₹2,000 करोड़ की गड़बड़ी के बाद इंडसइंड बैंक पर नया संकट! PMO और RBI तक पहुंची शिकायत
IndusInd Bank News: इंडसइंड बैंक पर नया संकट आ गया है। एक पूर्व अधिकारी पर ₹46 करोड़ गलत तरीके से कमाने का आरोप लगा है और इसकी कंप्लेन PMO और RBI तक पहुंची है।

IndusInd Bank News: प्राइवेट सेक्टर के प्रमुख बैंक इंडसइंड बैंक की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। बैंक में करीब ₹2,000 करोड़ की डेरिवेटिव्स अकाउंटिंग गड़बड़ी सामने आने के बाद अब एक व्हिसलब्लोअर ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और कई अन्य नियामक एजेंसियों से मामले की जांच की मांग की है।
मामले से जुड़े डॉक्यूमेंट्स के अनुसार शिकायत की प्रतियां गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO), राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) और अन्य एजेंसियों को भी भेजी गई हैं। इस खबर के बाद शुरुआती कारोबार में ही इंडसइंड बैंक के शेयर आज करीब 2.50 प्रतिशत से अधिक नीचे 888.80 रुपये पर आ गए।
अंदरूनी कारोबार और गवर्नेंस में खामियों के आरोप
इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक शिकायत में बैंक के पूर्व पूर्वी भारत जोनल हेड समीर अग्रवाल पर इनसाइडर ट्रेडिंग यानी गोपनीय जानकारी के आधार पर शेयर ट्रेडिंग का आरोप लगाया गया है। व्हिसलब्लोअर का दावा है कि समीर अग्रवाल ने बैंक की गोपनीय जानकारियों का इस्तेमाल करते हुए अपने परिवार और संबंधित संस्थाओं के जरिए शेयरों में कारोबार कराया। आरोप है कि सार्वजनिक रूप से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने से पहले करीब ₹815 करोड़ के शेयर डील के जरिए लगभग ₹46 करोड़ का लाभ कमाया गया।
माइक्रोफाइनेंस लोन और ऑडिट रिपोर्ट को लेकर भी सवाल
शिकायत में केवल इनसाइडर ट्रेडिंग ही नहीं, बल्कि कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इनमें वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर, माइक्रोफाइनेंस लोन की एवरग्रीनिंग, ऑडिट निष्कर्षों को दबाने और कथित अनियमितताओं को छिपाने के प्रयास शामिल हैं। व्हिसलब्लोअर का आरोप है कि बैंक के कुछ सीनियर अफसरों और बोर्ड के सदस्यों ने इन मुद्दों को दबाने की कोशिश की।
इंडसइंड बैंक ने आरोपों को किया खारिज
बता दें इकनॉमिक टाइम्स द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में इंडसइंड बैंक ने इन आरोपों को खारिज किया है। बैंक ने कहा कि वह व्हिसलब्लोअर द्वारा लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं करता। बैंक के अनुसार सभी शिकायतों की आंतरिक रूप से जांच की गई है और आवश्यक कार्रवाई नियामकीय नियमों तथा बैंक की नीतियों के अनुसार की गई है। बैंक ने यह भी कहा कि कुछ मामलों की जानकारी उसने स्वयं संबंधित अधिकारियों को दी थी। चूंकि मामला अभी समीक्षा के दायरे में है, इसलिए बैंक इस पर और टिप्पणी नहीं करेगा।
बढ़ सकती है नियामकों की निगरानी
विशेषज्ञों का मानना है कि ₹2,000 करोड़ की अकाउंटिंग गड़बड़ी के बाद सामने आई इस नई शिकायत से इंडसइंड बैंक पर नियामकीय निगरानी और बढ़ सकती है। अगर जांच एजेंसियां आरोपों में प्रथम दृष्टया सच्चाई पाती हैं, तो बैंक और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत जांच शुरू हो सकती है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


