
न्यूजीलैंड को डेयरी समेत 30 क्षेत्रों में रियायत नहीं, किसानों और MSME का रखा गया ध्यान
समझौते के तहत जिन उत्पादों को 'शुल्क रियायत सूची' से बाहर रखा गया है, उनमें डेयरी प्रोडक्ट (दूध, क्रीम, दही, पनीर), पशु उत्पाद (भेड़ के मांस को छोड़कर), सब्जी उत्पाद (प्याज, चना, मटर, मक्का), चीनी, कृत्रिम शहद तथा पशु, वनस्पति या सूक्ष्मजीव आधारित वसा एवं तेल
भारत ने न्यूजीलैंड के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSME) के हितों को प्राथमिकता दी है। इस कारण कुछ कृषि उत्पादों, डेयरी उत्पादों, डेयरी से बनी चीजों (जैसे पनीर, दूध) और कॉफी, मसाले, दालें और कुछ सब्जियों को समझौते से बाहर रखा है। इन संवेदनशील क्षेत्रों में न्यूजीलैंड को कोई शुल्क रियायत नहीं दी जाएगी।
समझौते के तहत जिन उत्पादों को 'शुल्क रियायत सूची' से बाहर रखा गया है, उनमें डेयरी प्रोडक्ट (दूध, क्रीम, दही, पनीर), पशु उत्पाद (भेड़ के मांस को छोड़कर), सब्जी उत्पाद (प्याज, चना, मटर, मक्का), चीनी, कृत्रिम शहद तथा पशु, वनस्पति या सूक्ष्मजीव आधारित वसा एवं तेल शामिल हैं। इनके अलावा हथियार और गोला-बारूद, रत्न एवं आभूषण, तांबा और उससे बने उत्पाद और एल्युमिनियम एवं उससे संबंधित वस्तुओं पर भी भारत, न्यूजीलैंड को किसी तरह की शुल्क रियायत नहीं देगा।
डेयरी सेक्टर पर मांगी थी छूट
मामले से जुड़े अधिकारी के अनुसार, व्यापार वार्ता के दौरान न्यूजीलैंड ने डेयरी सेक्टर में रियायत देने की मांग की थी लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी। अधिकारी ने कहा कि यह क्षेत्र हमारे लिए पूरी तरह से एक लक्ष्मण रेखा है।
भारत ने अपने सभी पिछले समझौतों में बड़ी मात्रा में दुग्ध आयात के लिए दरवाजा खोलने का हमेशा विरोध किया है। दुग्ध क्षेत्र लंबे समय से वार्ता में सबसे संवेदनशील एवं राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।
न्यूजीलैंड दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध निर्यातकों में से एक है, जबकि भारत लाखों छोटे दुग्ध किसानों का घर है जिनके लिए बाजार संरक्षण एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। हालांकि, व्यवहार में वर्तमान व्यापार बहुत कम है।
इन कृषि उत्पादों पर छूट मिलेगी
कुछ कृषि उत्पादों में भारत ने सीमित बाजार पहुंच दी है, लेकिन इसे 'शुल्क दर कोटा' (टीआरक्यू) और न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) के साथ जोड़ा गया है। इनमें मनुका शहद, सेब, कीवी फल और दवाओं में इस्तेमाल होने वाला एल्ब्यूमिन शामिल हैं।
समझौते के अनुसार, न्यूजीलैंड से आने वाले सेब और कीवी जैसे फलों पर एक तय सीमा के तहत कम कर लगेगा, जिससे भारतीय ग्राहकों को अच्छी गुणवत्ता के फल मिल सके और घरेलू उत्पाद भी सुरक्षित रहें। इसी तरह न्यूजीलैंड के खास उत्पाद मनुका शहद पर 66 प्रतिशत शुल्क लगता है। इस पर भी रियायत दी जाएगी।
भारतीय छात्रों और पेशेवरों को राहत
यह समझौता भारतीय युवाओं के लिए विशेष अवसर प्रदान करने में मदद करेगा। न्यूजीलैंड में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए अब कोई संख्या तय नहीं होगी। इसका मतलब है कि समझौते के तहत कोटा सिस्टम खत्म हो जाएगा। इतना ही नहीं, भारतीय छात्र अब पढ़ाई के दौरान हर हफ्ते कम से कम 20 घंटे काम कर सकेंगे।
इससे पढ़ाई के साथ उन्हें न्यूजीलैंड में रोजगार और स्वयं की कमाई करने का भी अवसर मिल सकेगा स्नातक के बाद छात्रों को तीन-चार वर्ष तक न्यूजीलैंड काम करने का मौका मिलेगा। समझौते के तहत हर साल पांच हजार भारतीय पेशेवरों (जैसे आईटी इंजीनियर, डॉक्टर, नर्स और शेफ) के लिए तीन साल के वर्क वीजा का रास्ता भी साफ हो गया है।
आयुष और योग भी समझौते में शामिल
समझौते के तहत भारत ने अपनी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे आयुर्वेद और योग को खास जगह दी गई है। इससे भारत पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और उससे जुड़ी दवाओं को न्यूजीलैंड में उपलब्ध करा पाएंगे।
इससे भारतीय कंपनियों के लिए दवाओं की बिक्री के अवसर पैदा होंगे। साथ ही, आयुर्वेद और योग से जुड़े चिकित्सक वहां पर अपनी सेवा दे पाएंगे। इससे पहले भारत ने बीते हफ्ते ओमान के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते में भी आयुष और योग को शामिल किया था।





