
विवाद के बाद बैकफुट पर ओयो, कंपनी ने वापस लिया बोनस शेयर का प्रपोजल
ओयो की मूल कंपनी प्रिज्म ने अपने बोनस शेयर प्रस्ताव को वापस ले लिया है। इसके साथ ही कंपनी ने घोषणा की है कि वह एक नई, सरल और पारदर्शी बोनस शेयर योजना लाएगी, जिसमें सभी शेयरधारक-इक्विटी और वरीयता दोनों- समान रूप से शामिल होंगे।
विवाद के बाद हॉस्पिटैलिटी की दिग्गज ओयो की मूल कंपनी प्रिज्म ने अपने बोनस शेयर प्रस्ताव को वापस ले लिया है। इसके साथ ही कंपनी ने घोषणा की है कि वह एक नई, सरल और पारदर्शी बोनस शेयर योजना लाएगी, जिसमें सभी शेयरधारक-इक्विटी और वरीयता दोनों- समान रूप से शामिल होंगे।

कंपनी ने स्पष्ट किया कि नया प्रस्ताव किसी भी तरह की ‘ऑप्ट-इन’ प्रक्रिया पर आधारित नहीं होगा और प्रत्येक शेयरधारक स्वतः इसका लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इससे पहले खबर आई थी कि ओयो ने अपने गैर-सूचीबद्ध इक्विटी शेयरधारकों के लिए संभावित आईपीओ से संबंधित बोनस शेयर जारी करने के आवेदन की अंतिम तिथि एक नवंबर से बढ़ाकर सात नवंबर कर दी है। कंपनी ने शेयरधारकों को भेजे संदेश में कहा कि डाक मतपत्र प्रक्रिया के दौरान उसे प्रतिक्रियाएं मिली हैं और उसने निवेशकों को उनके लिए उपयुक्त बोनस विकल्प चुनने के लिए पर्याप्त समय देने का निर्णय लिया है।
क्या थी पहले की योजना?
दरअसल, पहले की योजना में कंपनी ने डाक मतपत्र के माध्यम से बोनस शेयर जारी करने का प्रस्ताव रखा था, जो सामान्य बोनस इश्यू की तुलना में काफी जटिल था। इस प्रस्ताव के तहत निवेशकों को प्रत्येक 6,000 इक्विटी शेयरों पर एक बोनस अनिवार्य परिवर्तनीय अधिमान्य शेयर (CCPS) मिलना था लेकिन यह लाभ केवल उन लोगों को मिलता, जिन्होंने तय समयसीमा के भीतर विशेष प्रक्रिया का पालन किया होता। बता दें कि योजना में दो क्लास- A और B बनाए गए थे। जिन शेयरधारकों ने कोई कदम नहीं उठाया, वे स्वतः क्लास A में आ जाते जबकि जो निवेशक सक्रिय रूप से दस्तावेज जमा करते, वे क्लास B का चुनाव कर सकते थे। क्लास B में निवेशकों को अधिक मुनाफे का अवसर था।
क्या था कंपनी का इरादा?
कंपनी का कहना था कि यह योजना लॉन्ग टर्म के निवेशकों को पुरस्कृत करने के उद्देश्य से बनाई गई ताकि वे ओयो के आईपीओ तक निवेशित बने रहें। हालांकि, निवेशकों ने इस जटिल ढांचे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। छोटे निवेशकों ने शिकायत की कि सीमित समयसीमा, पेपरवर्क और पात्रता शर्तों के चलते यह योजना बड़े शेयरधारकों को लाभ पहुंचाने वाली साबित हो सकती है। विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने निवेशकों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए समयसीमा बढ़ाई, प्रक्रियाएं आसान कीं और दस्तावेजों की जरूरत घटाई लेकिन असंतोष बना रहा।





