काम की बात: LPG डिलीवरी का नया स्कैम, OTP Share कर दिया तो 2 मिनट में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट!

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मुख्य बातें

  • LPG Alert: HPCL, IndianOil, और BPCL ने सोशल मीडिया के जरिए साफ शब्दों में कह दिया है कि कोई भी गैस कंपनी का एजेंट आपसे कभी भी फोन पर OTP शेयर करने के लिए नहीं कहेगा
LPG डिलीवरी का नया स्कैम, OTP Share कर दिया तो 2 मिनट में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट!

आपने LPG सिलेंडर बुक किया है। कुछ देर बाद कॉल आती है, “मैं HP Gas का एग्जीक्यूटिव बोल रहा हूं। आपकी बुकिंग कन्फर्म करने के लिए OTP चाहिए।” थोड़ी सी लापरवाही और OTP शेयर करते ही आपके अकाउंट से पैसे उड़ सकते हैं। दरअसल, LPG डिलीवरी का पूरा सिस्टम अब OTP और डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) पर आधारित है। DAC एक 6-डिजिट का OTP होता है, जिसे बुकिंग के बाद सीधे ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल पर भेज दिया जाता है।

सिलेंडर तब तक डिलीवर नहीं होता, जब तक बॉय घर आकर यह कोड एंटर न कर दे। यह सिस्टम आम तौर पर कालाबाजारी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए तैयार किया गया था, लेकिन अब स्कैमर्स इसे अपना हथियार बना रहे हैं।

एलपीजी कस्टमर को ऐसे फंसा रहे स्कैमर्स

हाल ही में मिड-डे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई पुलिस के साइबर सेल ने एक नए स्कैम की चेतावनी दी है। कैसे LPG बुकिंग और डिलीवरी के लिए बने इस OTP सिस्टम का फायदा उठाकर स्कैमर्स लोगों को फंसा रहे हैं।

यहां तक कि हैदराबाद पुलिस ने एक और नए स्कैम की भी जानकारी दी है जिसमें लोगों को फर्जी LPG ऐप या APK फाइल इंस्टॉल करने के लिए कहा जा रहा है। पीड़ितों के अकाउंट से 4 लाख रुपये तक की निकासी होने की रिपोर्ट भी सामने आई है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में राजस्थान पुलिस का कहना है कि स्कैमर्स नकली LPG वेबसाइट बनाकर बैंकिंग डिटेल्स चुरा रहे हैं और OTP लेकर अकाउंट खाली कर रहे हैं।

स्कैमर्स कैसे करते हैं काम?

1. डर का फायदा : सबसे पहला तरीका है लोगों के मन में डर पैदा करना। जैसे, “आपका LPG कनेक्शन बंद हो जाएगा”, “KYC अपडेट नहीं है”, या “सब्सिडी का पैसा रोक दिया जाएगा” जैसे झूठे डर दिखाकर आपसे OTP, UPI पिन या बैंक डिटेल मांग लेते हैं।

2. लुभावने ऑफर: दूसरा तरीका है कुछ ऐसा लुभावना ऑफर देना जिसे कोई मना न कर पाए। उदाहरण के तौर पर, “आज रात तक सिलेंडर चाहिए?”, “एक्स्ट्रा सिलेंडर चाहिए?”, “जल्दी डिलीवरी के लिए कोड चाहिए” ये वो मामले हैं जहां स्कैमर्स आपात स्थिति का लाभ उठाते हैं।

2. नकली ऐप का जाल : तीसरा और सबसे खतरनाक तरीका है तकनीकी। स्कैमर्स फर्जी APK फाइल सीधे आपके व्हाट्सएप या SMS पर भेजते हैं। अगर आप इसे इंस्टॉल कर देते हैं, तो यह आपके फोन को पूरी तरह कंट्रोल में ले लेती है और OTP, बैंक अलर्ट सब चुरा लेती है। ये फाइलें इतनी एडवांस हैं कि ये UPI ट्रांजैक्शन को बिना आपके पूछे प्रोसेस कर सकती हैं।

HPCL, IndianOil, और BPCL ने सोशल मीडिया के जरिए साफ शब्दों में कह दिया है कि कोई भी गैस कंपनी का एजेंट आपसे कभी भी फोन पर OTP शेयर करने के लिए नहीं कहेगा। यह स्कैमर्स की हरकत है, जो “डिलीवरी कन्फर्मेशन” या “KYC अपडेट” के नाम पर आपसे OTP हड़पने की कोशिश करते हैं।

स्कैमर्स से कैसे बचें?

OTP सिर्फ सिलेंडर पर: जब तक डिलीवरी बॉय सिलेंडर लेकर आपके दरवाजे पर न खड़ा हो जाए, OTP बिल्कुल न बताएं। “बिना सिलेंडर के OTP नहीं।”

फोन पर OTP शेयर न करें: चाहे कॉल करने वाला कोई भी कहे, ना तो OTP, ना UPI PIN, ना बैंक डिटेल फोन पर बताएं। गैस कंपनी वाले कभी फोन पर OTP नहीं मांगते।

ऑफिशियल ऐप का इस्तेमाल करें: बुकिंग, KYC अपडेट या पेमेंट के लिए हमेशा ऑफिशियल वेबसाइट या मोबाइल ऐप (जैसे HP Pay, IndianOil ONE, Hello BPCL) ही यूज करें। सोशल मीडिया पर किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।

APK फाइल न इंस्टॉल करें: WhatsApp या SMS पर आई किसी भी अनजान APK या फाइल को कभी भी इंस्टॉल न करें। कंपनियां ऐसा कोई सॉफ्टवेयर नहीं भेजतीं।

वेबसाइट का URL चेक करें: अगर आप ब्राउजर से बुकिंग कर रहे हैं, तो URL को जरूर चेक करें। असली वेबसाइट “https” से शुरू होती है और आधिकारिक नाम होता है।

अगर आपके साथ फ्रॉड हो जाए तो क्या करें?

1. तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।

2. ऑनलाइन शिकायत cybercrime.gov.in पर दर्ज करें।

3. अपने बैंक को तुरंत सूचित करें और अपना अकाउंट फ्रीज करवाएं।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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