New Labour Code: 1 अप्रैल से बदलेंगे काम के नियम, करोड़ों कर्मचारियों की सैलरी से ओवर टाइम तक यह कैसे डालेगा असर

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मुख्य बातें

  • New Labour Code: 1 अप्रैल 2026 से देश में नए लेबर कोड लागू होने जा रहे हैं, जो कर्मचारियों की सैलरी, ओवरटाइम, काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नियमों को पूरी तरह बदल देंगे
New Labour Code: 1 अप्रैल से बदलेंगे काम के नियम, करोड़ों कर्मचारियों की सैलरी से ओवर टाइम तक यह कैसे डालेगा असर

New Labour Code: 1 अप्रैल 2026 से देश में नए श्रम कानून लागू होने जा रहे हैं, जो कर्मचारियों की सैलरी, ओवरटाइम, काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नियमों को पूरी तरह बदल देंगे। केंद्र सरकार ने चारों लेबर कोड के नियम लगभग तैयार कर लिए हैं। यह बदलाव करोड़ों कर्मचारियों और कंपनियों दोनों पर सीधा असर डालेंगे।

चार नए श्रम कोड क्या हैं और इनका उद्देश्य क्या है?

चार नए लेबर कोड, वेतन, सोशल सिक्योरिटी, इंडस्ट्रियल रिलेशन और ऑकुपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड को 44 लेबर कानूनों को एक सरल ढांचे में समेटने के लिए बनाया गया है। सरकार ने इन कोड्स को 21 नवंबर 2025 से नोटिफाई कर दिया था और ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक सलाह के लिए रखा गया था। जनवरी तक आए सुझावों के बाद मंत्रालय ने केंद्रीय स्तर पर इनके क्रियान्वयन के नियमों को अंतिम रूप दे दिया है।

काम के घंटों में क्या होगा बदलाव?

नए श्रम कानूनों के तहत, काम के मानक घंटे पहले की तरह 8 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे साप्ताहिक रहेंगे। हालांकि, इनमें काम करने के तरीकों को लेकर अधिक फ्लेक्सिबल बनाया गया है। नियोक्ता अब कर्मचारियों को फ्लेसिबल वर्किंग कल्चर दे सकेंगे। साप्ताहिक काम के घंटों के प्रबंधन के आधार पर अतिरिक्त ओवरटाइम विकल्प भी उपलब्ध होंगे।

ओवरटाइम की यह व्यवस्था इंटरनेशनल लेबर प्रैक्टिसेज के अनुरूप रखी गई है, जिससे कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को लचीलापन मिलेगा, लेकिन श्रमिकों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित रहेगी।

सामाजिक सुरक्षा के तहत अब 100 करोड़ श्रमिक होंगे कवर

नए श्रम कोड का एक प्रमुख उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना है। सरकार मार्च 2026 तक सामाजिक सुरक्षा लाभ को 100 करोड़ श्रमिकों तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है, जबकि वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 94 करोड़ है।

यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि 2015 में सामाजिक सुरक्षा कवरेज मात्र 19 प्रतिशत थी, जो 2025 तक बढ़कर 64 प्रतिशत से अधिक हो गई है। अब असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर, साथ ही स्वरोजगार करने वाले लोग भी शामिल होंगे।

महिलाओं और वरिष्ठ कर्मचारियों को मिलेंगे ये अधिकार

नए श्रम कोडों में पारदर्शिता और श्रमिक संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। अब सभी कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा, जिससे रोजगार की औपचारिक मान्यता सुनिश्चित होगी।

नए लेबर कोड में समान काम के लिए समान वेतन और महिलाओं के लिए समान अवसरों की व्यवस्था की गई है। महिलाएं अब उचित सुरक्षा प्रबंधों के साथ अलग-अलग शिफ्टों में भी काम कर सकेंगी। इसके अलावा, 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों को मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच का अधिकार दिया गया है।

अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी अतिरिक्त काम की व्यवस्था

नई व्यवस्था में ओवरटाइम को रेगुलराइज्ड किया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप श्रमिकों के लिए एक विकल्प के रूप में पेश किया जाएगा। इससे उद्योगों को काम के उतार-चढ़ाव को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी, साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि अतिरिक्त घंटों के काम के लिए श्रमिकों को उचित मुआवजा मिले। यह कदम नौकरी देने वालों और लेने वालों दोनों के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करता है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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