विदेश से माता-पिता को पैसे भेज रहे? ये एक गलती भेजवा सकती है इनकम टैक्स का नोटिस

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • विदेश में रहने वाले NRI अपने माता-पिता को पैसे भेज सकते हैं और निर्धारित रिश्तेदारों को दिए गए ऐसे गिफ्ट पर सामान्य तौर पर इनकम टैक्स नहीं लगता
  • लेकिन बड़ी रकम भारत भेजते समय पैसे का रिकॉर्ड सही रखना बेहद जरूरी है
  • अमेरिका से भेजे गए ₹11 लाख को लेकर टैक्स नोटिस का विवाद सामने आया था

NRI money transfer
विदेश से घर पैसे भेजने वालों के लिए जरूरी खबर।

विदेश में रहने वाले भारतीय यानी NRI अक्सर अपने माता-पिता और परिवार की मदद के लिए भारत में पैसे भेजते हैं। यह एक सामान्य और वैलिड प्रक्रिया है, लेकिन बड़ी रकम बिना सही दस्तावेज और बैंकिंग रिकॉर्ड के भेजने पर आयकर विभाग की नजर पड़ सकती है। खास तौर पर अगर माता-पिता के बैंक खाते में अचानक बड़ी रकम जमा होती है और उसके स्रोत या उद्देश्य का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो टैक्स विभाग सवाल पूछ सकता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें अमेरिका में रहने वाले एक NRI ने अपने माता-पिता के खाते में करीब ₹11 लाख भेजे थे। इस रकम को लेकर आयकर नोटिस जारी हुआ और मामला करीब 6 साल तक चला। बाद में मई 2026 में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने नोटिस को खारिज कर दिया। इस मामले से साफ है कि परिवार को भेजे गए पैसे पर आमतौर पर टैक्स नहीं लगता, लेकिन उसके स्रोत और उद्देश्य का रिकॉर्ड रखना बेहद जरूरी है।

अगर कोई NRI अपने माता-पिता को पैसे भेजता है, तो यह रकम सिर्फ इसलिए टैक्सेबल नहीं हो जाती, क्योंकि पैसा विदेश से आया है। आयकर कानून के तहत माता-पिता जैसे निर्धारित रिश्तेदारों को दिए गए गिफ्ट पर सामान्य तौर पर टैक्स छूट मिलती है। ऐसे रिश्तेदारों में माता-पिता, पति या पत्नी, बच्चे और कानून में बताए गए अन्य निर्धारित संबंध शामिल हैं। इन रिश्तेदारों को दिए गए गिफ्ट के लिए सामान्य ₹50,000 वाली सीमा लागू नहीं होती। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि बड़ी रकम के ट्रांसफर का कोई रिकॉर्ड रखने की जरूरत नहीं है। बैंक स्टेटमेंट, रेमिटेंस रिकॉर्ड, गिफ्ट लेटर या पैसे भेजने के उद्देश्य से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखना बेहतर है।

सबसे बड़ी गलती गलत या बिना Purpose Code के पैसे भेजना हो सकती है। विदेश से भारत आने वाली रकम के लिए बैंक को ट्रांसफर का उद्देश्य बताना होता है। यह रकम परिवार के खर्च, मेडिकल जरूरत, शिक्षा, निवेश, प्रॉपर्टी खरीद या अन्य वैध उद्देश्य के लिए हो सकती है। सही Purpose Code से बैंक और नियामक को यह समझने में मदद मिलती है कि पैसा भारत क्यों भेजा गया है। अगर जानकारी अधूरी या गलत हो, तो बैंक अतिरिक्त जांच कर सकता है या ट्रांजैक्शन में देरी हो सकती है। सीमा पार होने वाले लेनदेन पर FEMA, 1999 और RBI के नियम भी लागू होते हैं।

NRI भारत में पैसा रखने के लिए अलग-अलग बैंकिंग विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। NRE अकाउंट आम तौर पर विदेश में कमाई गई रकम रखने के लिए इस्तेमाल होता है और इसके फंड को निर्धारित नियमों के तहत वापस विदेश भेजा जा सकता है। NRO अकाउंट भारत में अर्जित आय जैसे किराया, पेंशन या निवेश से हुई आय को रखने के लिए उपयोग किया जाता है और इस पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है। वहीं, FCNR अकाउंट में NRI कुछ निर्धारित विदेशी मुद्राओं में फिक्स्ड डिपॉजिट रख सकते हैं, जिससे मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

NRI के लिए भारत में परिवार को पैसे भेजने पर कोई सामान्य ऊपरी सीमा नहीं है, बशर्ते रकम अधिकृत बैंकिंग चैनल से भेजी जाए और पैसे का स्रोत वैध हो। हालांकि, जिस देश में NRI रह रहा है, वहां विदेशी मुद्रा और रिपोर्टिंग से जुड़े अलग नियम हो सकते हैं। इसलिए वहां के नियमों को भी देखना जरूरी है। दूसरी ओर अगर भारत में रहने वाला कोई व्यक्ति विदेश में परिवार को पैसे भेजता है, तो उस पर LRS (Liberalised Remittance Scheme) के नियम लागू होते हैं।

LRS के तहत निवासी भारतीय एक वित्तीय वर्ष में निर्धारित सीमा तक विदेशी मुद्रा भेज सकता है। इसलिए, NRI माता-पिता को पैसा भेजते समय सबसे जरूरी बात यह है कि लेनदेन बैंकिंग चैनल से करें, सही उद्देश्य दर्ज करें और पैसे के स्रोत व रिश्ते से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें। इससे भविष्य में आयकर विभाग या बैंक की पूछताछ होने पर रकम की वैधता आसानी से साबित की जा सकती है।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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