देशभर में बढ़ी पेट्रोल-डीजल की डिमांड! सरकारी तेल कंपनियों के नए आंकड़ों ने चौंकाया
मुख्य बातें
- जुलाई के पहले 15 दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल की बिक्री में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है
- पेट्रोल की बिक्री सालाना आधार पर 22.9% और डीजल की बिक्री 20.9% बढ़ी
- एक्सपर्ट के मुताबिक, सामान्य से कम मानसून और किसानों द्वारा सिंचाई के लिए डीजल पंपों के बढ़ते इस्तेमाल ने फ्यूल की डिमांड बढ़ा दी

अगर आपको लग रहा है कि मानसून के मौसम में पेट्रोल और डीजल की खपत कम हो जाती है, तो इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग है। जुलाई के पहले 15 दिनों में देश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह सामान्य से कम बारिश, खेती-किसानी की बढ़ी जरूरतें और सड़कों पर वाहनों की लगातार आवाजाही मानी जा रही है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की संयुक्त बिक्री पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ी है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां और फ्यूल की मांग मजबूत बनी हुई हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 15 जुलाई के बीच पेट्रोल की बिक्री 22.9% बढ़कर 16.3 लाख टन पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 13.3 लाख टन थी। इतना ही नहीं, यह बिक्री 2024 की समान अवधि की तुलना में करीब 26.7% और 2023 के मुकाबले 38.6% अधिक रही। हालांकि, जून के पहले पखवाड़े की तुलना में पेट्रोल की बिक्री में लगभग 4.4% की मामूली गिरावट दर्ज की गई। इसका कारण यह माना जा रहा है कि जून में स्कूल और कॉलेज की छुट्टियों के चलते लोगों ने ज्यादा यात्रा की थी, जिससे उस महीने ईंधन की खपत अधिक रही।
वहीं, डीजल की बिक्री में भी शानदार उछाल देखने को मिला। जुलाई के पहले 15 दिनों में डीजल की बिक्री 20.9% बढ़कर 34.6 लाख टन हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 28.7 लाख टन थी। डीजल को देश की आर्थिक गतिविधियों का अहम संकेतक माना जाता है, क्योंकि इसका उपयोग ट्रक, बस, कृषि उपकरण और औद्योगिक मशीनों में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए, इसकी बढ़ती बिक्री यह संकेत देती है कि परिवहन और कृषि क्षेत्र में गतिविधियां तेज बनी हुई हैं।
एक्सपर्ट का कहना है कि इस बार मानसून सामान्य समय पर पूरी तरह एक्टिव नहीं हुआ। कई इलाकों में बारिश कम होने के कारण किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए डीजल से चलने वाले पंपों का अधिक इस्तेमाल करना पड़ा। यही वजह है कि आमतौर पर मानसून में कम होने वाली डीजल की डिमांड इस बार उल्टा बढ़ गई। सामान्य परिस्थितियों में बारिश आने के बाद सिंचाई की जरूरत कम हो जाती है और वाहन भी कम चलते हैं, जिससे ईंधन की खपत घटती है। लेकिन इस बार मौसम के बदले मिजाज ने तस्वीर बदल दी।
हवाई यात्रा से जुड़ा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) भी लगभग स्थिर रहा। इसकी बिक्री 3.15 लाख टन रही, जो पिछले साल की तुलना में 0.7% अधिक है। हालांकि, जून के पहले पखवाड़े की तुलना में इसमें करीब 10.3% की गिरावट आई। दूसरी ओर एलपीजी (LPG) की बिक्री में गिरावट का सिलसिला अभी भी जारी है। जुलाई के पहले 15 दिनों में एलपीजी की बिक्री 17.5% घटकर 11.4 लाख टन रह गई। हालांकि, जून के मुकाबले इसमें 1.7% की हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
LPG की डिमांड पर पश्चिम एशिया संकट का असर देखने को मिला था। इस संकट के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई और होटल-रेस्तरां जैसे कुछ सेक्टरों में एलपीजी की खपत पर प्रतिबंध लगाए गए थे। अब ये प्रतिबंध हटने लगे हैं, जिससे आने वाले महीनों में एलपीजी की डिमांड धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है।
जुलाई के पहले आधे महीने के आंकड़े बताते हैं कि देश में पेट्रोल और डीजल की डिमांड मजबूत बनी हुई है। कम बारिश, खेती की बढ़ी जरूरतें और लगातार आर्थिक गतिविधियां ईंधन की खपत को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। अगर आने वाले दिनों में मानसून सामान्य रहता है, तो ईंधन की डिमांड में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है, लेकिन फिलहाल तेल कंपनियों के लिए जुलाई की शुरुआत काफी उत्साहजनक रही है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
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उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
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