भारत में तो कुछ नहीं… इन देशों ने गजब के बढ़ाए हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

Deepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
share

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम 3 रुपये बढ़ गए हैं। दुनिया के कई बड़े देशों की तुलना में यह अब भी काफी कम बढ़ोतरी मानी जा रही है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर तेल संकट गहरा गया है।

भारत में तो कुछ नहीं… इन देशों ने गजब के बढ़ाए हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। करीब चार साल बाद हुई यह बढ़ोतरी आम लोगों के लिए किसी झटके से कम नहीं है। हालांकि, दुनिया के कई बड़े देशों की तुलना में यह अब भी काफी कम बढ़ोतरी मानी जा रही है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर तेल संकट गहरा गया है और पाकिस्तान समेत कई देशों ने ईंधन की कीमतों में 20 से 90 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है।

किस देश का क्या हाल?

एक आंकड़े के मुताबिक पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमश: 55 और 45 पर्सेंट तक बढ़ गए हैं। वहीं, म्यांमार में पेट्रोल 89.7% और डीजल 112.7% तक महंगा हुआ जबकि मलेशिया, यूएई और अमेरिका में भी ईंधन कीमतों में 40 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह, श्रीलंका, कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल केवल 3.2% और डीजल 3.4% महंगा हुआ है।

देश पेट्रोल डीजल में बढ़ोतरी

भारत +3.2% +3.4%

म्यांमार +89.7% +112.7%

मलेशिया +56.3% +71.2%

पाकिस्तान +54.9% +44.9%

यूएई +52.4% +86.1%

अमेरिका +44.5% +48.1%

फ्रांस + 20.9% +31.0%

भारत में 4 साल बाद बढ़े दाम

बता दें कि भारत पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शुक्रवार को तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह पिछले चार वर्षों में पेट्रोल-डीजल के दाम में पहली वृद्धि है। आखिरी बार दरों में बढ़ोतरी अप्रैल 2022 में हुई थी।

दरअसल, वैश्विक ऊर्जा कीमतें 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका–इजराइल हमले के बाद और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के कारण तेजी से बढ़ीं। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य अवरूद्ध हो गया जिससे दुनिया के तेल और गैस का पांचवां हिस्सा गुजरता है। पेट्रोल और डीजल बनाने का कच्चा माल यानी कच्चा तेल संघर्ष के दौरान एक समय 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया था जबकि संघर्ष से पहले यह 70–72 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में था।

हाल के समय में कीमतें कुछ नरम हुई हैं, लेकिन फिर भी 104–110 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इससे सरकारी तेल विपणन कंपनियों को भारी घाटा हुआ लेकिन चुनाव के मद्देनजर खुदरा दरें स्थिर रखी गईं। तेल कंपनियां चुनाव से पहले पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी पर 674 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठा रही थीं।

Deepak Kumar

लेखक के बारे में

Deepak Kumar

हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

और पढ़ें
जानें Hindi News, Business News, Budget 2026, बजट 2026 Live, Income Tax Live Updates की लेटेस्ट खबरें, शेयर बाजार का लेखा-जोखा, Share Market के लेटेस्ट अपडेट्स Investment Tips के बारे में सबकुछ।,