Oil Price Crash: कच्चे तेल के दाम धड़ाम, 4 दिन में 16% टूटा, घट सकते हैं पेट्रोल-डीजल के रेट
मुख्य बातें
- Crude Oil Price: पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की उम्मीद बढ़ गई है
- पिछले चार कारोबारी सत्रों में कच्चा तेल करीब 16% टूट चुका है, जो इस साल की सबसे लंबी गिरावट मानी जा रही है
ग्लोबल ऑयल मार्केट में गिरावट का सिलसिला जारी है। अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए होने वाले समझौते की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतें तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 77 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा है। पिछले चार कारोबारी सत्रों में इसमें करीब 16% की गिरावट आ चुकी है, जो इस साल की सबसे लंबी गिरावट मानी जा रही है। वहीं वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी 79 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बंद हुआ।
अमेरिका-ईरान समझौते का असर
शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इस समझौते के तहत ईरान को अपना तेल निर्यात फिर से शुरू करने की मंजूरी मिल सकती है। बाजार को उम्मीद है कि इससे वैश्विक सप्लाई बढ़ेगी और तेल की उपलब्धता बेहतर होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धविराम और होर्मुज के खुलने से एनर्जी मार्केट पर बना दबाव कम होगा। बता दें होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के करीब 20% समुद्री तेल व्यापार का प्रमुख मार्ग है।
अभी भी बनी हुई हैं चुनौतियां
हालांकि समझौते से राहत की उम्मीद है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की आवाजाही सामान्य होने में समय लग सकता है। शुरुआती हफ्तों में अमेरिकी नौसेना के जहाजों को तेल टैंकरों की सुरक्षा करनी पड़ सकती है और समुद्री मार्गों की जांच भी जारी रहेगी।
ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक अगले एक महीने तक जहाजों की आवाजाही सामान्य गति से कम रह सकती है। हालांकि फ्यूचर्स मार्केट फिलहाल आगे की संभावनाओं को देखते हुए तेल में कमजोरी दिखा रहा है।
दूसरी ओर तेजी से घट रहा है तेल भंडार
तेल कीमतों में गिरावट के बीच एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि अमेरिका के कच्चे तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार पिछले सप्ताह अमेरिकी तेल भंडार में करीब 83 लाख बैरल की कमी आई है। ओक्लाहोमा के कुशिंग हब में भी स्टॉक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यानी सप्लाई बढ़ने की उम्मीद और घटते भंडार के बीच बाजार फिलहाल संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
भारत के लिए क्या है फायदा?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और आने वाले समय में दाम घट सकते हैं। इसके अलावा सरकार का आयात बिल घट सकता है और रुपये को मजबूती मिल सकती है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


