
NPS, यूपीएस और अटल पेंशन स्कीम... नियमों में बदलाव, निवेशकों पर पड़ेगा असर?
पेंशन नियामक संस्था ने एक सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत निवेश नियमों में व्यापक बदलाव करते हुए इन योजनाओं को अब सोने और चांदी के ETFs, निफ्टी 250 इंडेक्स और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स में निवेश की अनुमति दे दी गई है।
अगर आप राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS), यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) या अटल पेंशन योजना से जुड़े हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, पेंशन नियामक संस्था PFRDA ने एक सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत निवेश नियमों में व्यापक बदलाव करते हुए इन योजनाओं को अब सोने और चांदी के ETFs, निफ्टी 250 इंडेक्स और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स में निवेश की अनुमति दे दी गई है। यह नई व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है।
क्या हुए हैं बदलाव?
नए नियमों के तहत पेंशन फंड अब अपने पोर्टफोलियो का 65% तक हिस्सा सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे। सरकारी सिक्योरिटीज की बात करें तो इसमें केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी बॉन्ड, PSUs के बॉन्ड और गिल्ट फंड्स भी होते हैं। इसके साथ ही कॉरपोरेट डेट में निवेश सीमा 45% तय की गई है जिसमें उच्च रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड, बैंक टर्म डिपॉजिट, REITs और InvITs के ऋण साधन, AAA रेटेड म्युनिसिपल बॉन्ड और मल्टीलेटरल एजेंसियों द्वारा जारी बॉन्ड शामिल हैं। शार्ट टर्म जरूरतों के लिए पेंशन फंड 10% तक हिस्सा शॉर्ट-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगा सकते हैं। वहीं इक्विटी में निवेश की अधिकतम सीमा 25% रखी गई है। इस वर्ग में केवल Nifty 250 और चुनिंदा BSE 250 कंपनियों के शेयर, इक्विटी ETFs तथा सीमित दायरे में म्यूचुअल फंड शामिल होंगे।
वैकल्पिक निवेश साधनों में निवेश पर बदलाव
सबसे अहम बदलाव वैकल्पिक निवेश साधनों में निवेश को लेकर है। अब पेंशन फंड REITs, InvITs, एआईएफ कैटेगरी I एवं II और गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में भी निवेश कर सकेंगे। हालांकि इस श्रेणी में कुल निवेश सीमा 5% और सोना-चांदी ईटीएफ व एआईएफ के लिए अलग-अलग 1% तय की गई है। जोखिम प्रबंधन पर भी कड़ा जोर दिया गया है। किसी एक उद्योग में कुल निवेश 15% से अधिक नहीं हो सकेगा। इसी तरह किसी स्पॉन्सर समूह की कंपनी में 5% और गैर-समूह कंपनी में 10% से अधिक निवेश सीमा नहीं होगी।





