PM किसान निधि पर मोदी की सौगात, 9.32 करोड़ किसानों के खाते में भेजे पैसे, चेक करें डिटेल
पीएम किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के गुवाहाटी से 22वीं किस्त जारी की। इस किस्त के माध्यम से 9.32 करोड़ से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में ₹18,640 करोड़ से ज्यादा की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे भेजी गई।

PM Kisan 22nd installment: देश के करोड़ों किसान को तोहफा मिला है। दरअसल, नरेंद्र मोदी सरकार ने पीएम-किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी कर दी है। पीएम मोदी ने गुवाहाटी, असम में एक कार्यक्रम के दौरान 22वीं किस्त के 2000 रुपये को ट्रांसफर किए। इसका लाभ 9.32 करोड़ से अधिक किसानों को मिलेगा। बता दें कि पीएम-किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त प्राप्त करने वाले लाभार्थियों में 2.15 करोड़ से अधिक महिला किसान हैं। इस योजना के तहत, पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की राशि तीन समान किस्तों में दी जाती है, जिसे 'प्रत्यक्ष लाभ अंतरण' (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाता है। इस किस्त के जारी होने के साथ, पीएम-किसान के तहत वितरित कुल राशि 4.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।
पिछली तीन किस्त के आंकड़े
योजना के पिछले आंकड़ों के अनुसार, फरवरी, 2025 में 19वीं किस्त के रूप में 9.8 करोड़ किसानों को 22,000 करोड़ रुपये अंतरित किए गए थे। इसके बाद अगस्त, 2025 में 20वीं किस्त के तहत 9.7 करोड़ किसानों को 20,500 करोड़ रुपये और नवंबर, 2025 में 21वीं किस्त के रूप में नौ करोड़ किसानों को 18,000 करोड़ रुपये दिए गए थे।
ई-केवाईसी है जरूरी
पीएम-किसान में रजिस्टर्ड किसानों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य है। ओटीपी आधारित ई-केवाईसी पीएम-किसान पोर्टल पर उपलब्ध है या बायोमेट्रिक आधारित ई-केवाईसी के लिए निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर से संपर्क किया जा सकता है।
लाभार्थियों की सहायता के लिए पीएम-किसान पोर्टल पर 'अपनी स्थिति को जानों (केवाईएस)' नामक एक मॉड्यूल उपलब्ध कराया गया है। यह मॉड्यूल भुगतान की स्थिति, पात्रता, भूमि विवरण, आधार जोड़ने और ई-केवाईसी की स्थिति जैसी सभी जानकारियों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है। सरकार ने चेहरे की पहचान पर आधारित एक मोबाइल ऐप भी पेश किया है, जिससे किसान बिना किसी ओटीपी या बायोमेट्रिक डिवाइस की आवश्यकता के, घर बैठे ही अपना ई-केवाईसी पूरा कर सकते हैं। राज्य और ग्राम स्तर के नोडल अधिकारी इस कार्य में अतिरिक्त सहायता प्रदान कर रहे हैं। कृषि मंत्रालय का कृत्रिम मेधा-आधारित वॉयस चैटबॉट 'किसान-ईमित्र' 11 क्षेत्रीय भाषाओं में चौबीसों घंटे सहायता प्रदान कर रहा है, और अब तक इसने लाखों किसानों के प्रश्नों का समाधान किया है।
अपात्र लाभार्थियों को बाहर करने के लिए एक मजबूत सत्यापन प्रणाली लागू की गई है, जबकि संपन्न किसानों के लिए अपनी पात्रता स्वेच्छा से छोड़ने (स्वैच्छिक समर्पण) की सुविधा भी शुरू की गई है। उन किसानों को फिर से जोड़ने के लिए भी व्यवस्था की गयी है, जिन्होंने अनजाने में अपनी पात्रता छोड़ दी थी।
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