
हाई से 21% गिर चुका यह शेयर, 6 दिन पहले ही हुई थी लिस्टिंग, निवेशक क्या करें?
फिजिक्सवाला के आईपीओ की शेयर बाजार में 18 नवंबर को लिस्टिंग हुई थी। बीएसई पर इसके शेयर ने इश्यू प्राइस से 31.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ 143.10 रुपये पर शुरुआत की। बाद में यह 48.66 प्रतिशत चढ़कर 162.05 रुपये पर पहुंच गया।
Physicswallah share price: शानदार लिस्टिंग के बाद एडुटेक कंपनी- फिजिक्सवाला के शेयरों में गिरावट का सिलसिला जारी है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को यह शेयर 3.93% टूटकर 129.55 रुपये के निचले स्तर पर बंद हुआ। ट्रेडिंग के दौरान शेयर 127 रुपये के निचले स्तर तक आ गया। बता दें कि फिजिक्सवाला के आईपीओ की शेयर बाजार में 18 नवंबर को लिस्टिंग हुई थी। बीएसई पर इसके शेयर ने इश्यू प्राइस से 31.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ 143.10 रुपये पर शुरुआत की। बाद में यह 48.66 प्रतिशत चढ़कर 162.05 रुपये पर पहुंच गया। अंत में यह 42.38 प्रतिशत की बढ़त के साथ 155.20 रुपये पर बंद हुआ था। इसके बाद से शेयर लगातार टूट रहा है। 24 नवंबर की बात करें तो यह शेयर अपने उच्चतम स्तर से 21% नीचे आ चुका है। इस दौरान शेयर की वजह से निवेशकों को केवल पांच दिनों में ₹10,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। इतनी गिरावट के बावजूद शेयर अभी भी अपने इश्यू प्राइस ₹109 प्रति शेयर से ऊपर कारोबार कर रहा है।

फिजिकवाला के शेयरों में गिरावट का कारण क्या है?
INVAsset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी ने कहा कि परिचालन के लिहाज से कंपनी ऑफलाइन केंद्रों का विस्तार, हाइब्रिड पेशकशों का विस्तार और अपने लर्निंग प्लेटफॉर्म का निर्माण जारी रखे हुए है लेकिन मुनाफा अब भी कम है। इसके अलावा तिमाही आय अभी भी अस्थिर है। यह एक ऐसा संयोजन है जो स्वाभाविक रूप से बाजार में उतार-चढ़ाव को बढ़ाता है। आईपीओ को केवल लगभग 1.8 गुना सब्सक्राइब किया गया था, जिसके बारे में दासानी ने कहा कि यह एक प्रारंभिक संकेत है कि लिस्टिंग के दिन की गति कम होने के बाद करेक्शन की गुंजाइश है।
निवेशक क्या करें?
शेयर को लेकर दासानी ने कहा कि मौजूदा निवेशकों के लिए, यह गिरावट किसी संरचनात्मक खतरे की घंटी से ज्यादा शुरुआती उत्साह में कमी की तरह लग रही है। नए निवेशकों के लिए क्रमिक या सतर्क निवेश ही समझदारी है क्योंकि गिरावट के बावजूद शेयर अब भी अपने आईपीओ मूल्य से काफी ऊपर कारोबार कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि आगामी लॉक-इन समाप्ति और संस्थागत फ्लो का व्यवहार भी निकट अवधि की अस्थिरता को प्रभावित करेगा। अगर कंपनी अगली कुछ तिमाहियों में स्थिर मुनाफा और कैश फ्लो प्रदान करता है तो यह पॉजिटिव संकेत होगा।





