काम की बात: ऑटो पेमेंट के नए नियम: जानें किस पर कितना पड़ेगा असर

Drigraj Madheshia हिन्दुस्तान टीम
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नए नियम उन सभी ऑटो पेमेंट जैसे ओटीटी सब्सक्रिप्शन, बीमा प्रीमियम, बिल पेमेंट, ईएमआई आदि पर लागू होगा, जो कार्ड, यूपीआई या प्रीपेड माध्यमों से किए जाते हैं। RBI ने ई-मैंडेट से जुड़े नए नियम लागू कर दिए हैं।

ऑटो पेमेंट के नए नियम: जानें किस पर कितना पड़ेगा असर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ई-मैंडेट से जुड़े नए दिशा-निर्देश मंगलवार से लागू कर दिए। नए नियमों के तहत अब किसी भी तरह का ऑनलाइन ऑटो पेमेंट शुरू करने से पहले ग्राहक को एक बार रजिस्ट्रेशन करना होगा और इसके लिए अतिरिक्त वेरिफिकेश करना होगा। साथ ही ग्राहक के खाते से रकम काटने से पहले संबंधित बैंक या संबंधित वित्तीय संस्थानों को 24 घंटे पहले इसकी सूचना देनी होनी।

नए नियम उन सभी ऑटो पेमेंट जैसे ओटीटी सब्सक्रिप्शन, बीमा प्रीमियम, बिल पेमेंट, ईएमआई आदि पर लागू होगा, जो कार्ड, यूपीआई या प्रीपेड माध्यमों से किए जाते हैं। आरबीआई ने यह भी साफ किया है कि ग्राहक को यह सुविधा दी जाएगी कि वह कभी भी अपने ई-मैंडेट को बदल सके या पूरी तरह बंद कर सके।

इससे अब ग्राहकों को अपने खाते से कटने वाले पैसों पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। इसका असर सीधे उन करोड़ों लोगों पर पड़ेगा, जिनके बैंक खाते से हर महीने कोई न कोई रकम अपने आप कटती है।

पूरा ब्योरा देना होगा : सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब हर ऑटो पेमेंट से पहले ग्राहक को कम से कम 24 घंटे पहले सूचना भेजना अनिवार्य होगा। इस सूचना में संबंधित कंपनी का नाम, पेमेंट की राशि, तारीख और अन्य जरूरी विवरण शामिल होंगे। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की स्थिति में ग्राहक तुरंत कार्रवाई कर सकेगा।

अगर ग्राहक चाहे तो इस अवधि के दौरान उस पेमेंट को रोक भी सकता है। हालांकि, फास्टैग और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड के ऑटो रिचार्ज के मामलों में यह पूर्व सूचना जरूरी नहीं होगी।

नए कॉर्ड से खुद जुड़ जाएगा ऑटो-पेमेंट

नए नियमों के अनुसार, अब अगर किसी ग्राहक का क्रेडिट या डेबिट कार्ड बदल जाता है या नया कार्ड जारी होता है, तो पहले से तय किए गए ऑटो पेमेंट (ई-मैंडेट) अपने आप नए कार्ड से जुड़ सकेंगे। इससे ग्राहकों को बार-बार सेटिंग बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे बीमा प्रीमियम, ईएमआई या अन्य नियमित पेमेंट बिना रुकावट जारी रहेंगे।

यूपीआई ऐप में ऐसे देख सकते हैं ऑटो-पे मैंडेट

अपना यूपीआई ऐप खोलें। ऊपर दिए गए प्रोफाइल या सेटिंग्स पर जाएं

वहां ऑटो-पे, मैंडेट का विकल्प चुनें। अब आपको सभी सक्रिय और समाप्त अनुमतियां दिखाई देंगी

यहां आप देख सकते हैं कि किस कंपनी या सेवा को पैसा जा रहा है, कितनी राशि कट रही है, कितने समय तक कटेगी और अगली कटौती कब होगी।

15000 रुपये तक के पेमेंट पर ओटीपी नहीं

पेमेंट अमाउंट से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। नए प्रावधान के तहत अब ₹15,000 तक के नियमित ऑटो डेबिट पेमेंट बिना हर बार ओटीपी डाले पूरे हो सकेंगे। लेकिन इससे ज्यादा राशि पर हर बार ओटीपी की जरूरत होगी। हालांकि, बीमा प्रीमियम, म्यूचुअल फंड निवेश और क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट के लिए यह सीमा बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति लेनदेन कर दी गई है।

ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं

आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-मैंडेट सुविधा के उपयोग पर ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही, किसी भी विवाद या गलत लेनदेन की स्थिति में शिकायत दर्ज करने और समाधान के लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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