पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल 128% तक महंगा, जानें भारत में क्यों नहीं बढ़े दाम और आपको कब तक मिलेगी राहत?
Petro Diesel Price: ईरान युद्ध के बाद म्यांमार जैसे पड़ोसी देश में डीजल 128% और पेट्रोल 93.9% तक महंगा हो चुका है, जबकि भारत में अभी राहत है। जानिए इसका कारण क्या हैं और आने वाले समय में आपकी जेब पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।

Petro Diesel Price: ईरान युद्ध के बाद जब कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं, तो इसका असर दुनिया के अधिकतर देशों पर पड़ा। पड़ोसी म्यांमार में डीजल के रेट में 128.50% की बढ़ोतरी हुई तो पेट्रोल का दाम 93.9 प्रतिशत बढ़ गया, लेकिन भारत एक दिलचस्प स्थिति में है। आज भी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये लीटर है।
एक तरफ यह दुनिया का बड़ा तेल आयातक देश है, वहीं दूसरी तरफ यहां सरकार कीमतों को पूरी तरह बाजार पर नहीं छोड़ती। यही कारण है कि वैश्विक उछाल के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर दिखाई दे रही हैं।
म्यांमार से पाकिस्तान तक पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा
ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज डॉट कॉम के 6 अप्रैल तक के जारी आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने वाले टॉप-10 देशों में म्यांमार, फिलीपींस, मलेशिया, कंबोडिया, पाकिस्तान, लाओस, जिमबाब्वे, यूएई, वियतनाम और पनामा हैं। यहां युद्ध के बाद से पेट्रोल 38.5 प्रतिशत से लेकर 93.9 प्रतिशत महंगा हुआ है। जबकि, डीजल के दाम में 38.8% से 169.5% तक का इजाफा हुआ है।
युद्ध के बाद से पेट्रोल के दाम बढ़ाने वाले टॉप-10 देश
1. म्यांमार 93.9%
2.फिलीपींस 68.7%
3. मलेशिया 52.4%
4. कंबोडिया 49.4%
5. पाकिस्तान 46.6%
6. लाओस 45.6%
7. जिमबाब्वे 42.9%
8. यूएई 40.8%
9. वियतनाम 39.0%
10. पनामा 38.5%
स्रोत: globalpetrolprices.com
युद्ध के बाद से डीजल के दाम बढ़ाने वाले टॉप-10 देश
1. लाओस 169.5%
2. वियतनाम 141.8%
3.म्यांमार 128.5%
4. फिलीपींस 128.0%
5. कंबोडिया 118.7%
6. मलेशिया 101.3%
7. पाकिस्तान 88.7%
8. यूएई 86.1%
9. लेबनान 76.7%
10. न्यूजीलैंड 76.3%
स्रोत: globalpetrolprices.com
भारत क्यों है ज्यादा संवेदनशील?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़ते ही भारत की लागत भी बढ़ जाती है। हालांकि, यह असर तुरंत आम लोगों तक नहीं पहुंचता, लेकिन तेल कंपनियों और सरकार पर दबाव जरूर बढ़ने लगता है।
भारत में अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों नहीं बढ़ रहीं?
भारत में कीमतें इसलिए स्थिर हैं क्योंकि, सरकार और सरकारी तेल कंपनियां (PSUs) अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर तुरंत पास नहीं करतीं। कई बार कंपनियां घाटा सहकर या सरकार टैक्स एडजस्ट करके कीमतों को कुछ समय तक नियंत्रित रखती है। इसके अलावा महंगाई और राजनीतिक कारण भी इस फैसले को प्रभावित करते हैं।
भारत में यह राहत कब तक?
यह स्थिरता अस्थायी होती है। अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो तेल कंपनियों का घाटा बढ़ने लगता है। ऐसे में या तो सरकार टैक्स और कम करेगी या फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


