काम की बात: PM Kisan की 23वीं किस्त आने वाली है, अगर नहीं किया ये काम तो रुक सकती है ₹2000 की मदद
PM Kisan 23rd Installment updates: पीएम किसान की 23वीं किस्त के लिए e-KYC जरूरी है। ई-केवाईसी के 3 तरीके हैं। पहला ओटीपी आधारित, दूसरा, बायोमेट्रिक आधारित और तीसरा तरीका फेस ऑथेंटिकेशन-आधारित ई-केवाईसी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त जल्द ही जारी होने वाली है। पीएम किसान पोर्टल पर सरकार ने साफ किया है कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) पूरी करना, आधार से बैंक खाता लिंक करना और सही बैंक डिटेल देना जरूरी है। अगर ये छोटी-सी चूक होती है, तो पीएम किसान की 23वीं किस्त रुक सकती है या देरी हो सकती है।
ई-केवाईसी (e-KYC) कैसे करें?
पीएम-किसान योजना के किसानों के लिए ई-केवाईसी के 3 तरीके हैं। पहला ओटीपी आधारित ई-केवाईसी, जो पीएम किसान पोर्टल और मोबाइल ऐप पर उपलब्ध है। दूसरा, बायोमेट्रिक आधारित ई-केवाईसी, जिसके लिए आपको कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या राज्य सेवा केंद्र (SSK) पर जाना पड़ेगा। तीसरा तरीका फेस ऑथेंटिकेशन-आधारित ई-केवाईसी। यह भी पीएम किसान मोबाइल ऐप पर उपलब्ध है।
ओटीपी आधारित ई-केवाईसी
ओटीपी आधारित ई-केवाईसी के लिए, किसान के पास आधार से जुड़ा एक्टिव मोबाइल नंबर होना जरूरी है। इसके लिए दिए गए स्टेप्स को फॉलो करे...
स्टेप-1. पीएम-किसान पोर्टल (https://pmkisan.gov.in/) पर जाएं।
स्टेप-2. वेबसाइट के ऊपरी दाएं कोने पर ई-केवाईसी पर क्लिक करें।
स्टेप-3. अपना आधार नंबर दर्ज करें और अपना ओटीपी डालने के बाद अपना ई-केवाईसी पूरा करें।
बायोमेट्रिक आधारित ई-केवाईसी
यह सुविधा किसानों के घर/पड़ोस में सेवाएं प्रदान करने के लिए देशभर में 4 लाख से अधिक सामान्य सेवा केंद्रों और विभिन्न राज्य सेवा केंद्रों पर उपलब्ध कराई गई है। इसके लिए दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें...
स्टेप-1. अपने आधार कार्ड और आधार से जुड़े मोबाइल नंबर के साथ अपने नजदीकी सीएससी/एसएसके पर जाएं।
स्टेप-2. सीएससी/एसएसके ऑपरेटर आधार-आधारित सत्यापन का उपयोग करके बायोमेट्रिक ऑथंटिकेशन करने में किसान की सहायता करेगा।
फेस-ऑथेंटिकेशन के माध्यम से ई-केवाईसी
किसान अपनी सुविधानुसार अपने मोबाइल के माध्यम से भी ई-केवाईसी कर सकते हैं। यह ई-केवाईसी करने का सबसे नवीन और परेशानी मुक्त तरीका है।
गूगल प्ले स्टोर से पीएम-किसान मोबाइल ऐप और आधार फेस आरडी ऐप डाउनलोड करें। ऐप खोलें और अपने पीएम-किसान रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के माध्यम से लॉगिन करें। बेनीफियरी पेज पर जाएं। अगर ई-केवाईसी स्टेटस “नहीं” है, तो ई-केवाईसी पर क्लिक करें, फिर अपना आधार नंबर दर्ज करें और अपना चेहरा स्कैन करने के लिए अपनी सहमति दें। आपके चेहरे को सफलतापूर्वक स्कैन करने के बाद, ई-केवाईसी पूरा हो जाएगा।
यह जानना जरूरी है कि किसी भी तरीके से किए गए ई-केवाईसी की स्थिति 24 घंटे के बाद लाभार्थी की स्थिति में दिखाई देगी। किसान पीएम-किसान पोर्टल और किसान-ईमित्र (पीएम-किसान एआई चैटबॉट) पर केवाईसी मॉड्यूल से भी अपनी स्थिति जान सकते हैं।
बैंक अकाउंट और आधार लिंकिंग प्रक्रिया
सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता आधार से लिंक है। अगर नहीं है तो अपने बैंक में जाकर DBT (Direct Benefit Transfer) सुविधा एक्टिव करवाएं। अपना सही नाम, IFSC कोड, खाता नंबर पोर्टल पर अपडेट रखें।
किस्त का Status कैसे चेक करें?
1. PM-KISAN पोर्टल पर जाएं।
2. 'Beneficiary Status' पर क्लिक करें।
3. आधार नंबर, मोबाइल नंबर या खाता नंबर में से कोई एक डालें।
4. किस्त की स्थिति स्क्रीन पर दिख जाएगी।
इन सभी कार्यों को जल्द से जल्द पूरा कर लें, ताकि आपको 2000 रुपये की किस्त समय पर मिल सके और 23वीं किस्त लेने में देरी न हो।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


