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बचत छोड़ निवेश की राह चले भारतीय परिवार, बैंक कर्ज भी हुआ दोगुना

  • राष्ट्रीय खाता सांख्यिकी-2024 रिपोर्ट जारी की। इसके अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में परिवारों की शुद्ध बचत 23.29 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी, लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट आ रही है।

Drigraj Madheshia  नई दिल्ली, एजेंसीWed, 8 May 2024 05:10 AM
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देश में परिवारों की शुद्ध बचत घट रही है, लेकिन निवेश में दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक बीते तीन वर्षों में बचत नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक घटकर वित्त वर्ष 2022-23 में 14.16 लाख करोड़ रुपये रह गई। वहीं, निवेश करीब दोगुना हो गया है।

पांच वर्ष के निचले स्तर पर बचत

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय खाता सांख्यिकी-2024 रिपोर्ट जारी की। इसके अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में परिवारों की शुद्ध बचत 23.29 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी, लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट आ रही है। वित्त वर्ष 2021-22 में परिवारों की शुद्ध बचत घटकर 17.12 लाख करोड़ रुपये रह गई। 

यह वित्त वर्ष 2022-23 में और भी कम होकर 14.16 लाख करोड़ रुपये पर आ गई, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले शुद्ध घरेलू बचत का निचला स्तर वर्ष 2017-18 में 13.05 लाख करोड़ रुपये था। लेकिन यह 2018-19 में बढ़कर 14.92 लाख करोड़ रुपये और 2019-20 में 15.49 लाख करोड़ रुपये हो गया था।

म्युचुअल फंड में तिगुना निवेश

आंकड़ों से यह भी खुलासा हुआ है कि 2020-21 से लेकर 2022-23 के दौरान म्यूचुअल फंड में निवेश लगभग तिगुना होकर 1.79 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो 2020-21 में 64,084 करोड़ रुपये था। वहीं, शेयरों और डिबेंचर में परिवारों का निवेश इस अवधि में 1.07 लाख करोड़ रुपये से लगभग दोगुना होकर 2022-23 में 2.06 लाख करोड़ रुपये हो गया।

परिवारों को बैंक कर्ज भी दोगुना हुआ

आंकड़े बताते हैं कि परिवारों को बैंक ऋण भी इन तीन वर्षों में दोगुना होकर 2022-23 में 11.88 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह 2020-21 में 6.05 लाख करोड़ रुपये और 2021-22 में 7.69 लाख करोड़ रुपये था। वित्तीय संस्थानों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की तरफ से परिवारों को दिया जाने वाला ऋण भी वित्त वर्ष 2020-21 में 93,723 करोड़ रुपये से चार गुना बढ़कर 2022-23 में 3.33 लाख करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2021-22 में यह 1.92 लाख करोड़ था।

निवेश बढ़ने के कारण

- हाल के वर्षों में भारतीय बाजारों ने अच्छा मुनाफा दिया

- म्यूचुअल फंड योजनाओं में भी अच्छा रिटर्न मिला

- निवेश के कई अन्य विकल्प भी हैं, जो अच्छा ब्याज दे रहे

- विदेशों निवेशकों का भी विश्वास भारत पर बढ़ा

- इससे छोटे घरेलू निवेशक भी आकर्षित हुए

- डीमैट खाते 15 करोड़ हुए, जो पहले एक करोड़ थे

- डिजिटल निवेश की सुविधा से भी आंकड़ा बढ़ा

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