काम की बात: 6 दिन पहले ही आई है EPFO की नई स्कीम, करीब 7 करोड़ लोगों पर डालेगी असर

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मुख्य बातें

  • EPFO की नई स्कीम 26 जून 2026 से लागू हो गई है
  • यह 1952 की पुरानी स्कीम की जगह आई है
  • इसका क्या मकसद है? ईपीएफओ मेंबर्स पर यह कितना असर डालेगा, आइए जानें सबकुछ…
EPFO

कर्मचारी भविष्य निधि के 7 करोड़ से अधिक मेंबर्स के लिए नई स्कीम 26 जून 2026 से लागू हो गई है। यह 1952 की पुरानी स्कीम की जगह आई है। इसका मकसद नौकरी करते हुए भी जरूरत के समय पैसे निकालने को आसान बनाना, लेकिन बुढ़ापे की बचत को भी सुरक्षित रखना है।

75% ही निकाला जा सकता है पैसा

EPF खाते में से जितना पैसा आप निकाल सकते हैं, उसमें से कम से कम 25% खाते में रहना चाहिए। नियमों के मुताबिक बाकी 75% पैसा ही निकाला जा सकता है। मान लीजिए अगर आपके खाते में 1 लाख रुपए है, तो 25,000 रुपए (25%) जमा रहना होगा। बाकी 75,000 रुपए निकासी के लिए उपलब्ध होंगे।

विषयपुरान नियमनया नियम
लागू होने की तारीख1952 से लागू26 जून 2026
एम्प्लॉई का पीएम अंशदानबेसिक सैलरी+डीए का 12%कोई बदलाव नहीं
एम्प्लाॅयर का योगदान12%कोई बदलाव नहीं
VPFकर्मचारी अतिरिक्त योगदान कर सकता थानियोक्ता चाहे तो मैच करे, लेकिन कोई बाध्यता नही
UANयूनिवर्सल अकाउंट नंबर लागूवही UAN रहेगा चाहे नौकरी की क्यों न बदली हो
पुराने सदस्यों की सदस्यतापुराने सदस्य बने रहते थेनई स्कीम में अपने आप पुराने सदस्य जुड़ जाएंगे

किन-किन कारणों से आंशिक निकासी हो सकती है?

नई स्कीम के तहत आप नौकरी के दौरान भी निम्न कारणों से पैसे निकाल सकते हैं, जैसे…

निकासी का कारणपात्रताअधिकतम निकासीमुख्य शर्त
इलाज12 महीने पूरा होने परपात्र बैलेंस का 100%खुद या परिवार के इलाज के लिए
शिक्षा12 महीने पूरा होने परपात्र बैलेंस का 100%सदस्यता अवधि में अधिकतम 10 बार
मकान12 महीने पूरा होने परपात्र बैलेंस का 100%घर खरीदने, मरम्मत कराने, बनवाने
या होम लोन चुकाने के लिए
शादी12 महीने पूरा होने परपात्र बैलेंस का 100%सदस्यता अवधि में अधिकतम 5 बार
नौकरी छोड़ने पर12 महीने से पहलेपात्र बैलेंस का 100%एक वित्त वर्ष में अधिकतम दो बार

EPF निकासी के कौन सा फॉर्म इस्तेमाल करें

1. पूरा फंड निकालना (फॉर्म 19): तभी जब आप नौकरी छोड़ चुके हों और कम से कम 2 महीने (60 दिन) से बेरोजगार हों। इसमें आपकी और मालिक की प्लस ब्याज की पूरी राशि मिलती है।

2. पेंशन हिस्सा निकालना (फॉर्म 10C): अगर आपकी कुल नौकरी 10 साल से कम है, तो आप पेंशन (EPS) का एकमुश्त पैसा निकाल सकते हैं। 10 साल से ज्यादा होने पर आपको स्कीम सर्टिफिकेट मिलेगा और 58 साल की उम्र में मासिक पेंशन मिलेगी।

3. नौकरी के दौरान आंशिक निकासी (फॉर्म 31): ऊपर बताए गए कारणों (इलाज, शादी, मकान, आपदा) के लिए आप यह फॉर्म भर सकते हैं।

PF निकासी में कितना समय लगता है?

ऑनलाइन आवेदन (KYC पूरी हो) तो 3–7 कामकाजी दिन। ऑटो-मोड वाले दावे 72 घंटे में। ऑफलाइन (कागजी) दावे में 20 दिन तक लग सकते हैं।

पैसे बैंक खाते में आने में कितने दिन लगते हैं?

ऑनलाइन मंजूरी के बाद 7 से 15 वर्किंग डेज में पैसा खाते में आ जाता है। हर चरण (सबमिट, अप्रूव, डिस्बर्स) पर SMS आता है।

क्या PF निकासी पर टैक्स लगता है?

अगर आपने 5 साल से ज्यादा नौकरी की है, तो निकासी पूरी तरह टैक्स-फ्री है। 5 साल से पहले निकासी पर आपकी स्लैब रेट से टैक्स लगेगा। अगर निकासी 50,000 रुपए से ज्यादा है और PAN लिंक है तो 10% TDS कटेगा।

टैक्स बचाने के लिए फॉर्म 15G कैसे जमा करें?

ऑनलाइन आवेदन के दौरान सिस्टम फॉर्म 15G/15H अपलोड करने का विकल्प देता है। आप Income Tax की वेबसाइट से फॉर्म डाउनलोड करें, भरें, PDF बनाकर अपलोड करें।

PF क्लेम क्यों रिजेक्ट होता है?

  • KYC (आधार/बैंक) वेरिफाई नहीं होना
  • नाम या डेट ऑफ बर्थ में आधार और EPFO रिकॉर्ड का मेल न खाना
  • एम्प्लॉयर ने एग्जिट डेट अपडेट न करना
  • बैंक खाते की जानकारी गलत या बंद होना
  • 2 महीने की प्रतीक्षा अवधि पूरी न होना

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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