एक कंपनी के लिए अडानी और वेदांता समूह आमने-सामने, अब NCLAT ने लिया यह फैसला
एनसीएलएटी ने अडानी एंटरप्राइजेज की ओर से दिवालिया कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के लिए पेश की गई ₹14,543 करोड़ की समाधान योजना के कार्यान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कंपनी के डीलिस्टिंग पर रोक की मांग भी खारिज कर दी।

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने वेदांता ग्रुप को बड़ा झटका दिया है। एनसीएलएटी ने अडानी एंटरप्राइजेज की ओर से दिवालिया कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के लिए पेश की गई ₹14,543 करोड़ की समाधान योजना के कार्यान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही न्यायाधिकरण ने कंपनी के डीलिस्टिंग पर रोक लगाने की मांग भी खारिज कर दी। बता दें कि वेदांता लिमिटेड ने याचिका दायर कर अडानी समूह की समाधान योजना को चुनौती दी थी।
क्या कहा अदालत ने?
न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने वेदांता की अंतरिम राहत की मांग ठुकराते हुए कहा कि समाधान योजना का कार्यान्वयन जारी रहेगा, हालांकि यह अंतिम फैसले के अधीन होगा। इसके साथ ही, एनसीएलएटी ने लेनदारों की समिति (सीओसी) से एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। अब मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को निर्धारित की गई है। अब इस मामले पर वेदांता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। मिंट के सवाल के जवाब में वेदांता के प्रवक्ता ने कहा- मामला विचाराधीन है, इसलिए हम इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते। वहीं, अडानी समूह की ओर से भी कोई जवाब नहीं आया है।
क्या है मामला?
दरअसल, अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की इलाहाबाद पीठ के 17 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अडानी एंटरप्राइजेज की योजना को मंजूरी दी गई थी और खनन कंपनी की आपत्तियों को खारिज कर दिया गया था। इससे पहले वेदांता ने इस मंजूरी को व्यावसायिक साजिश करार दिया था और अपनी बोली पर पुनर्विचार की मांग की थी। इसके बावजूद लेंडर्स ने अडानी की योजना को मंजूरी दे दी।
वेदांता का दावा है कि उसकी पेशकश कुल मूल्य में लगभग ₹3,400 करोड़ अधिक और एनपीवी के आधार पर ₹500 करोड़ बेहतर थी। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि उसे अपनी बोली स्पष्ट करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। उसने 8 नवंबर 2025 को एक संशोधित प्रस्ताव भी पेश किया था, जिसमें अग्रिम नकद राशि बढ़ाकर करीब ₹6,563 करोड़ और इक्विटी निवेश ₹800 करोड़ करने की बात कही गई थी।
क्यों वेदांता को नहीं मिली मंजूरी?
हालांकि, ऋणदाताओं की समिति ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि समाधान योजनाओं का मूल्यांकन केवल बोली की राशि पर नहीं बल्कि क्षमता और भुगतान की समयसीमा जैसे फैक्टर पर आधारित होता है। अडानी समूह की योजना को इसलिए प्राथमिकता दी गई क्योंकि इसमें लगभग ₹6,000 करोड़ की अग्रिम राशि और दो वर्षों के भीतर भुगतान का प्रस्ताव था, जबकि वेदांता की समयसीमा पांच वर्ष तक थी।
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