प्याज 25 से ₹65 और चीनी हुई 44 से ₹71, दोनों में लगी आदमी की कमर तोड़ने की होड़
मुख्य बातें
- Onion Sugar Price Hike: 12 अगस्त से 22 अगस्त के बीच चीनी 14 से 17 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो गई
- एक महीने पहले 25 रुपये मिलने वाला प्याज कई जगहों पर 65 रुपये के पार है

सावन में प्याज से भले ही लोग दूरी बनाए हुए हैं और त्योहार अभी दूर हैं तो चीनी की रिटेल डिमांड भी बहुत अधिक नहीं है, लेकिन ये दोनों चीजें आम आदमी की कमर तोड़ने की होड़ लगा रखी हैं। एक महीने पहले 25 रुपये मिलने वाला प्याज कई जगहों पर 65 रुपये के पार है तो चीनी 70 रुपये किलो के ऊपर चली गई है। हालांकि, मोदी सरकार भी प्याज और चीनी के दाम पर लगाम लगाने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है।
प्याज क्यों हो रहा महंगा
देशभर में प्याज के दाम तेजी से बढ़ने की वजह अचानक मांग बढ़ना नहीं, बल्कि पुराने रबी स्टॉक के खत्म होने और नई फसल की आवक के बीच पैदा हुआ मौसमी अंतर है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 22 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 42 रुपये प्रति किलो पहुंच गई।
यह एक साल पहले के मुकाबले करीब 45 फीसदी और पिछले महीने की तुलना में 19 फीसदी ज्यादा है। दिल्ली में प्याज 65 रुपये किलो तक पहुंच गया है, जबकि एक साल पहले यहां भाव करीब 35 रुपये था। चेन्नई में भी कीमत 58 रुपये किलो हो गई है, जो पिछले साल 33 रुपये थी।
पुराने स्टॉक खत्म, नई फसल का इंतजार
भारत में प्याज की कीमतों का बड़ा हिस्सा इसकी मौसमी आवक पर निर्भर करता है। मार्च-अप्रैल में तैयार होने वाली रबी प्याज की फसल देश की मुख्य भंडारण वाली फसल है। यही स्टॉक कई महीनों तक बाजार की जरूरत पूरी करता है और आमतौर पर अक्टूबर तक आपूर्ति का प्रमुख स्रोत रहता है, लेकिन इस साल पुराने स्टॉक पर दबाव ज्यादा है।
महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से देर से तैयार होने वाली फसल और स्टोर किए हुए प्याज की गुणवत्ता प्रभावित हुई। इसका असर अब उस समय दिखाई दे रहा है जब पुराने स्टॉक तेजी से कम हो रहे हैं।
खरीफ फसल भी देर से आएगी: अब बाजार को अगली बड़ी राहत खरीफ प्याज की फसल से मिलने की उम्मीद है, लेकिन महाराष्ट्र में मानसून देर से आने के कारण खरीफ प्याज की बुवाई प्रभावित हुई है, जिससे इसकी कटाई और बाजार में आवक भी आगे खिसक सकती है।
10 दिन में चीनी के दाम में ₹17 तक उछाल
देश के प्रमुख शहरों में चीनी की खुदरा कीमतों में अगस्त के दूसरे पखवाड़े में अचानक तेज उछाल देखने को मिला है। 12 अगस्त से 22 अगस्त के बीच चीनी 14 से 17 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो गई। इस दौरान गुवाहाटी में कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी और यहां चीनी का भाव 71 रुपये किलो पहुंच गया। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में भी चीनी की कीमत 68 से 70 रुपये किलो के स्तर पर पहुंच गई है।
ChiniMandi के आंकड़ों के मुताबिक, 12 अगस्त को दिल्ली में चीनी 54 रुपये किलो थी, जो 22 अगस्त को बढ़कर 68 रुपये किलो हो गई। यानी महज 10 दिनों में दिल्ली में भाव 14 रुपये किलो बढ़ गया। इसी तरह कानपुर में कीमत 54 से बढ़कर 69 रुपये, रायपुर में 54 से 68 रुपये और मुंबई में 53 से 68 रुपये किलो हो गई।
गुवाहाटी में सबसे ज्यादा तेजी
क्षेत्रवार देखें तो गुवाहाटी में चीनी की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी है। यहां 12 अगस्त को भाव 54 रुपये किलो था, जो 22 अगस्त को बढ़कर 71 रुपये किलो हो गया। उपभोक्ताओं को सिर्फ 10 दिनों में 17 रुपये ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं।
रांची और कोलकाता में भी चीनी के भाव में 16 रुपये किलो की तेजी दर्ज की गई। दोनों शहरों में 12 अगस्त को चीनी 54 रुपये किलो थी, जबकि 22 अगस्त को भाव 70 रुपये किलो पहुंच गया। हैदराबाद में कीमत 54 से बढ़कर 70 रुपये और चेन्नई में 55 से बढ़कर 70 रुपये किलो हो गई।
17 अगस्त के बाद तेजी ने पकड़ी रफ्तार
डेटा में सबसे खास बात यह है कि 17 अगस्त के बाद चीनी की कीमतों में तेजी अचानक तेज हो गई। दिल्ली में 17 अगस्त को भाव 59 रुपये किलो था। अगले दिन यह 62 रुपये, 19 अगस्त को 64 रुपये और 20 अगस्त को 67 रुपये किलो पहुंच गया। इसके बाद 21 अगस्त को भाव 68 रुपये किलो हुआ और 22 अगस्त को भी इसी स्तर पर बना रहा। यानी दिल्ली में केवल 17 से 20 अगस्त के बीच चार दिनों में चीनी 8 रुपये किलो महंगी हो गई। दूसरे शहरों में भी इसी तरह तेज बढ़ोतरी देखने को मिली।
क्या उपाय कर रही सरकार
प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने अब ‘कांदा एक्सप्रेस’ शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत नासिक से प्याज को विशेष ट्रेनों के जरिए दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे बड़े खपत केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। सरकार अपने बफर स्टॉक की प्याज को खुले बाजार में भी उतारने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद उन शहरों में आपूर्ति बढ़ाना है जहां प्याज की खुदरा कीमत राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर पहुंच गई है।
चीनी की कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार जमाखोरों पर कड़ी कार्रवाई कर रही है। चीनी मिलों को सरकार टाइट कर चुकी है और 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी सरकार दे चुकी है। यानी त्योहारों से पहले चीनी के दाम गिरने के प्रबल आसार हैं।


