फ्लैट रखकर किराया कमाएं या बेचकर FD का इंटरेस्ट लें? जानिये आपके लिए क्या है सही
मुख्य बातें
- ये सवाल अक्सर लोगों के मन मे आता है कि फ्लैट रखकर किराया कमाएं या उसे बेचकर पैसा निवेश कर दें? लेकिन इस बात का जवाब इस बात में ज्यादा छिपा है कि आप उम्र के किस पड़ाव पर हैं

ये सवाल अक्सर लोगों के मन मे आता है कि फ्लैट रखकर किराया कमाएं या उसे बेचकर पैसा निवेश कर दें? लेकिन इस बात का जवाब इस बात में ज्यादा छिपा है कि आप उम्र के किस पड़ाव पर हैं। मान लीजिए 60 लाख रुपये का फ्लैट है तो उसे बेचकर एफडी का ब्याज लेना बेहतर है या किराये से हर महीने कमाई करना। रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके सीनियर सिटीजन और 30 से 40 साल की उम्र के युवाओं के लिए इस सवाल का जवाब बिल्कुल अलग हो सकता है। जानिए 15,000, 25,000 और 35,000 रुपये महीने के किराये पर कितना रिटर्न मिलेगा और फ्लैट बेचने पर 60 लाख रुपये से कितनी ब्याज से इनकम बन सकती है।
रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी जरूरत होती है नियमित आमदनी, सेफ पूंजी और मानसिक शांति। वहीं युवा उम्र में निवेश का टारगेट सिर्फ आज की आमदनी नहीं, बल्कि अगले 20-25 साल में संपत्ति को बढ़ाना भी होता है। इसलिए अगर आपके पास 60 लाख रुपये का एक्स्ट्रा फ्लैट है, तो उसे किराये पर रखना या बेचकर एफडी, बॉन्ड जैसे ऑप्शन में पैसा लगाना। इसका फैसला आपकी उम्र और फाइनेंशियल जरूरत के हिसाब से लेना बेहतर होगा।
60 लाख रुपये के फ्लैट पर ये है पूरा कैलकुलेशन
पहले समझिए 60 लाख के फ्लैट से कितना किराया मिलेगा। मान लीजिए आपके पास 60 लाख रुपये का फ्लैट है। अगर किराया 15,000 रुपये महीने मिलता है तो सालाना किराया होगा।
15,000 × 12 = 1.80 लाख रुपये
यानी 60 लाख रुपये की प्रॉपर्टी पर करीब 3 फीसदी सालाना ग्रॉस रेंटल यील्ड।
अगर किराया 25,000 रुपये महीने है तो सालाना इनकम होगी।
25,000 × 12 = 3 लाख रुपये
यानी करीब 5 फीसदी रेंटल यील्ड।
वहीं, अगर किराया 35,000 रुपये महीने है तो सालाना इनकम होगी।
35,000 × 12 = 4.20 लाख रुपये
यानी करीब 7 फीसदी ग्रॉस रेंटल यील्ड।
लेकिन यह पूरी कमाई नहीं मानी जा सकती। मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, मरम्मत, ब्रोकरेज और फ्लैट खाली रहने का नुकसान निकालने के बाद सही मायने में रिटर्न कम हो सकता है।
अगर 60 लाख रुपये एफडी में लगाएं तो कितना मिलेगा?
अब मान लीजिए फ्लैट बेचकर आपके हाथ में निवेश के लिए 60 लाख रुपये आते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर आपको एफडी पर 7 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है।
60 लाख × 7% = 4.20 लाख रुपये सालाना
यानी औसतन 35,000 रुपये महीने के बराबर ब्याज।
अगर ब्याज दर 7.5 फीसदी हो तो सालाना ब्याज
60 लाख × 7.5% = 4.50 लाख रुपये
यानी औसतन 37,500 रुपये महीने।
8 फीसदी की दर पर
60 लाख × 8% = 4.80 लाख रुपये सालाना
यानी औसतन 40,000 रुपये महीने।
ध्यान रहे कि एफडी का ब्याज बैंक, पीरियड, सीनियर सिटीजन दर और टैक्स पर निर्भर करेगा। ब्याज पर टैक्स भी लग सकता है।
युवा व्यक्ति के लिए कैलकुलेशन समझिए
मान लीजिए 35 साल के व्यक्ति के पास 60 लाख रुपये का फ्लैट है और उससे 15,000 रुपये महीने किराया मिलता है। सिर्फ मौजूदा किराये को देखकर फ्लैट बेचना जरूरी नहीं है। युवा व्यक्ति के पास लंबा निवेश समय है। आने वाले 20-25 साल में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ सकती है और किराया भी समय के साथ बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए अगर अभी 15,000 रुपये किराया मिल रहा है और भविष्य में किराया धीरे-धीरे बढ़ता है। तो लंबे पीरियड कुल किराये की आमदनी काफी बढ़ सकती है। साथ ही फ्लैट की कीमत भी बढ़ सकती है।
लेकिन अगर प्रॉपर्टी की लोकेशन कमजोर है, किराया बहुत कम है, रखरखाव महंगा है और कीमत बढ़ने की संभावना भी कम है, तो उसे बेचकर पैसा अलग-अलग निवेश ऑप्शन में लगाना ज्यादा बेहतर हो सकता है। युवा निवेशक के लिए सिर्फ एफडी ही एकमात्र विकल्प नहीं है। उसके पास लंबे पीरियड के कारण इक्विटी म्यूचुअल फंड जैसे ज्यादा जोखिम वाले ऑप्शन पर भी विचार करने का समय होता है। हालांकि निवेश का फैसला जोखिम क्षमता और फाइनेंशियल टारगेट के अनुसार होना चाहिए।
सीनियर सिटीजन के लिए फैसला कैसे बदलेगा?
अब मान लीजिए व्यक्ति की उम्र 65 साल है। उसके पास 60 लाख रुपये का फ्लैट है और उससे 15,000 रुपये महीने किराया मिल रहा है। अब यहां तस्वीर अलग है। सालाना किराया सिर्फ 1.80 लाख रुपये है। दूसरी तरफ, अगर फ्लैट बेचकर 60 लाख रुपये को 7 फीसदी ब्याज वाले एफडी में लगाया जाए तो करीब 4.20 लाख रुपये सालाना ब्याज बन सकता है। यानी शुरुआती गणित में एफडी से करीब 2.40 लाख रुपये ज्यादा सालाना इनकम बन सकती है।
अगर किराया 25,000 रुपये महीने है तो सालाना 3 लाख रुपये मिलेंगे। 7 फीसदी एफडी के उदाहरण में 4.20 लाख रुपये ब्याज के मुकाबले अंतर करीब 1.20 लाख रुपये सालाना रहेगा। लेकिन अगर फ्लैट से 35,000 रुपये महीने किराया मिल रहा है तो सालाना किराया 4.20 लाख रुपये होगा। ऐसे में 7 फीसदी एफडी के उदाहरण में किराये और ब्याज से इनकम लगभग बराबर हो जाएगी।
सीनियर सिटीजन के लिए सिर्फ एफडी ही विकल्प नहीं
रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा एक ही जगह लगाने के बजाय सेफ फिक्स्ड-इनकम ऑप्शन का मिक्स कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर पात्र सीनियर सिटीजन सरकार की योजना सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SCSS) जैसे ऑप्शन में निवेश कर सकते हैं। इस पर अभी सरकार 8 फीसदी की दर से ब्याज दे रही है।
तो किसके लिए फ्लैट बेहतर और किसके लिए बेचना?
35 साल के युवा के लिए अगर प्रॉपर्टी अच्छी लोकेशन में है और भविष्य में कीमत व किराया बढ़ने की संभावना है, तो फ्लैट रखना ज्यादा आकर्षक हो सकता है। उसके पास लंबे पीरियज का फायदा लेने का समय है।
60-65 साल के सीनियर सिटीजन के लिए अगर पेंशन काफी है, किराया कम है और फ्लैट संभालना परेशानी बन रहा है, तो बेचकर सुरक्षित फिक्स्ड-इनकम निवेश में पैसा लगाने से नियमित इनकम और मानसिक शांति मिल सकती है। लेकिन अंतिम फैसला केवल किराये और एफडी के ब्याज की तुलना से न करें। प्रॉपर्टी बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स, ब्रोकरेज और अन्य खर्चों को देखकर करें। वहीं एफडी या अन्य निवेश के ब्याज पर भी टैक्स का असर पड़ सकता है।


