा ली है। अब आपको लगेगा प्रॉपर्टी के मालिक बन गए लेकिन ऐसा नहीं हैं। मालिकाना हक के तौर पर सिर्फ रजिस्ट्री काफी नहीं है। एक्सपर्ट के अनुसार केवल रजिस्टर्ड सेल डीड होना ही मालिकाना हक का अंतिम और अटूट प्रमाण नहीं माना जाता। कई ऐसी परिस्थितियां हैं, जिनमें रजिस्ट्री के बावजूद संपत्ति के मालिक को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

ये डॉक्यूमेंट हैं जरूरी

एकॉर्ड ज्यूरिस में एसोसिएट आमिर खान के मुताबिक संपत्ति खरीदने के बाद सबसे अहम डॉक्यूमेंट रजिस्टर्ड सेल डीड होता है, जो मालिकाना हक के ट्रांसफर का अहम आधार है। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट 1882 की धारा 54 और रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 की धारा 17 एवं 49 के अनुसार, 100 रुपये से अधिक वैल्यू की अचल संपत्ति का ट्रांसफर सिर्फ रजिस्टर डॉक्यूमेंट के आधार से ही वैलिड माना जाता है।

कोर्ट में मिल सकती है चुनौती

हालांकि, एक्सपर्ट के मुताबिक रजिस्ट्री मजबूत डॉक्यूमेंट है, लेकिन यह मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं है। यदि संपत्ति के पुराने मालिक के टाइटल में कोई खामी हो, डॉक्यूमेंट फर्जी हों, धोखाधड़ी हुई हो या बेचने के वाले के पास बेचने का वैलिड अधिकार ही न रहा हो, तो रजिस्टर्ड सेल डीड को भी अदालत में चुनौती दी जा सकती है। ऐसे मामलों में कोर्ट सिर्फ रजिस्ट्री नहीं, बल्कि पूरी चेन ऑफ टाइटल यानी मालिकाना हक के पूरे इतिहास की जांच करता है।

म्यूटेशन भी है जरूरी

रजिस्ट्री के बाद संपत्ति का म्यूटेशन (नामांतरण) भी कराना चाहिए। इससे नगर निगम या राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज हो जाता है और प्रॉपर्टी टैक्स, बिजली, पानी जैसी सुविधाएं भी नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर हो जाती हैं। हालांकि म्यूटेशन न होने से मालिकाना हक खत्म नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट भी कई फैसलों में साफ कर चुका है कि म्यूटेशन केवल राजस्व रिकॉर्ड के लिए होता है और इससे स्वामित्व तय नहीं होता। फिर भी भविष्य में टैक्स, बैंक लोन, विरासत या संपत्ति बेचने के दौरान म्यूटेशन न होने से व्यावहारिक दिक्कतें आ सकती हैं।

ये डॉक्यूमेंट रखें संभालकर

हर संपत्ति मालिक को अपने पास सभी जरूरी डॉक्यूमेंट सेफ रखने चाहिए। इनमें रजिस्टर्ड सेल डीड, गिफ्ट डीड या कन्वेयंस डीड, पुराने पैरेंट डीड्स, एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट, म्यूटेशन ऑर्डर, प्रॉपर्टी टैक्स की रसीदें, बिल्डर से मिला पजेशन लेटर, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट, अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान, कंप्लीशन सर्टिफिकेट और विरासत से मिली संपत्ति के मामले में वसीयत, प्रोबेट या अन्य उत्तराधिकार संबंधी डॉक्यूमेंट शामिल हैं। सिर्फ किसी संपत्ति पर कब्जा होना भी मालिकाना हक का प्रमाण नहीं माना जाता। स्वामित्व हमेशा वैलिड कानूनी टाइटल से तय होता है।

Sheetal

लेखक के बारे में

Sheetal
शीतल को पत्रकारिता में 15 सालों का अनुभव है। पर्सलन फाइनेंस, गोल्ड, सिल्वर, कारोबारी सफर और स्टार्टअप की खबरें लिखती हैं। अमर उजाला से अपने करियर की शुरुआत की। अब तक इकोनॉमिक टाइम्स हिंदी, भास्कर, लाइव हिन्दुस्तान और मनीकंट्रोल हिंदी (Network18) में काम किया है। अब लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट एडिटर खबरें आप तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। और पढ़ें
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