Hindi Newsबिज़नेस न्यूज़onions are making farmers cry struggling to recover costs with prices in the market rising to rs 10
किसानों को रुला रहा प्याज, लागत निकालने के पड़े लाले, मंडी में भाव ₹10

किसानों को रुला रहा प्याज, लागत निकालने के पड़े लाले, मंडी में भाव ₹10

संक्षेप:

देश के कई राज्यों में इस बार बारिश ने फसलों को बर्बाद कर दिया। इसका सबसे अधिक प्रभाव प्याज और आलू की खेती में पड़ा। उत्पादन घट गया, किसानों को अपनी लागत निकालने में मुश्किल हुई।

Thu, 30 Oct 2025 06:08 AMDrigraj Madheshia मिंट
share Share
Follow Us on

प्रज्ञा श्रीवास्तव

अक्सर सितंबर से अक्टूबर तक आम लोगों की आंख से आंसू निकालने वाला प्याज इस बार किसानों को रुला रहा है। लागत के मुकाबले प्याज की मिल रही कम कीमत से देश भर के किसान परेशान हैं। कई किसान संगठनों ने इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। कई राज्यों के किसान फसल को सड़क पर फेंक कर विरोध दर्ज करा रहे हैं। राजस्थान और महाराष्ट्र के कई शहरों में पिछले दिनों किसानों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

स्थानीय मंडियों में प्याज का भाव चार से छह रुपये प्रति किलो तक गिर चुका है, जबकि इसे उगाने में किसानों को औसतन नौ से 11 रुपये प्रति किलो तक की लागत आती है। इस समय नासिक की मंडी में लगभग 1000 प्रति क्विंटल के हिसाब से थोक प्याज का भाव है।

किसान संगठनों का कहना है कि इसी समय पिछले साल प्याज का थोक भाव लगभग 2000 प्रति क्विंटल था तो उम्मीद थी कि इस साल भी अच्छे दाम मिलेंगे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज जैसी फसलों के लिए मूल्य स्थिरीकरण नीति और भंडारण सुविधाओं का अभाव किसानों की सबसे बड़ी समस्या है। यदि सरकार समय पर हस्तक्षेप नहीं करती है तो आने वाले समय में किसान फसल बोने से भी कतराने लगेंगे।

व्यापारी अभी भी कर रहे कमाई

इसी समय खुदरा बाजार में उपभोक्ता अभी भी 20 रुपये किलो प्याज खरीद रहे हैं, जिससे यह साफ झलकता है कि बीच के व्यापारी और बिचौलिये अब भी लाभ कमा रहे हैं, जबकि किसान घाटे में हैं। किसानों से फसल खरीदकर दोगुने दामों में बेच रहे हैं।

किसानों को नुकसान का कारण

1-निर्यात में कमी : प्याज की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण 2023 से निर्यात पर प्रतिबंधों और पाबंदियों का जारी रहना है। देश में सरकार ने प्याज कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाए। मई 2024 तक प्रतिबंध हटा लिया गया, लेकिन कुछ प्रतिबंध जारी रहे।

2-बाजार में प्रचुरता : बाजार में प्याज की अधिक आपूर्ति कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण है। विशेषज्ञों के अनुसार, जबतक प्याज के निर्यात को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा तब तक मूल्य में वृद्धि के आसार नहीं हैं। अन्य देशों में भारतीय प्याज के न जाने से किसानों को अच्छी कीमत नहीं मिल पा रही है।

3-भंडारण की चुनौती : पर्याप्त भंडारण सुविधा न होने और जल्दी बाजार में बेचने की प्रवृत्ति होने से बाजार में एक साथ बहुत सारा माल आ गया। इससे मांग की तुलना में अधिक आपूर्ति की स्थिति बन गई। किसान प्याज का भंडारण नहीं कर पा रहे हैं।

4- बारिश का असर : देश के कई राज्यों में इस बार बारिश ने फसलों को बर्बाद कर दिया। इसका सबसे अधिक प्रभाव प्याज और आलू की खेती में पड़ा। उत्पादन घट गया, किसानों को अपनी लागत निकालने में मुश्किल हुई। इन क्षेत्रों के किसान नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से मांग कर रहे हैं।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia
टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल मिलाकर 20 साल का अनुभव। एचटी डिजिटल से पहले दृगराज न्यूज नेशन, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, सहारा समय और वॉच न्यूज एमपी /सीजी में रिपोर्टिग और डेस्क पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। स्पेशल स्टोरीज,स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स, सिनेमा, स्पोर्ट्स के बाद अब बिजनेस की खबरें लिख रहे हैं। दृगराज, लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
जानें Hindi News, Business News की लेटेस्ट खबरें, शेयर बाजार का लेखा-जोखा Share Market के लेटेस्ट अपडेट्स Investment Tips के बारे में सबकुछ।