अचानक पैसों की जरूरत पड़े तो पर्सनल लोन लें या क्रेडिट कार्ड? गलत फैसला पड़ सकता है भारी

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मुख्य बातें

  • Personal Loan: मुसीबत कभी बताकर नहीं आती
  • अचानक अस्पताल का बिल आ जाए, कार में बड़ी खराबी हो जाए या किसी जरूरी यात्रा के लिए तुरंत पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो सबसे पहला सवाल यही होता है कि पैसे कहां से जुटाएं?
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अचानक पैसों की जरूरत पड़े तो पर्सनल लोन लें या क्रेडिट कार्ड

Personal Loan: मुसीबत कभी बताकर नहीं आती। अचानक अस्पताल का बिल आ जाए, कार में बड़ी खराबी हो जाए या किसी जरूरी यात्रा के लिए तुरंत पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो सबसे पहला सवाल यही होता है कि पैसे कहां से जुटाएं? अगर सेविंग्स कम पड़ जाएं तो आमतौर पर दो विकल्प सामने आते हैं, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड। दोनों से तुरंत पैसे मिल सकते हैं, लेकिन दोनों का इस्तेमाल करने का तरीका और खर्च काफी अलग है। गलत विकल्प चुनने पर छोटी-सी जरूरत आने वाले महीनों में बड़ा वित्तीय बोझ बन सकती है। इसलिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि पैसा कितनी जल्दी मिल रहा है। यह भी समझना जरूरी है कि उसे चुकाने में आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा।

पर्सनल लोन कब बेहतर?

पर्सनल लोन में बैंक या वित्तीय संस्थान आपको एक तय रकम एक साथ देता है। इसके बाद आपको पहले से तय अवधि तक ईएमआई के जरिए रकम चुकानी होती है। आमतौर पर इसकी ब्याज दर भी तय होती है, जिससे हर महीने की देनदारी का अंदाजा पहले से लगाया जा सकता है।

अगर आपको कई लाख रुपये की जरूरत है और रकम चुकाने में कई महीने या साल लग सकते हैं, तो पर्सनल लोन ज्यादा व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। उदाहरण के लिए किसी मेडिकल इमरजेंसी में बड़ी रकम की जरूरत पड़ने पर क्रेडिट कार्ड का पूरा बकाया लंबे समय तक बनाए रखना काफी महंगा साबित हो सकता है। पर्सनल लोन की ईएमआई सिस्टम आपको कर्ज को धीरे-धीरे चुकाने में मदद करती है। आजकल कई मामलों में पर्सनल लोन तेजी से भी मिल सकता है, जिससे इमरजेंसी में यह उपयोगी विकल्प बन जाता है।

छोटी रकम के लिए क्रेडिट कार्ड है काम का

अगर जरूरत छोटी है और आपको भरोसा है कि कुछ ही दिनों या हफ्तों में पूरा पैसा चुका देंगे, तो क्रेडिट कार्ड ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है। मान लीजिए अचानक 20,000 रुपये की जरूरत पड़ गई और अगले महीने सैलरी आते ही पूरा बिल चुकाया जा सकता है। ऐसे में अलग से लोन के लिए आवेदन करने और ईएमआई शुरू करने के बजाय क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना आसान हो सकता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर क्रेडिट कार्ड का पूरा बकाया तय तारीख तक चुका दिया जाए, तो खरीदारी पर ब्याज से बचा जा सकता है। लेकिन यही सुविधा लापरवाही करने पर सबसे महंगा कर्ज भी बन सकती है।

क्रेडिट कार्ड में देरी पड़ सकती है भारी

क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर पूरा नहीं चुकाने पर ब्याज और दूसरे शुल्क तेजी से बढ़ सकते हैं। सिर्फ न्यूनतम रकम भरते रहने से कर्ज लंबे समय तक चलता रह सकता है और कुल भुगतान काफी बढ़ सकता है। इसलिए क्रेडिट कार्ड को लंबे समय के कर्ज की तरह इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। अगर रकम बड़ी है और उसे चुकाने में कई महीने लगेंगे, तो पर्सनल लोन की ईएमआई सिस्टम ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।

सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला न करें

लोन या क्रेडिट कार्ड चुनते समय केवल ब्याज दर देखना काफी नहीं है। पर्सनल लोन में प्रोसेसिंग फीस, लेट पेमेंट चार्ज और अन्य शुल्क हो सकते हैं। वहीं क्रेडिट कार्ड में देर होने पर लेट फीस, फाइनेंस चार्ज और दूसरे शुल्क लग सकते हैं।

Sheetal

लेखक के बारे में

Sheetal
शीतल को पत्रकारिता में 15 सालों का अनुभव है। पर्सलन फाइनेंस, गोल्ड, सिल्वर, कारोबारी सफर और स्टार्टअप की खबरें लिखती हैं। अमर उजाला से अपने करियर की शुरुआत की। अब तक इकोनॉमिक टाइम्स हिंदी, भास्कर, लाइव हिन्दुस्तान और मनीकंट्रोल हिंदी (Network18) में काम किया है। अब लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट एडिटर खबरें आप तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। और पढ़ें

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