UPI MDR पर NPCI का नया फैसला: बैंक से लेकर पेमेंट ऐप्स तक किसको कितना हिस्सा मिलेगा?
मुख्य बातें
- टेलीकॉम, रेलवे, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसी जरूरी सेवाओं में MDR हर ट्रांजैक्शन पर सिर्फ ₹5 तक सीमित रहेगा
- कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन के लिए MDR 0.02% रखा गया है
- इसका मकसद इन सेवाओं में ग्राहकों पर ज्यादा बोझ न डालना है

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI पर लगने वाले MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट के बंटवारे को लेकर एक सर्कुलर जारी किया है। इसके मुताबिक, 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.40% MDR लगेगा, लेकिन एक ट्रांजैक्शन पर ज्यादा से ज्यादा ₹300 ही कटेगा। यह नियम 15 अक्टूबर से लागू होगा। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से करीब चार प्रतिशत कारोबारी लेनदेन प्रभावित होगा, क्योंकि करीब 96% कारोबारी लेनदेन 2,000 रुपये से कम है या छोटे कारोबारियों के लिए लागू शून्य एमडीआर व्यवस्था के दायरे में आता है।
किन सेवाओं पर छूट?
टेलीकॉम, रेलवे, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसी जरूरी सेवाओं में MDR हर ट्रांजैक्शन पर सिर्फ ₹5 तक सीमित रहेगा। कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन के लिए MDR 0.02% रखा गया है। इसका मकसद इन सेवाओं में ग्राहकों पर ज्यादा बोझ न डालना है।
दुकानदार और UPI ऐप्स पर शर्त: NPCI ने साफ किया है कि दुकानदार MDR का चार्ज ग्राहकों से नहीं वसूल सकते। साथ ही, UPI ऐप्स भी UPI पेमेंट पर कोई अलग प्लेटफॉर्म फीस या अतिरिक्त चार्ज नहीं ले सकते।
MDR का पैसा कैसे बंटेगा?
NPCI के फैसले के मुताबिक, MDR से आने वाले पैसे में इश्यूअर बैंक यानी जिस बैंक में ग्राहक का खाता है, उसे 40% मिलेगा। मर्चेंट एक्वायरर यानी दुकानदार का पेमेंट प्रोसेस करने वाले बैंक या प्लेटफॉर्म को 30% हिस्सा मिलेगा। UPI ऐप्स जैसे फोनपे, गूगल पे, पेटीएम, भारत पे, अमेजन पे आदि को 20% मिलेगा। बाकी 10% हिस्सा UPI ऐप के बैंक पार्टनर को जाएगा।
एक उदाहरण से समझें: अगर कोई ग्राहक 10,000 रुपये का UPI पेमेंट करता है, तो 0.40% के हिसाब से 40 रुपये MDR कटेगा। इसमें इश्यूअर बैंक को 16 रुपये, मर्चेंट एक्वायरर को 12 रुपये, UPI ऐप को 8 रुपये और बाकी 4 रुपये UPI ऐप के बैंक पार्टनर को मिलेंगे।
यह बड़ा बदलाव क्यों है?
साल 2020 से UPI पर मर्चेंट फीस नहीं लगती थी, जबकि कार्ड पेमेंट पर MDR पहले से लगता आ रहा है। अब UPI पर भी बड़े ट्रांजैक्शन के लिए MDR लागू करने का मकसद डिजिटल पेमेंट को छोटे शहरों और गांवों तक बढ़ाना, साइबर सिक्योरिटी मजबूत करना और धोखाधड़ी रोकने में निवेश बढ़ाना है।
वर्तमान में व्यक्ति से व्यक्ति पेमेंट मूल्य के लिहाज से कुल यूपीआई लेनदेन का करीब 70 प्रतिशत है। अब दो हजार रुपये से अधिक की धनराशि व्यक्ति से कारोबारी को भेजने पर 0.4% की दर से शुल्क लगेगा। यह शुल्क पेमेंट व्यवस्था से जुड़े विभिन्न भागीदारों के बीच बांटा जाएगा, जिसमें बैंक और यूपीआई ऐप उपलब्ध कराने वाले संस्थान शामिल हैं।
आगे क्या असर होगा?
इस फैसले से बैंकों और UPI ऐप्स को कमाई का नया जरिया मिलेगा, लेकिन छोटे दुकानदारों और ग्राहकों पर सीधा असर न पड़े, इसके लिए शर्तें लगाई गई हैं। अगर MDR ठीक से लागू हुआ, तो UPI का पूरा इकोसिस्टम और मजबूत हो सकता है।


