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इंश्योरेंस कंपनियों की मनमानी बंद करने की तैयारी, तय हो सकती है बीमा प्रीमियम की सीमा

इंश्योरेंस कंपनियों की मनमानी बंद करने की तैयारी, तय हो सकती है बीमा प्रीमियम की सीमा

संक्षेप:

Insurance: सरकार का मानना है कि तेजी से बढ़ रही मेडिकल महंगाई हेल्थ इंश्योरेंस पर सबसे अधिक दबाव बना रही है। सरकार चाहती है कि अस्पताल और बीमा कंपनियां बिलिंग को पारदर्शी बनाए और खर्चो को नियंत्रित करने के उपाय तैयार करें।

Nov 20, 2025 05:25 am ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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देश में इलाज के बढ़ते खर्च और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में लगातार हो रही वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठा सकती है। इसके तहत बीमा प्रीमियम के लिए निश्चित सीमा तय की जा सकती है ताकि इंश्योरेंस कंपनियां मनमाने तरीके से रकम न वसूल सकें। इसके लिए सरकार ने बीमा नियामक इरडा, इंश्योरेंस कंपनियों और अस्पतालों के साथ चर्चा शुरू कर दी है।

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बताया जा रहा है कि कई अहम सुझाव बीमा नियामक इरडा को भेजे गए हैं, जिन पर जल्द फैसला लिया जा सकता है। सरकार का मानना है कि तेजी से बढ़ रही मेडिकल महंगाई हेल्थ इंश्योरेंस पर सबसे अधिक दबाव बना रही है। सरकार चाहती है कि अस्पताल और बीमा कंपनियां बिलिंग को पारदर्शी बनाए और खर्चो को नियंत्रित करने के उपाय तैयार करें। पिछले हफ्ते वित्त मंत्रालय ने बीमा कंपनियों और अस्पतालों को बुलाकर कहा था कि वे मिलकर इलाज की लागत कम करें। इसी कड़ी में सरकार प्रीमियम और क्लेम प्रक्रिया में जरूरी बदलाव करने पर भी विचार कर रही है।

जीएसटी राहत का भी आकलन किया जाएगा

मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम में सबसे अधिक बढ़ोतरी देखी गई है। इरडा ने भी इस पर चिंता जताई है। अब सरकार बीमा प्रीमियम पर एक निश्चित सीमा लगाने पर विचार कर रही है। वह चाहती है कि हेल्थ इंश्योरेंस लोगों की पहुंच में रहे। साथ ही सरकार यह भी देख रही है कि हाल ही में हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी को शून्य करने का फायदा कंपनियां ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं या नहीं।

क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया पारदर्शी होगी

इरडा ने पाया है कि कई मामलों में बीमा कंपनियां क्लेम का भुगतान उम्मीद से कम कर रही हैं। इससे बीमाधारकों में असंतोष बढ़ रहा है। सरकार चाहती है कि सभी क्लेम को डिजिटल मंच पर जोड़ा जाए और नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज के माध्यम से पूरी प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनाई जाए। इरडा भी दावा निपटान पर कड़ी नजर रख रहा है।

अधिक एजेंट कमीशन पर भी सख्ती संभव

एजेंट कमीशन भी हेल्थ इंश्योरेंस की लागत को बढ़ाता है। अभी नई पॉलिसी पर 20 फीसदी तक और रिन्यूअल पर 10 फीसदी तक कमीशन दिया जाता है। हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों में प्रीमियम का 35 फीसदी तक खर्च मैनेजमेंट में शामिल होता है। सरकार और इरडा इस व्यवस्था को को और कड़ा बनाने पर विचार कर रहे है ताकि खर्च कम हो और इसका लाभ ग्राहकों को मिले।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia
टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल मिलाकर 20 साल का अनुभव। एचटी डिजिटल से पहले दृगराज न्यूज नेशन, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, सहारा समय और वॉच न्यूज एमपी /सीजी में रिपोर्टिग और डेस्क पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। स्पेशल स्टोरीज,स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स, सिनेमा, स्पोर्ट्स के बाद अब बिजनेस की खबरें लिख रहे हैं। दृगराज, लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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