NSE IPO को बोर्ड ने दी मंजूरी, लिस्टिंग प्रोसेस के लिए कमिटी का गठन
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने शुक्रवार को कहा कि उसके गवर्निंग बोर्ड ने मौजूदा शेयरहोल्डर्स द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए आईपीओ लाने की योजना को मंजूरी दे दी है। पिछले सप्ताह ही सेबी ने एनएसई आईपीओ के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी दिया था।
NSE IPO news: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) बोर्ड ने कंपनी के आईपीओ योजना को हरी झंडी दे दी है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने शुक्रवार को कहा कि उसके गवर्निंग बोर्ड ने मौजूदा शेयरहोल्डर्स द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए आईपीओ लाने की योजना को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही बोर्ड ने अपनी IPO कमिटी के फिर से गठन को भी मंजूरी दी है। यह कमिटी IPO प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए गवर्निंग बोर्ड द्वारा सौंपे गए खास काम करेगी।
कमिटी की अध्यक्षता तेबलेश पांडे करेंगे और इसमें पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर श्रीनिवास इंजेती, ममता बिस्वाल, अभिलाषा कुमारी और प्रोफेसर शिवकुमार के साथ ही NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO आशीष चौहान शामिल होंगे। उम्मीद है कि यह कमिटी लिस्टिंग प्रक्रिया के लिए सेंट्रल अथॉरिटी के तौर पर काम करेगी, जिसमें लिस्टिंग प्रक्रिया तय करना और रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) का ड्राफ्ट बनाने के लिए जरूरी मर्चेंट बैंकरों और कानूनी सलाहकारों को नियुक्त करने के लिए मानदंड तय करना शामिल है।
2016 से अटकी थी योजना
पिछले सप्ताह ही बाजार नियामक सेबी ने एनएसई आईपीओ के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी दिया था। दरअसल, देश के सबसे बड़े शेयर बाजार एनएसई की सूचीबद्धता की योजना 2016 से ही अधर में लटकी हुई थी। उस समय एक्सचेंज ने मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचकर (ओएफएस) करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए शुरुआती दस्तावेज जमा किए थे। हालांकि, कामकाज के तौर-तरीकों में कमियों और 'को-लोकेशन' मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण सेबी ने इसकी मंजूरी रोक दी थी। तब से एनएसई ने अनुमति के लिए कई बार नियामक से संपर्क किया लेकिन बीते सप्ताह इसे सेबी से हरी झंडी मिली है।
ग्रे मार्केट में वैल्यू 5 लाख करोड़ रुपये
इसे भारत के कैपिटल मार्केट में सबसे बड़े IPO में से एक होने की उम्मीद है। बता दें कि NSE के पास लगभग 1.77 लाख शेयरहोल्डर हैं और ग्रे मार्केट में इसकी वैल्यू 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। इस लिस्टिंग को भारत के कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक घटना के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि NSE वॉल्यूम के हिसाब से देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और फाइनेंशियल मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर में इसकी अहम भूमिका है।





