RBI के नए ECL नियम: आज PSU बैंकों के शेयरों में दिखेगी बड़ी हलचल

Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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PSU Bank Stocks: आज यानी मंगलवार को PSU बैंक इंडेक्स और अन्य सरकारी बैंकों के शेयरों में तेजी या मंदी देखने को मिल सकती है। क्योंकि, भारतीय रिजर्व बैंक  ने एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क से जुड़े अंतिम दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं।

RBI के नए ECL नियम: आज PSU बैंकों के शेयरों में दिखेगी बड़ी हलचल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार शाम को एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क से जुड़े अंतिम दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। इसका सीधा असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) पर पड़ेगा। ऐसे में आज यानी मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को PSU बैंक इंडेक्स और अन्य सरकारी बैंकों के शेयरों में तेजी या मंदी देखने को मिल सकती है। ये पुराने "इनकरड लॉस" (हुए नुकसान) के बजाय भविष्य की संभावित गिरावट के आधार पर प्रोविजनिंग (प्रावधान) करने पर जोर देते हैं।

RBI के नए ECL दिशानिर्देशों में क्या है खास?

RBI ने प्रोविजनिंग मॉडल को तीन चरणों में बांटा है...

स्टेज 1: मानक एसेट्स (जिनमें अभी डिफॉल्ट का खतरा कम है) पर 12 महीने के संभावित नुकसान का प्रावधान करना होगा।

स्टेज 2: जिन खातों में जोखिम काफी बढ़ गया है, उन पर लाइफटाइम के नुकसान का प्रावधान करना होगा।

स्टेज 3: ये वे खाते होंगे जो क्रेडिट-इम्पेयर्ड (डिफॉल्ट कर चुके) हैं। इन पर भी लाइफटाइम लॉस प्रोविजन होगा, और असुरक्षित (अनसिक्योर्ड) एक्सपोजर पर यह 100% तक जा सकता है।

NPA की परिभाषा और पहचान में बदलाव

NPA की परिभाषा वही रहेगी। 90 दिन तक बकाया रहने पर खाता नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित होगा। अगर किसी उधारकर्ता का एक भी लोन खाता NPA होता है, तो उस उधारकर्ता के सभी लोन (अन्य शाखाओं में भी) तुरंत NPA माने जाएंगे। NPA की पहचान महीने या तिमाही के अंत में नहीं, बल्कि उसी दिन करनी होगी जिस दिन खाता 90 दिन का हो जाए (डे-एंड प्रोसेसिंग के तहत)।

PSU बैंकों पर क्यों ज्यादा असर?

मैक्वेरी के मुताबिक स्टेज 2 का प्रोविजन भारी उछलेगा। करीब 40 बेसिस प्वाइंट से बढ़कर 500 बेसिस प्वाइंट तक पहुंच सकता है। सरकारी बैंकों की एक बार में नेट वर्थ (नेटवर्थ) पर 5% से 10% तक की गिरावट आ सकती है। क्रेडिट कॉस्ट में 20-25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा होने की संभावना।

सिटी का नजरिया

यह बदलाव होम लोन वाले बैंकों के लिए सकारात्मक है, लेकिन जिन बैंकों के पास 30-90 दिन बकाया (DPD) वाले खाते ज्यादा हैं – जैसे असुरक्षित लोन, माइक्रोफाइनेंस (MFI), व्हीकल फाइनेंस उनके लिए यह नुकसानदायक है। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSU) प्रमुख हैं।

प्राइवेट बैंकों पर कम असर: मैक्वेरी के अनुसार, प्राइवेट बैंक काफी हद तक सुरक्षित हैं। उनका CET-1 रेशियो 13% से अधिक है, जिससे यह झटका छोटा रहेगा।

पिछले महीने PSU बैंकों के शेयरों में तेज उछाल

बता दें कि मार्च के निचले स्तरों से PSU बैंक इंडेक्स ने अप्रैल में अब तक 12.5% का रिटर्न दिया है। दो कारोबारी सत्र अभी बाकी हैं। टॉप परफॉर्मर बैंकों के शेयरों में टॉप पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र है। मार्च के बाद से इसमें 30% उछाल दर्ज की गई। केनरा बैंक, SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में भी 11% से 13% की तेजी दर्ज की जा चुकी है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

RBI का यह नियम लंबी अवधि में बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करेगा, लेकिन PSU बैंकों को अल्पावधि में नेटवर्थ और क्रेडिट कॉस्ट के मोर्चे पर चुनौती होगी। मंगलवार को बाजार इसी दिशानिर्देश पर प्रतिक्रिया देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी बैंकों के शेयरों में अस्थिरता बढ़ सकती है, जबकि मजबूत हाउसिंग पोर्टफोलियो वाले प्राइवेट बैंक बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट ब्रोकरेज फर्मों मैक्वेरी और सिटी के विश्लेषण पर आधारित है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है।)

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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