
किसानों को रुला रहा प्याज, लागत निकालने के पड़े लाले, मंडी में भाव ₹10
देश के कई राज्यों में इस बार बारिश ने फसलों को बर्बाद कर दिया। इसका सबसे अधिक प्रभाव प्याज और आलू की खेती में पड़ा। उत्पादन घट गया, किसानों को अपनी लागत निकालने में मुश्किल हुई।
प्रज्ञा श्रीवास्तव
अक्सर सितंबर से अक्टूबर तक आम लोगों की आंख से आंसू निकालने वाला प्याज इस बार किसानों को रुला रहा है। लागत के मुकाबले प्याज की मिल रही कम कीमत से देश भर के किसान परेशान हैं। कई किसान संगठनों ने इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। कई राज्यों के किसान फसल को सड़क पर फेंक कर विरोध दर्ज करा रहे हैं। राजस्थान और महाराष्ट्र के कई शहरों में पिछले दिनों किसानों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।

स्थानीय मंडियों में प्याज का भाव चार से छह रुपये प्रति किलो तक गिर चुका है, जबकि इसे उगाने में किसानों को औसतन नौ से 11 रुपये प्रति किलो तक की लागत आती है। इस समय नासिक की मंडी में लगभग 1000 प्रति क्विंटल के हिसाब से थोक प्याज का भाव है।
किसान संगठनों का कहना है कि इसी समय पिछले साल प्याज का थोक भाव लगभग 2000 प्रति क्विंटल था तो उम्मीद थी कि इस साल भी अच्छे दाम मिलेंगे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज जैसी फसलों के लिए मूल्य स्थिरीकरण नीति और भंडारण सुविधाओं का अभाव किसानों की सबसे बड़ी समस्या है। यदि सरकार समय पर हस्तक्षेप नहीं करती है तो आने वाले समय में किसान फसल बोने से भी कतराने लगेंगे।
व्यापारी अभी भी कर रहे कमाई
इसी समय खुदरा बाजार में उपभोक्ता अभी भी 20 रुपये किलो प्याज खरीद रहे हैं, जिससे यह साफ झलकता है कि बीच के व्यापारी और बिचौलिये अब भी लाभ कमा रहे हैं, जबकि किसान घाटे में हैं। किसानों से फसल खरीदकर दोगुने दामों में बेच रहे हैं।
किसानों को नुकसान का कारण
1-निर्यात में कमी : प्याज की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण 2023 से निर्यात पर प्रतिबंधों और पाबंदियों का जारी रहना है। देश में सरकार ने प्याज कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाए। मई 2024 तक प्रतिबंध हटा लिया गया, लेकिन कुछ प्रतिबंध जारी रहे।
2-बाजार में प्रचुरता : बाजार में प्याज की अधिक आपूर्ति कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण है। विशेषज्ञों के अनुसार, जबतक प्याज के निर्यात को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा तब तक मूल्य में वृद्धि के आसार नहीं हैं। अन्य देशों में भारतीय प्याज के न जाने से किसानों को अच्छी कीमत नहीं मिल पा रही है।
3-भंडारण की चुनौती : पर्याप्त भंडारण सुविधा न होने और जल्दी बाजार में बेचने की प्रवृत्ति होने से बाजार में एक साथ बहुत सारा माल आ गया। इससे मांग की तुलना में अधिक आपूर्ति की स्थिति बन गई। किसान प्याज का भंडारण नहीं कर पा रहे हैं।
4- बारिश का असर : देश के कई राज्यों में इस बार बारिश ने फसलों को बर्बाद कर दिया। इसका सबसे अधिक प्रभाव प्याज और आलू की खेती में पड़ा। उत्पादन घट गया, किसानों को अपनी लागत निकालने में मुश्किल हुई। इन क्षेत्रों के किसान नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से मांग कर रहे हैं।





