पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे, कनाडा से LPG आयात होगा, सरकार ने दी बड़ी राहत

Mar 06, 2026 01:00 pm ISTDrigraj Madheshia हिन्दुस्तान टीम
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Petrol Diesel LPG Latest Updates: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छह दिन से जारी युद्ध के चलते कच्चे तेल के दाम करीब 16 फीसदी बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। मोदी सरकार ने आशवस्त किया है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का भारतीय उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे, कनाडा से LPG आयात होगा, सरकार ने दी बड़ी राहत

Petrol Diesel LPG Latest Updates: पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल जारी है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छह दिन से जारी युद्ध के चलते कच्चे तेल के दाम करीब 16 फीसदी बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। आज ब्रेंट क्रूड 85.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। मोदी सरकार ने आशवस्त किया है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का भारतीय उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

केंद्र सरकार ने साफ किया है कि भारत में पर्याप्त मात्रा में तेल और गैस मौजूद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में फिल्हाल दाम नहीं बढ़ेंगे। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, एलपीजी के मामले में भारत सिर्फ कतर के भरोसे नहीं है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी गैस भिजवाने का ऑफर किया है।

भारत ने नए बाजार तलाश लिए

मंत्रालय का दावा है कि अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत ने नए बाजार तलाश लिए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, हम इस क्षेत्र में काम करने वाले सभी लोगों के संपर्क में हैं। इस बीच, जहां सरकार ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है। वहीं, अमेरिका से कुल खपत की करीब दस एलपीजी लेनी शुरू कर दी है।

कतर के फैसले का असर

अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग के बीच कतर ने अपना गैस उत्पादन पूरी तरह बंद कर दिया है। भारत अभी 195 मिलियन मीट्रिक स्टेंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस आयात करता है। इसमें सिर्फ 60 एमएमएससीएम यानी करीब 30 फीसदी कतर से आयात की जाती है। सरकार इस कमी को पूरी करने का प्रयास कर रही है, जरूरत पड़ी तो गैस कंपनियां उद्योगों को गैस आपूर्ति को लेकर अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकती हैं।

घरेलू गैस सप्लाई पर असर नहीं

सरकार का कहना है कि गैस की कमी होती भी है, तो इसका घरेलू मसलन पीएनजी और सीएनजी उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं होगा। उद्योगों के पास वैकल्पिक ऊर्जा संसाधन होते हैं, ऐसे में कंपनियां उद्योगों को प्राथिमकता के आधार पर गैस मुहैया कर सकती है। पर अभी इस तरह की कोई स्थिति पैदा नहीं हुई है।

पचास दिन का तेल उपलब्ध

मंत्रालय का कहना है कि भारत में 25 दिन से अधिक का कच्चा तेल और 25 दिन की जरूरत के हिसाब से पेट्रोल-डीजल उपलब्ध हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम लगातार दूसरे देशों और आपूर्तिकर्ताओं से बात कर रहे हैं। स्थिति पूरी तरह सामान्य है। देश में एलपीजी, सीएनजी और एलएनजी की फिलहाल कोई कमी नहीं है।

होर्मुज जलमार्ग का असर

ईरान के होर्मुज जलमार्ग को बंद करने की धमकी का भारत पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ेगा। मंत्रालय का कहना है कि भारत का कुल आयात का 40 फीसदी हिस्सा होर्मुज जलमार्ग से गुजरता है। बाकी साठ फीसदी दूसरे रास्तों से आता है। इसकी भरपाई के लिए भारत ने सुरक्षित मार्गों से अपना आयात बढ़ा दिया है।

ज्यादा मंहगा नहीं होगा कच्चा तेल

सरकार के रणनीतिकार मानते हैं कि छह दिन के युद्ध में कच्चे तेल की कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची हैं। युद्ध कुछ दिन और चलता है, तो दाम 90 डॉलर तक जा सकते हैं। पर लड़ाई थमते ही दाम कम हो जाएंगे, क्योंकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल उपलब्ध है। तेल की कोई कमी नहीं है।

जहाजों के सस्ते बीमा पर बात

भारत आईईए और ओपेक के साथ वैकल्पिक सप्लाई पर बातचीत कर रहा है। सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी आपूर्तिकर्ताओं और व्यापारिक संगठनों के साथ निरंतर बातचीत जारी है। वहीं सरकार पानी के जहाजों के सस्ते बीमा के मुद्दों पर अमेरिका के डीएफसी (यूएस इंटरनेशनल डेवलेपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन) से भी बात कर रही है।

Drigraj Madheshia

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Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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