रिटायरमेंट के लिए सरकार ने शुरू की नई स्कीम, करोड़ों लोगों को होगा फायदा
एनपीएस संचय योजना में 18 से 85 वर्ष तक का कोई भी भारतीय नागरिक पेंशन खाता खोल सकता है और निवेश शुरू कर सकता है। एनपीएस संचय में न्यूनतम और आगे के योगदान के नियम वही होंगे जो NPS की अन्य सामान्य योजनाओं में लागू हैं।

NPS Sanchay scheme: भारत के असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों को ध्यान में रखते हुए पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने एक नई योजना की शुरुआत की है। इस योजना का नाम NPS Sanchay (एनपीएस संचय) है। PFRDA ने इस संबंध में एक सर्कुलर भी जारी कर दिया है।
योजना को शुरू करने का क्या है मकसद?
इस योजना को खासतौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जिन्हें निवेश विकल्प और एसेट अलोकेशन समझने में दिक्कत होती है। यह योजना ऑल सिटीजन मॉडल और मल्टी स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत आती है। एनपीएस संचय का मुख्य मकसद निवेश प्रक्रिया को आसान बनाना है ताकि अंतिम स्तर पर सलाह की कमी के बावजूद लोग आसानी से रिटायरमेंट के लिए बचत कर सकें। बता दें कि देश के लगभग 90% वर्कफोर्स को रोजगार देने वाला असंगठित क्षेत्र अब तक औपचारिक पेंशन कवरेज से वंचित रहा है। ऐसे में यह योजना बड़ा असर छोड़ सकती है।
कौन कर सकता है निवेश?
एनपीएस संचय योजना में 18 से 85 वर्ष तक का कोई भी भारतीय नागरिक पेंशन खाता खोल सकता है और निवेश शुरू कर सकता है। एनपीएस संचय में शामिल होने के लिए निवेशकों को सब्सक्राइबर रजिस्ट्रेशन फॉर्म (SRF) के अनुसार KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी और जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।
योजना के निवेश पैटर्न की बात करें तो मौजूदा सरकारी पेंशन योजनाओं जैसे ही होगा। उदाहरण के लिए अटल पेंशन योजना (APY) में जिस तरीके से निवेश होता है वैसा ही पैटर्न होगा। एनपीएस संचय में न्यूनतम और आगे के योगदान के नियम वही होंगे जो NPS की अन्य सामान्य योजनाओं में लागू हैं। भविष्य में PFRDA इनमें बदलाव कर सकता है।
योजना के निकासी और आंशिक निकासी नियम
इस योजना में निकासी और आंशिक निकासी के नियम भी मौजूदा NPS के समान ही रहेंगे, जिनमें समय-समय पर बदलाव संभव है। एनपीएस संचय पर लगने वाले चार्ज भी उसी तरह के होंगे जैसे NPS वात्सल्य और NPS लाइट में लागू होते हैं।
NPS संचय में MSF योजनाओं की अनुमति: PFRDA के सर्कुलर के अनुसार पेंशन फंड को मल्टी स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत योजनाएं शुरू करने की अनुमति होगी,। जैसा कि अथॉरिटी समय-समय पर निर्धारित कर सकती है। यह इस शर्त के अधीन होगा कि ऐसी योजनाओं को नियंत्रित करने वाले सभी नियम और शर्तें मौजूदा फ्रेमवर्क के तहत लागू होने वाले नियमों और शर्तों के सभी मामलों में समान रहेंगी। हालांकि, निवेश पैटर्न इसमें शामिल नहीं होगा।
लेखक के बारे में
Deepak Kumarहिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।
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