ग्रेच्युटी के बदल गए नियम, नौकरीपेशा लोगों के लिए जानना जरूरी
नए नियम 21 नवंबर 2025 से लागू होंगे और इन्हें पूर्व प्रभाव से नहीं लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि फायदा सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो इस तारीख के बाद नौकरी छोड़ेंगे या रिटायर होंगे।

अगर आप नौकरीपेशा हैं तो ये खबर आपके काम की है। दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड्स के तहत कर्मचारियों की ग्रेच्युटी से जुड़ा बड़ा बदलाव सामने आया है। इन नियमों के लागू होने के बाद कर्मचारियों को रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर मिलने वाली ग्रेच्युटी राशि पहले के मुकाबले ज्यादा हो सकती है। बता दें कि नए नियम 21 नवंबर 2025 से लागू होंगे और इन्हें पूर्व प्रभाव से नहीं लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि फायदा सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो इस तारीख के बाद नौकरी छोड़ेंगे या रिटायर होंगे। सरकार की ओर से इस संबंध में स्पष्टीकरण दिया गया है।
फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए एक साल की अवधि
नए कोड के अनुसार, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों (FTEs) को एक साल की लगातार सेवा के बाद ग्रेच्युटी के लिए योग्य माना जाएगा। बता दें कि पहले इसके लिए 5 साल की सेवा जरूरी थी। इसके बाद ही ग्रेच्युटी के लिए योग्य माना जाता रहा है। हालांकि, यह नियम केवल उन कर्मचारियों पर लागू होता है जिन्होंने नए लेबर कोड लागू होने के दिन या उसके बाद किसी कंपनी में काम शुरू किया है।
कैसे होती है गणना?
ग्रेच्युटी की गणना कर्मचारी के अंतिम वेतन और उसकी सेवा के वर्षों के आधार पर की जाती है। चूंकि अब मूल वेतन का हिस्सा कुल वेतन में अधिक होगा, इसलिए नौकरी छोड़ने पर मिलने वाली एकमुश्त राशि में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। नए नियमों के तहत ग्रेच्युटी की गणना कंपनी छोड़ने के समय कर्मचारी के अंतिम वेतन के आधार पर की जाएगी। कंपनी छोड़ने का कारण रिटायरमेंट, इस्तीफा या मृत्यु कुछ भी हो सकता है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
Teamlease Regtech के CEO और सह-संस्थापक ऋषि अग्रवाल ने बताया कि यदि कोई कर्मचारी नए नियम लागू होने के बाद कंपनी छोड़ता है, तो उसकी ग्रेच्युटी की गणना उसके अंतिम वेतन के आधार पर ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि गणना के उद्देश्य से वेतन का उच्च आधार कर्मचारी की पूरी सेवा अवधि पर लागू होगा, जिससे उसे मिलने वाले अंतिम लाभों में काफी बढ़ोतरी होगी।
सैलरी और PF पर भी पड़ेगा असर
इन बदलावों का असर कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पर भी पड़ सकता है। बेसिक सैलरी बढ़ने से प्रोविडेंट फंड (PF) का योगदान भी बढ़ेगा, जिससे हर महीने मिलने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है। नियोक्ताओं को आपकी बेसिक सैलरी का 12% तक देना जरूरी है, और अगर वे पहले से ही ऐसा कर रहे हैं, तो आपके PF योगदान में शायद ही कोई बदलाव होगा। नए नियमों के तहत बोनस की गणना भी नए वेज स्ट्रक्चर के आधार पर होगी। ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट, CA चांदनी आनंदन ने बताया कि नए कोड के तहत, कानूनी बोनस की गणना भी फिर से तय की गई 'वेतन' पर की जाती है, जो सामान्य पात्रता अवधि और पैसों की सीमा के अधीन होती है।
लेखक के बारे में
Deepak Kumarहिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।
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