₹3 करोड़ कमाने वाले इंजीनियर के घर में सोफा तक नहीं, कार-टीवी से भी दूरी; जानें वजह
मुख्य बातें
- Meta के 24 वर्षीय इंजीनियर Raymond Zeng करीब 3 करोड़ रुपये सालाना कमाने के बावजूद बिना कार, टीवी और सोफा के बेहद साधारण जिंदगी जी रहे हैं
- आइए इसकी वजह बताते हैं

आज के दौर में बड़ी सैलरी का मतलब अक्सर लग्जरी लाइफस्टाइल माना जाता है। जैसे ही किसी की कमाई लाखों या करोड़ों में पहुंचती है, उसके साथ महंगी कार, बड़ा घर, ब्रैंडेड कपड़े, प्रीमियम गैजेट्स और आलीशान जिंदगी अपने-आप जुड़ जाती है। सोशल मीडिया के दौर में तो यह दिखावा और भी तेज हो गया है, जहां लोग अपने लाइफस्टाइल को सफलता की पहचान की तरह पेश करते हैं। इसी दुनिया में एक 24 वर्षीय इंजीनियर ऐसा भी है, जिसकी सालाना कमाई करीब 3 करोड़ रुपये है, फिर भी उसके घर में ना कार है, ना टीवी और ना ही घर में सोफा।
अमेरिका की टेक कंपनी Meta में काम करने वाले रेमंड जेंग (Raymond Zeng) की कहानी इन दिनों वायरल हो रही है, क्योंकि उन्होंने करोड़ों कमाने के बावजूद एक बेहद सिंपल जिंदगी चुनी है।रेमंड का कहना है कि वे ‘दिखने में अमीर’ नहीं, बल्कि असल में ‘financially free’ बनना चाहते हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपनी जिंदगी से कई ऐसे खर्च कम कर दिए हैं, जिन्हें आमतौर पर लोग सफलता का प्रतीक मानते हैं। वे कार खरीदने के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कंपनी शटल का इस्तेमाल करते हैं।
कम से कम खर्च वाली जिंदगी
रेमंड घर में जरूरत भर का सामान रखते हैं और ऐसी चीजों पर पैसा खर्च करने से बचते हैं, जिनसे लंबे समय तक कोई खास वैल्यू नहीं मिलती। सबसे ज्यादा लोगों को यह बात चौंका रही है कि करोड़ों कमाने वाले इस इंजीनियर के घर में सोफा तक नहीं है। आमतौर पर लोग पहली अच्छी नौकरी मिलते ही घर को लग्जरी फर्नीचर और गैजेट्स से भरना शुरू कर देते हैं, लेकिन रेमंड का मानना है कि कई बार इंसान जरूरत से ज्यादा चीजें सिर्फ इसलिए खरीदता है ताकि वह दूसरों को इंप्रेस कर सके।
हालांकि उनकी जिंदगी को सिर्फ कंजूसी कहना गलत होगा। वे खुद भी मानते हैं कि पैसा सिर्फ जमा करने के लिए नहीं होता। यही वजह है कि वे ट्रैवल करना पसंद करते हैं, हॉबीज पर खर्च करते हैं और गेमिंग कन्वेंशंस जैसी ऐक्टिविटीज में हिस्सा लेते हैं। यानी उन्होंने अपने खर्चों को पूरी तरह खत्म नहीं किया, बल्कि प्रायॉरिटीज बदल दीं। वे उन चीजों पर पैसा खर्च करते हैं, जिनसे उन्हें एक्सपीरियंस, खुशी या पर्सनल ग्रोथ मिलती है। उनके मुताबिक कई लोग ऐसी चीजों पर हजारों-लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, जिनका एक्साइटमेंट कुछ दिनों बाद खत्म हो जाता है, लेकिन उन अनुभवों पर खर्च नहीं करते, जो लंबे समय तक इंसान के साथ रहते हैं।
30 साल की उम्र में रिटायरमेंट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेमंड अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा इनवेस्टमेंट में लगाते हैं। वे रिटायरमेंट फंड्स, स्टॉक मार्केट और लॉन्ग-टर्म वेल्थ बिल्डिंग पर फोकस कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि 30 साल की उम्र तक इतना पैसा जमा हो जाए कि उन्हें नौकरी की मजबूरी ना रहे। इसी सोच को दुनिया में FIRE मूवमेंट यानी ‘Financial Independence, Retire Early’ के नाम से जाना जाता है। इस फिलॉसफी को मानने वाले लोग शुरुआत के कुछ सालों में जमकर सेविंग और निवेश करते हैं, ताकि बाद में उन्हें फाइनेंशियल स्ट्रेस के बिना जिंदगी जीने की आजादी मिल सके।
उनकी कहानी इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि यह आज की नई पीढ़ी की बदलती सोच को दिखाती है। पहले जहां लग्जरी को सफलता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता था, वहीं अब कई युवा फाइनेंशियल स्टेबिलिटी, फ्रीडम और मेंटल पीस को ज्यादा महत्व देने लगे हैं।
लेखक के बारे में
Pranesh Tiwariप्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से
टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के
क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के
लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।
विशेषज्ञता और कार्यशैली
प्राणेश की विशेषज्ञता गैजेट्स, टेक इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों में है। वे तकनीकी बारीकियों और
कठिन शब्दावली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि एक सामान्य पाठक भी तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को आसानी से समझ सके। लेटेस्ट
गैजेट्स का रिव्यू करना और नए मोबाइल ऐप्स के फीचर्स को आजमाना उनके काम का पसंदीदा हिस्सा है। उनकी लेखन शैली में स्पष्टता,
रिसर्च और कहानी कहने का संतुलन देखने को मिलता है।
अब तक का सफर और उपलब्धियां
प्राणेश ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की। इसके बाद उन्होंने न्यूजबाइट्स (NewsBytes) में
सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में काम किया, जहां उन्होंने तकनीकी रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारतीय जनसंचार
संस्थान (IIMC), नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और अपनी प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित PTI अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं।
लेखन और व्यक्तिगत रुचियां
पत्रकारिता के साथ-साथ प्राणेश एक संवेदनशील और रचनात्मक लेखक भी हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ‘सिर्फ दोस्त: नए जमाने की
प्रेम कहानियां’ नामक लघुकथा संग्रह लिखा, जिसमें रिश्तों की बारीकियों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
उन्हें स्मार्टफोन, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन से जुड़े विषयों पर गहराई से रिसर्च करना और पढ़ना पसंद है। काम के
अलावा, उन्हें यात्रा करना भी बेहद पसंद है। उनके लिए यात्राएं केवल सुकून का जरिया नहीं, बल्कि नए अनुभवों और कहानियों को
खोजने का तरीका हैं।
चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही
होता है।


