न्यू लेबर कोड: सप्ताह में 4 दिन काम और 3 दिन आराम का रास्ता साफ, जानें कौन से सेक्टर पर हो सकता है लागू

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मुख्य बातें

  • New Labour Code: किसी भी कर्मचारी के लिए साप्ताहिक काम के घंटे 48 घंटे से अधिक नहीं होंगे
  • यानी अब कंपनी और कर्मचारी चाहें तो इन 48 घंटों को केवल 4 दिनों में बांट सकते हैं यानी प्रतिदिन 12 घंटे काम करके
न्यू लेबर कोड: सप्ताह में 4 दिन काम और 3 दिन आराम का रास्ता साफ, जानें कौन से सेक्टर पर हो सकता है लागू

सरकार ने चारों लेबर कोड के तहत नियमों को नोटिफाई कर दिया है। इन नए नियमों से कुछ चुनिंदा सेक्टरों में सप्ताह में चार दिन काम और 3 दिन की छुट्टी लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। नए केंद्रीय कोड ऑन वेज के अनुसार, किसी भी कर्मचारी के लिए साप्ताहिक काम के घंटे 48 घंटे से अधिक नहीं होंगे। यानी अब कंपनी और कर्मचारी चाहें तो इन 48 घंटों को केवल 4 दिनों में बांट सकते हैं यानी प्रतिदिन 12 घंटे काम करके। बदले में उन्हें 3 दिन की छुट्टी यानी सप्ताह में तीन रेस्ट डे मिल सकती है।

हालांकि, यह सुविधा सभी के लिए समान नहीं है। दिहाड़ी मजदूरों के लिए एक सामान्य कार्य दिवस 8 घंटे का ही रहेगा, इससे अधिक काम पर ओवरटाइम मिलेगा। साथ ही, ओवरटाइम की दर अब सामान्य दर की दोगुनी कर दी गई है।

नए श्रम कानून कर्मचारियों को अधिक लचीलापन और बेहतर सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। हालांकि यह चार-दिवसीय कार्य सप्ताह अभी शुरुआती चरण में है और केवल चुनिंदा सेक्टरों में ही संभव है, फिर भी यह भारत में कामकाज के भविष्य का एक नया मॉडल पेश करता है।

किन क्षेत्रों में 4 डे वर्क वीक की संभावना?

बिजनेस स्टैंडर्ड की खबरे के अनुसार, जिन क्षेत्रों में शिफ्ट-बेस्ड या प्रोजेक्ट-ड्रिवन काम होता है, वहां इसे आसानी से लागू किया जा सकता है। जैसे, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, IT और शेयर्ड सर्विसेज।

हालांकि, जिन सेक्टरों में ग्राहकों की तत्काल जरूरतें और रियल-टाइम डिलीवरी की उम्मीद होती है, जैसे कुछ बैंकिंग, रिटेल या कस्टमर सपोर्ट, उनके लिए यह व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

अंतिम नियमों में बड़े बदलाव

गौरतलब है कि सरकार ने शुक्रवार (10 मई, 2026) को सभी चार लेबर कोड के अंतिम नियम जारी किए। इनमें शामिल हैं। इनमें इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020, कोड ऑन वेज 2019, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और ऑक्यूपेशन सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020 शामिल हैं।

संसद द्वारा ये कानून पारित किए लगभग 6 साल बाद, 30 से अधिक गजेट नोटिफिकेशन के जरिए इन नियमों को अंतिम रूप दिया गया। दिसंबर 2025 में जो ड्राफ्ट जारी किया गया था, उसमें न्यूनतम वेतन तय करने के लिए कैलोरी इनटेक, कपड़े, किराया, ईंधन खर्च आदि के मानदंड थे। लेकिन अंतिम नियमों में इन्हें हटा दिया गया है। अब सरकार बाद में अलग से आदेश जारी करेगी।

कर्मचारियों पर क्या क्या होगा असर?

कंपनी या संस्थान को अनिवार्य नियुक्ति पत्र हर कर्मचारी को देना होगा। ओवरटाइम भुगतान के स्पष्ट प्रावधान होगा। वर्कर रिस्किलिंग फंड में योगदान करना होगा। एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी देनी होगी। इस नए कोड में आश्रित माता-पिता के लिए मासिक आय सीमा ₹9,000 से बढ़ाकर ₹14,000 कर दी गई है।

कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियां

कंपनियों को अब ओवरटाइम भुगतान और रिस्किलिंग योगदान के कारण लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, उन्हें एचआर प्रथाओं को औपचारिक रूप देना होगा, काम के घंटे ट्रैक करने होंगे और अनिवार्य स्वास्थ्य लाभ देने होंगे।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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