एयरलाइंस से गोल्ड तक इन 5 सेक्टर्स पर संकट के बादल, पीएम मोदी की अपील से धड़कने लगे इनके दिल
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जिन पांच सेक्टर्स का जिक्र किया, वे इस आर्थिक झटके से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले हैं
- पीएम ने कोविड काल वाली आदतें फिर से अपनाने, विदेश यात्रा टालने, पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, एक साल तक सोना न खरीदने, खाने के तेल की खपत घटाने का आग्रह किया है

पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे युद्ध और हॉर्मुज स्ट्रेट में रुकावटों को देखते हुए रविवार को तेलंगाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ढेर सारी अपीलें कर डालीं। उन्होंने लोगों से कोविड काल वाली वर्क-फ्रॉम-होम की आदतें फिर से अपनाने, जरूरी न हो तो विदेश यात्रा टालने, पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, एक साल तक सोना न खरीदने, खाने के तेल की खपत घटाने और आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने का आग्रह किया।
पीएम मोदी ने कहा, “आज जरूरत है कि हम उन अभ्यासों को फिर से शुरू करें” यानी वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग। सोने को लेकर उन्होंने एक साल के लिए शादियों में सोना न खरीदने की अपील की। पीएम मोदी को क्यों करनी पड़ी अपील? क्या कोई बड़ा संकट आने वाला है?
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जिन पांच सेक्टर्स का जिक्र किया, वे इस आर्थिक झटके से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले हैं।
1. एविएशन, टूरिज्म और विदेश यात्रा
प्रधानमंत्री का “गैर-जरूरी विदेश यात्रा” टालने और वर्क फ्रॉम होम पर जोर एविएशन सेक्टर पर बढ़ते दबाव को दिखाता है। ऑयल शॉक की स्थिति में एयरलाइनें सबसे पहले प्रभावित होती हैं, क्योंकि एविएशन टर्बाइन फ्यूएल (ATF) उनकी लागत का 35-45% होता है। भारतीय कंपनियां हवाई जहाजों की लीज, रखरखाव और बीमा डॉलर में चुकाती हैं। इस अपील का तत्काल असर सोमवार को इंडिगो के शेयरों पर देखने को मिला, जिनमें 4% से अधिक की गिरावट आई।
2. ऑयल मार्केटिंग, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स
यह प्रधानमंत्री के पूरे भाषण की मुख्य चिंता है। भारत रोजाना लगभग 55 लाख बैरल तेल खपत करता है। प्रधानमंत्री ने मेट्रो, कारपूल, ईवी और रेल माल ढुलाई पर जोर दिया। इंडिया टुडे के अनुसार, तेल कंपनियों को हर महीने लगभग 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी है, जिससे कीमतें जल्द बढ़ सकती हैं।
3. खाद, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
भारत बड़ी मात्रा में यूरिया, डीएपी, पोटाश आयात करता है। उर्वरक उत्पादन प्राकृतिक गैस की कीमतों से जुड़ा है। अगर उर्वरक महंगे हो गए, तो खेती की लागत बढ़ेगी, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति और ग्रामीण मांग कमजोर पड़ सकती है। इन्हीं सबको देखते हुए प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी, “हमें रासायनिक उर्वरकों की खपत आधी करनी चाहिए।”
4. सोना, लग्जरी और इंपोर्टेड कंज्यूमर गुड्स
प्रधानमंत्री का एक साल तक सोना न खरीदने का आग्रह असाधारण है, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातकों में से है। सोने के आयात से चालू खाता घाटा बढ़ता है। इस आग्रह का असर यह हुआ कि सोमवार को टाइटन, सेंको गोल्ड जैसे ज्वैलरी शेयरों में 10% तक की गिरावट आई। अगर लग्जरी का आयात कम करते हैं, तो ज्वैलरी, फैशन, महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स और लग्जरी मॉल पर दबाव बढ़ सकता है।
5. मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई और औद्योगिक उत्पादन
लगभग हर औद्योगिक क्षेत्र इंपोर्टेड एनर्जी पर निर्भर है। ऊंची तेल-गैस कीमतें, बिजली, माल ढुलाई, रसायन, प्लास्टिक, पैकेजिंग और धातुओं को प्रभावित करती हैं। एमएसएमई कम मुनाफे पर काम करते हैं, इसलिए बढ़ती ईंधन लागत उन्हें जल्दी प्रभावित करती है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


