पेट्रोल-डीजल को लेकर किया जा रहा बड़ा खेल, एक्शन मोड में मोदी सरकार
मुख्य बातें
- पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने बुधवार को कहा कि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त से अधिक आपूर्ति है और इन ईंधनों की कोई किल्लत नहीं है
- इसके साथ ही सरकार ने सब्सिडी वाले खुदरा ईंधन को औद्योगिक उपयोग में लाए जाने पर चेतावनी भी दी

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद अब ईंधन कमी की खबरें आने लगी हैं। हालांकि, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने गुरुवार को देश में ईंधन की कमी की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि भारत में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी प्रकार का आपूर्ति संकट नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने ईंधन की कमी को लेकर किए जा रहे एक बड़े खेल का भी जिक्र किया है।
क्या कहा सरकार ने?
सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारत की रिफाइनिंग क्षमता अभी 22 चालू रिफाइनरियों में सालाना 258.1 मिलियन टन है जबकि वित्त वर्ष 26 में घरेलू पेट्रोलियम की खपत 243.2 मिलियन टन थी। भारत ने इस साल 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया, जिससे वह रिफाइंड ईंधन के दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक बन गया।
केंद्र सरकार ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी देश भर में पेट्रोल और डीजल की बिना किसी रुकावट के सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs), राज्य सरकारों और उद्योग निकायों के लगातार संपर्क में हैं। सरकार की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग स्तर पर बैठकें की जा रही हैं।
क्या हो रहा खेल?
सरकार के अनुसार कुछ क्षेत्रों में जो समस्या दिखाई दे रही है, वह वास्तविक कमी नहीं बल्कि आर्बिट्राज की स्थिति है। आर्बिट्राज का मतलब है कि एक ही चीज को वहां से खरीदना जहां वह सस्ती हो और वहां इस्तेमाल या बेचना जहां वह महंगी हो, ताकि फायदा कमाया जा सके। सरकार के मुताबिक कुछ औद्योगिक उपभोक्ता कम कीमत का लाभ उठाने के लिए औद्योगिक आपूर्ति चैनलों की बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों से डीजल खरीद रहे हैं। इससे कुछ स्थानों पर खुदरा आउटलेट्स पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है और स्थानीय स्तर पर कमी जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से निजी ईंधन विक्रेताओं की डीजल बिक्री में करीब 38 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के माध्यम से थोक खपत में लगभग 29 प्रतिशत कमी आई है।
इसके साथ ही सरकार ने राज्यों से ईंधन की जमाखोरी, कालाबाजारी, अवैध भंडारण और हेराफेरी पर रोक लगाने के लिए विशेष प्रवर्तन दल बनाने को कहा है। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
अब भी तेल कंपनियों को बड़ा नुकसान
सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने उसका पूरा बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है। ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 550 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। आपको बता दें कि मई के महीने में अब तक 4 बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं।
लेखक के बारे में
Deepak Kumarहिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।
और पढ़ें

