ऐसी कमाई पर स्पेशल टैक्स छूट नहीं, रिबेट पाने वालों को देना होगा बकाया टैक्स, ब्याज पर मिलेगी माफी
मुख्य बातें
- Tax News: ओल्ड टैक्स रिजीम में 5 लाख और न्यू टैक्स रिजीम में 7 लाख रुपये तक की आय पर रिबेट मिलती है, जिससे टैक्स की देनदारी शून्य हो जाती है
- विभाग ने विशेष कर दर वाली आय पर रिबेट देने से मना कर दिया, भले ही नई व्यवस्था में कुल आय सात लाख रुपये से कम हो
- पेश है विशेष संवाददाता की स्पेशल रिपोर्ट…

आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि धारा 87ए के तहत विशेष टैक्स छूट (रिबेट) का लाभ छोटी अवधि के कैपिटल गेन पर नहीं मिलेगा। इसमें शेयरों और म्यूचुअल फंड यूनिट की बिक्री से हुई आय भी शामिल हैं। जिन करदाताओं ने इसका दावा किया है, उन्हें बकाया टैक्स भरने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक की मोहलत दी गई है। हालांकि, देय कर पर ब्याज माफ किया जाएगा।
विभाग ने हाल ही में इससे जुड़ा सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि कई करदाताओं ने वित्त वर्ष 2023-24 में इस ‘विशेष कर दर वाली आय’ पर धारा 87ए के तहत रिबेट का दावा किया था। कुछ मामले में ये दावे स्वीकार किए गए लेकिन बाद में विभाग ने पाया कि यह छूट नियमों के हिसाब से गलत थी और इसे रद्द कर दिया गया है। इससे उन लोगों पर अतिरिक्त टैक्स की देनदारी आ गई है। उन्हें नोटिस भेजकर अतिरिक्त टैक्स भरने को कहा गया है।
ब्याज माफ होगा
सर्कुलर में कहा गया है कि यदि संबंधित करदाता 31 दिसंबर 2025 तक अपना बकाया टैक्स जमा कर देते हैं, तो उन पर लगने वाला ब्याज माफ कर दिया जाएगा। यह राहत केवल उन्हीं मामलों में लागू होगी, जहां छूट गलत तरीके से दी गई थी और बाद में टैक्स का पुनर्मूल्यांकन किया गया है।
क्या है पूरा मामला
नियमों के अनुसार, ओल्ड टैक्स रिजीम में 5 लाख और न्यू टैक्स रिजीम में 7 लाख रुपये तक की आय पर धारा 87ए के तहत रिबेट मिलती है, जिससे टैक्स की देनदारी शून्य हो जाती है। जुलाई 2024 से विभाग ने ‘विशेष कर दर वाली आय’ पर रिबेट देने से मना कर दिया, भले ही नई व्यवस्था में कुल आय सात लाख रुपये से कम हो। ‘विशेष दर वाली आय’ में छोटी अवधि के पूंजीगत लाभ भी शामिल हैं। इसमें शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड की बिक्री से होने वाली आय शामिल है।
हाईकोर्ट पहुंचा था मामला
इस मुद्दे को लेकर कई करदातओं ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका डाली थी। दिसंबर 2024 में कोर्ट ने विभाग को आदेश दिया कि मामले पर दोबारा विचार किया जाए। इसके बाद 1 जनवरी से 15 जनवरी 2025 तक करदाताओं को रिटर्न सुधारने को मौका दिया गया। कई करदाताओं ने रिबेट मिलने की उम्मीद में अपडेट रिटर्न दाखिल किए,लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। फरवरी 2025 में कई लोगों को नोटिस मिला, जिसमें बकाया टैक्स का भुगतान करने को कहा गया।
बजट में हुआ प्रावधान
केंद्रीय बजट 2025 में साफ किया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 से शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (धारा 111ए के तहत) सहित सभी ‘विशेष दर वाली आय’ पर रिबेट नहीं मिलेगा। यह धारा लिस्टेड शेयरो और इक्विटी म्यूचुअल फंड की बिक्री से होने वाले छोटी अवधि के लाभ से संबंधित है। इस पर वित्त वर्ष 2023-24 में 15 फीसदी टैक्स लगता था और वित्त वर्ष 2024-25 से यह दर बढ़कर 20 फीसदी हो गई।
विशेष कर दर आय क्या है?
विशेष कर दर (special tax rate) आय आमदनी के ऐसे प्रकार हैं, जिन पर सामान्य इनकम टैक्स स्लैब से अलग, निश्चित दरों पर कर लगाया जाता है। इनमें आमतौर पर शेयरों पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन, क्रिप्टो, लॉटरी या गेम शो से जीत, और कुछ डिविडेंड आय जैसी चीजें शामिल होती हैं। धारा 87ए के तहत छूट ऐसी आय पर लागू नहीं होती, जिसका अर्थ है कि इन पर कर चुकाना होगा।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


