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विवाद के बाद बैकफुट पर ओयो, कंपनी ने वापस लिया बोनस शेयर का प्रपोजल

विवाद के बाद बैकफुट पर ओयो, कंपनी ने वापस लिया बोनस शेयर का प्रपोजल

संक्षेप:

ओयो की मूल कंपनी प्रिज्म ने अपने बोनस शेयर प्रस्ताव को वापस ले लिया है। इसके साथ ही कंपनी ने घोषणा की है कि वह एक नई, सरल और पारदर्शी बोनस शेयर योजना लाएगी, जिसमें सभी शेयरधारक-इक्विटी और वरीयता दोनों- समान रूप से शामिल होंगे।

Mon, 3 Nov 2025 07:22 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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विवाद के बाद हॉस्पिटैलिटी की दिग्गज ओयो की मूल कंपनी प्रिज्म ने अपने बोनस शेयर प्रस्ताव को वापस ले लिया है। इसके साथ ही कंपनी ने घोषणा की है कि वह एक नई, सरल और पारदर्शी बोनस शेयर योजना लाएगी, जिसमें सभी शेयरधारक-इक्विटी और वरीयता दोनों- समान रूप से शामिल होंगे।

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कंपनी ने स्पष्ट किया कि नया प्रस्ताव किसी भी तरह की ‘ऑप्ट-इन’ प्रक्रिया पर आधारित नहीं होगा और प्रत्येक शेयरधारक स्वतः इसका लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इससे पहले खबर आई थी कि ओयो ने अपने गैर-सूचीबद्ध इक्विटी शेयरधारकों के लिए संभावित आईपीओ से संबंधित बोनस शेयर जारी करने के आवेदन की अंतिम तिथि एक नवंबर से बढ़ाकर सात नवंबर कर दी है। कंपनी ने शेयरधारकों को भेजे संदेश में कहा कि डाक मतपत्र प्रक्रिया के दौरान उसे प्रतिक्रियाएं मिली हैं और उसने निवेशकों को उनके लिए उपयुक्त बोनस विकल्प चुनने के लिए पर्याप्त समय देने का निर्णय लिया है।

क्या थी पहले की योजना?

दरअसल, पहले की योजना में कंपनी ने डाक मतपत्र के माध्यम से बोनस शेयर जारी करने का प्रस्ताव रखा था, जो सामान्य बोनस इश्यू की तुलना में काफी जटिल था। इस प्रस्ताव के तहत निवेशकों को प्रत्येक 6,000 इक्विटी शेयरों पर एक बोनस अनिवार्य परिवर्तनीय अधिमान्य शेयर (CCPS) मिलना था लेकिन यह लाभ केवल उन लोगों को मिलता, जिन्होंने तय समयसीमा के भीतर विशेष प्रक्रिया का पालन किया होता। बता दें कि योजना में दो क्लास- A और B बनाए गए थे। जिन शेयरधारकों ने कोई कदम नहीं उठाया, वे स्वतः क्लास A में आ जाते जबकि जो निवेशक सक्रिय रूप से दस्तावेज जमा करते, वे क्लास B का चुनाव कर सकते थे। क्लास B में निवेशकों को अधिक मुनाफे का अवसर था।

क्या था कंपनी का इरादा?

कंपनी का कहना था कि यह योजना लॉन्ग टर्म के निवेशकों को पुरस्कृत करने के उद्देश्य से बनाई गई ताकि वे ओयो के आईपीओ तक निवेशित बने रहें। हालांकि, निवेशकों ने इस जटिल ढांचे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। छोटे निवेशकों ने शिकायत की कि सीमित समयसीमा, पेपरवर्क और पात्रता शर्तों के चलते यह योजना बड़े शेयरधारकों को लाभ पहुंचाने वाली साबित हो सकती है। विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने निवेशकों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए समयसीमा बढ़ाई, प्रक्रियाएं आसान कीं और दस्तावेजों की जरूरत घटाई लेकिन असंतोष बना रहा।

Deepak Kumar

लेखक के बारे में

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दीपक कुमार, हिन्दुस्तान डिजिटल में बिजनेस की खबरें लिखते हैं। वह स्टॉक मार्केट, यूटिलिटी समेत बिजनेस सेक्शन से जुड़ी हर खबरों की ना सिर्फ समझ रखते हैं, बल्कि आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। दीपक की बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी जबरदस्त पकड़ है। उन्हें बेहतरीन काम की सराहना मिलती रही है और सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से सीवान (बिहार) के रहने वाले दीपक के पास करीब 11 साल का अनुभव है। करियर की बात करें तो अमर उजाला से शुरू हुआ सफर दैनिक भास्कर,आजतक, इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप होते हुए हिन्दुस्तान डिजिटल तक पहुंच चुका है। फिलहाल, वह हिन्दुस्तान डिजिटल में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं, पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए हिमाचल यूनिवर्सिटी चले गए। दीपक सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं। उन्हें नई-नई तकनीक से रूबरू होना अच्छा लगता है। खाली वक्त में फिल्में देखना या क्रिकेट खेलना पसंद करते हैं। और पढ़ें
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