एक साल तक सोना न खरीदें…पीएम मोदी ने देशवासियों से क्यों की ऐसी अपील?
मुख्य बातें
- पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने एक संबोधन में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए नागरिकों से एक बड़ी और महत्वपूर्ण अपील की है
- संबोधन के दौरान पीएम ने एक साल तक सोना न खरीदने की बात कही
- आइए जरा विस्तार से जानते हैं कि पीएम मोदी ने देशवासियों से ऐसा क्यों कहा?

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई द्वारा यहां आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की। इस संबोधन के दौरान पीएम ने देश के औद्योगिक जगत को भी एक स्पष्ट संदेश दिया है। पीएम मोदी ने भारत की असली ताकत 'विदेशी मुद्रा' (Forex) को बचाने और उसे रणनीतिक रूप से उपयोग करने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर चिंता जताई कि भारत की मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा सोने (Gold), कच्चे तेल (Crude Oil) और तांबे (Copper) जैसे संसाधनों के आयात में विदेशों में चला जाता है। उन्होंने इसे रोकने के लिए एक 'बिजनेस मॉडल' और 'आर्थिक देशभक्ति' का आह्वान किया है।
गोल्ड इम्पोर्ट: डॉलर बचाने का मिशन
प्रधानमंत्री ने आर्थिक नजरिए से एक साहसिक अपील करते हुए कहा कि भारतीयों का सोने के प्रति मोह देश की बैलेंस शीट पर भारी पड़ रहा है। भारत दुनिया के शीर्ष स्वर्ण आयातकों में से एक है, जिसका भुगतान कीमती डॉलर में करना पड़ता है। पीएम ने सुझाव दिया कि अगर देशवासी कम से कम एक साल के लिए सोने की भारी खरीदारी को टाल दें, तो इससे बचने वाली विदेशी मुद्रा का उपयोग देश के बुनियादी ढांचे और तकनीक को विकसित करने में किया जा सकता है। यह कदम सीधे तौर पर रुपये की मजबूती और चालू खाता घाटे (CAD) को कम करने में मदद करेगा।
सोने की खरीद को टालें
भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। पीएम मोदी ने कहा कि हम जो सोना खरीदते हैं, उसका भुगतान डॉलर में करना पड़ता है, जिससे हमारे विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी बोझ पड़ता है। उन्होंने जनता से एक भावुक और रणनीतिक अपील करते हुए कहा, "क्या हम कम से कम एक साल के लिए सोने की खरीद को टाल नहीं सकते? अगर हम शादियों और त्योहारों पर सोने की खरीदारी में थोड़ी कमी लाएं, तो हम अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं।"
कॉपर और सेमीकंडक्टर: नई इंडस्ट्रियल क्रांति
पीएम ने 'कॉपर' (तांबा) को 'भविष्य का सोना' बताया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए कॉपर अनिवार्य है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। पीएम ने उद्योगपतियों को संकेत दिया कि कॉपर रिसाइक्लिंग और स्वदेशी खनन में बड़े निवेश की जरूरत है। उन्होंने इसे सेमीकंडक्टर मिशन की तरह ही महत्वपूर्ण बताया, ताकि आयात पर निर्भरता खत्म हो और 'मेक इन इंडिया' को नई ऊंचाई मिले।
पेट्रोल-डीजल और एथेनॉल ब्लेंडिंग
ऊर्जा सुरक्षा पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के लिए हम खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। विदेशी मुद्रा का सबसे बड़ा हिस्सा इसी में जाता है। उन्होंने एथेनॉल ब्लेंडिंग और ग्रीन हाइड्रोजन को बिजनेस के नए अवसर के रूप में पेश किया। पीएम ने स्पष्ट किया कि कृषि अपशिष्ट से ईंधन बनाकर हम न केवल किसानों की आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा भी बचा रहे हैं।
क्या है विदेशी मुद्रा भंडार?
विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) किसी देश के पास मौजूद विदेशी करेंसी, सोना और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संपत्तियों का संग्रह होता है। इसे देश का इमरजेंसी फंड भी कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल आर्थिक संकट या आयात भुगतान जैसी जरूरतों में किया जाता है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास होता है। इसमें कई चीजें शामिल होती हैं।
- अमेरिकी डॉलर, यूरो, पाउंड जैसी विदेशी मुद्राएं
- सोने का भंडार (Gold Reserves)
- IMF में जमा विशेष अधिकार (SDR)
- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में रिजर्व पोजिशन
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों जरूरी होता है?
आयात के भुगतान के लिए
भारत कच्चा तेल, गैस और कई जरूरी सामान विदेशों से खरीदता है। इसके भुगतान के लिए डॉलर जैसी विदेशी मुद्रा चाहिए होती है।
रुपये को मजबूत रखने के लिए
अगर डॉलर बहुत महंगा होने लगे तो RBI विदेशी मुद्रा बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश करता है।
आर्थिक संकट से बचाव
युद्ध, तेल संकट या वैश्विक मंदी जैसी स्थिति में यही भंडार देश की सबसे बड़ी ताकत बनता है।
विदेशी निवेशकों के भरोसे के लिए
ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार होने से दुनिया को लगता है कि देश आर्थिक रूप से मजबूत है।
'सेविंग' से 'इनवेस्टमेंट' तक
प्रधानमंत्री का विजन साफ है, जो पैसा हम सोना या तेल के आयात में खर्च करते हैं, उसे बचाकर आधुनिक तकनीक और उद्योग में निवेश करना होगा। उन्होंने बिजनेस कम्युनिटी से आग्रह किया कि वे ऐसी तकनीक विकसित करें, जो आयात का विकल्प (Import Substitution) बने। यह केवल एक भाषण नहीं, बल्कि आने वाले सालों में भारत की आर्थिक नीतियों और बजट की दिशा का एक बड़ा संकेत है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते
हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
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