5.72 करोड़ जन-धन खातों में 0 बैलेंस…सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े; RTI से खुली पोल

पीटीआई, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • PM जन-धन योजना से जुड़े RTI के आंकड़ों ने चौंकाया है
  • 12 अगस्त 2026 तक देश में 59.03 करोड़ से ज्यादा जन धन खाते थे, जिनमें कुल ₹3.15 लाख करोड़ से अधिक जमा था
  • लेकिन, इनमें 5.72 करोड़ खाते जीरो बैलेंस वाले और 15.36 करोड़ खाते इनऑपरेटिव थे

pm jan-dhan yojana
देश में 59.03 करोड़ से ज्यादा जन-धन खातों में 0 बैलेंस।

प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) का उद्देश्य देश के हर व्यक्ति को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था, लेकिन इससे जुड़ा एक नया आंकड़ा चौंकाने वाला है। एक RTI की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में करीब हर चौथा जन धन खाता इनऑपरेटिव यानी निष्क्रिय है। इतना ही नहीं, 5.72 करोड़ जन धन खातों में कोई बैलेंस नहीं है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने RTI कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ के आवेदन के जवाब में बताया कि 12 अगस्त 2026 तक देशभर में कुल 59,03,74,907 जन धन खाते थे। इन सभी खातों में कुल जमा राशि ₹3.15 लाख करोड़ से ज्यादा थी। कुल खातों में 32.89 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं, जिसमें ट्रांसजेंडर खाताधारक भी शामिल हैं, जबकि 26.14 करोड़ खाते पुरुषों के हैं।

RTI रिपोर्ट पर एक नजर

RTI से मिली जानकारी के अनुसार, 5,72,35,490 जन धन खातों में जीरो बैलेंस था। वहीं 15,36,77,009 खाते इनऑपरेटिव यानी निष्क्रिय श्रेणी में रखे गए थे। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में ऐसे बैंक खाते मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल लंबे समय से नहीं किया जा रहा है। हालांकि, जीरो बैलेंस और इनऑपरेटिव खाते एक ही चीज नहीं हैं। किसी खाते में पैसा नहीं होना जरूरी नहीं कि वह निष्क्रिय भी हो। इसी तरह कोई खाता इनऑपरेटिव होने का मतलब यह नहीं है कि उसमें हमेशा जीरो बैलेंस ही हो। इसलिए दोनों आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

2014 में हुई थी इस योजना की शुरुआत

प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत अगस्त 2014 में वित्तीय समावेशन के राष्ट्रीय मिशन के रूप में की गई थी। इसका मकसद देश के हर परिवार तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बनाना, कम से कम एक बेसिक बैंक खाता उपलब्ध कराना, वित्तीय साक्षरता बढ़ाना और लोगों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना था। जन धन खातों के जरिए करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में मदद मिली। हालांकि, बड़ी संख्या में निष्क्रिय और जीरो बैलेंस खाते यह सवाल भी उठाते हैं कि इन खातों का इस्तेमाल कितनी नियमितता से हो रहा है।

जीरो बैलेंस खातों में कौन सा राज्य आगे?

राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 95.92 लाख जन धन खाते जीरो बैलेंस वाले थे। इसके बाद बिहार में 62.35 लाख, पश्चिम बंगाल में 37.20 लाख, असम में 36.30 लाख और महाराष्ट्र में 36.04 लाख ऐसे खाते थे। वहीं, निष्क्रिय खातों के मामले में भी उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा। यहां 3.23 करोड़ जन धन खाते इनऑपरेटिव थे। इसके बाद बिहार में 1.59 करोड़, मध्य प्रदेश में 1.35 करोड़, पश्चिम बंगाल में 1.02 करोड़ और महाराष्ट्र में 97.94 लाख खाते निष्क्रिय थे।

उत्तर प्रदेश में 10.51 करोड़ खाते

कुल जन धन खातों की संख्या में भी उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। राज्य में 10.51 करोड़ खाते हैं। बिहार में 7.01 करोड़, पश्चिम बंगाल में 5.73 करोड़, राजस्थान में 3.87 करोड़ और महाराष्ट्र में 3.85 करोड़ जन धन खाते हैं। RTI के जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार के पास जन धन खातों के बैलेंस, जीरो बैलेंस खातों और इनऑपरेटिव खातों का लिंग के आधार पर केंद्रीय स्तर पर अलग-अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

इसके अलावा ₹100 से कम बैलेंस वाले खातों, पिछले 5 सालों में बंद किए गए खातों और संदिग्ध लेनदेन या साइबर फ्रॉड के कारण ब्लॉक या फ्रीज किए गए खातों की जानकारी भी केंद्रीय स्तर पर उपलब्ध नहीं रखी जाती। RTI में उपलब्ध राज्यवार आंकड़े देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करते हैं। ऐसे में जन धन योजना ने बैंकिंग पहुंच बढ़ाने में बड़ी भूमिका जरूर निभाई है, लेकिन इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि सिर्फ बैंक खाता खोलना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे नियमित रूप से इस्तेमाल करना और वित्तीय सेवाओं से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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