ईरान-अमेरिका युद्ध से OMC शेयर धड़ाम, तेल निकालने वाली कंपनियों के शेयर चढ़े
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के शेयर में 5.03% तक की गिरावट आई, वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के शेयर 5.31% लुढ़क गए। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के शेयरों में तो 6.09% तक का गोता लगा दिया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर भी 3% से अधिक टूट गए।

भारतीय शेयर बाजार में आज भारी गिरावट देखी गई। इसकी वजह थी मिडिल ईस्ट में जारी जंग। इस युद्ध ने कच्चे तेल की कीमतों में इतनी तेज उछाल ला दी कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के शेयर में 5.03% तक की गिरावट आई, वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के शेयर 5.31% लुढ़क गए। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के शेयरों में तो 6.09% तक का गोता लगा दिया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर भी 3% से अधिक टूट गए।
उत्पादक कंपनियों के शेयरों में तेजी
इसके बिल्कुल उलट, तेल निकालने वाली कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल आया। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) के शेयर में 4.73% की उछाल आई और ऑयल इंडिया के शेयर 4.43% चढ़ गए।
युद्ध ने कैसे मचाया बाजार में हड़कंप?
ओएमसी के शेयरों में यह गिरावट उस वक्त आई जब कच्चे तेल की कीमतों ने चार साल में सबसे बड़ी छलांग लगाई। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के खिलाफ छेड़ी गई जंग ने वैश्विक क्रूड मार्केट में हड़कंप मचा दिया। ब्रेंट क्रूड ने एक समय 13% की उछाल के साथ 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी छू लिया, जो जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
क्या है पूरा मामला?
इजराइल ने सोमवार को तेहरान पर नए हवाई हमले किए और लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह आतंकवादियों के ठिकानों पर अपना सैन्य अभियान तेज कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरानी ठिकानों के खिलाफ यह संयुक्त अभियान कई हफ्तों तक चल सकता है।
सप्ताहांत में यह संघर्ष और भी भयावह हो गया जब अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों में ईरान के आयतुल्लाह खामेनेई मारे गए। इस घटना ने पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव को चरम सीमा पर पहुंचा दिया है।
भारत पर क्या होगा असर?
खबरों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग गतिविधियों में बाधा आ सकती है। यह रास्ता दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार और भारत के 40% से अधिक कच्चे तेल आयात का मार्ग है। अगर यह संघर्ष लंबा खिंचा, तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है। भारत के लिए यह सीधा झटका है, क्योंकि क्रूड में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से सालाना आयात बिल में लगभग 2 अरब डॉलर का इजाफा होता है।
बाजार पर क्या होगा असर?
जेएम फाइनेंशियल का कहना है कि बाजार अब कमाई से प्रेरित कारोबार से हटकर तेल की कीमतों से प्रेरित कारोबार की ओर बढ़ सकता है। अपस्ट्रीम ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र को समर्थन मिल सकता है, लेकिन ओएमसी, पेंट, टायर, एविएशन और केमिकल्स जैसे तेल संवेदनशील क्षेत्रों के मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। यहां सिर्फ शेयर के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में 'कुछ अलग' पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
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