
टाटा ट्रस्ट में चल रहे ‘झगड़े’ के बीच एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को मिली मंजूरी!
टाटा ग्रुप (Tata Group) के नियमों को दरकिनार करते हुए एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) को टाटा ट्रस्ट ने तीसरे कार्यकाल देने की मंजूरी दे दी है। 65 साल की उम्र बीत जाने के बाद भी चेयरमैन टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगें। इकनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
टाटा ग्रुप (Tata Group) के नियमों को दरकिनार करते हुए एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) को टाटा ट्रस्ट ने तीसरे कार्यकाल देने की मंजूरी दे दी है। 65 साल की उम्र बीत जाने के बाद भी चेयरमैन टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगें। इकनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। बता दें, टाटा ग्रुप इस समय ईवी, डिफेंस, एयर इंडिया के बिजनेस को तेजी के साथ आगे बढ़ाने की कोशिशों में जुटा है, जिसको देखते हुए एन चंद्रशेखरन को फिर से जिम्मेदारी मिली है।
चंद्रशेखरन अपने दूसरे कार्यकाल की समाप्ति के वक्त 65 वर्ष के हो जाएंगे। टाटा ग्रुप के नियमों के अनुसार एग्जीक्यूटिव को 65 वर्ष की उम्र में रिटायर होना होता है। वहीं, नॉन एग्जीक्यूटिव अपने पद पर 70 साल की उम्र तक बन रह सकते हैं। एन चंद्रशेखर के तीसरे कार्यकाल से जुड़ी जानकारी ऐसे समय में है जब टाटा ट्रस्ट में गहरी दरार पड़ती नजर आ रही है।
11 सितंबर को हो गया था फैसला
इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले व्यक्ति के अनुसार सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए बैटरी, एयर इंडिया जैसे बिजनेस के लिए यह विस्तार जरूरी था। टाटा ट्रस्ट के प्रस्ताव को टाटा संस के पास भेज दिया है। जहां उनके कार्यकाल पर अंतिम मुहर लगेगी। बता दें, टाटा संस में टाटा ट्रस्ट की भागीदारी 66 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के अनुसार नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने 11 सितंबर को टाटा ट्रस्ट की मीटिंग में एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल का प्रस्ताव रखा था। जिसका सभी लोगों ने एक स्वर में समर्थन किया था। बता दें, एन चंद्रेशखरन को फरवरी 2022 में दूसरी बार सेवा विस्तार मिला था। उन्हें टाटा संस में पहली बार अक्टूबर 2016 में जगह मिली थी। वहीं, 2017 में उन्हें चेयरमैन बना दिया गया था।
क्या कहते हैं नियम?
नियमों के अनुसार नए कार्यकाल की मंजूरी पुराने के समाप्त होने से एक साल पहले मिलनी चाहिए। यह पहली बार होगा जब ग्रुप के एग्जीक्यूटिव पद पर कोई व्यक्ति 65 साल की उम्र के बाद भी बना सक्रिय तौर पर बना रहेगा।
टाटा ट्रस्ट में झगड़ा?
इस समय टाटा ट्रस्ट में विवाद की खबरें सामने आ रही है। जहां एक तरफ टाटा ट्रस्ट के कई ट्रस्टी प्राइवेट रहना चाहते हैं। तो वहीं, कई ट्रस्टी आईपीओ लाने चाहते हैं। ऐसे समय में एन चंद्रशेखरन को सेवा विस्तार मिलना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।
टाटा ग्रुप तेज रफ्तार से आगे बढ़ा
एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप का रेवन्यू दोगुना और प्रॉफिट तिगुना बढ़ गया। वित्त वर्ष 2025 में टाटा ग्रुप की लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों का रेवन्यू 15.34 लाख करोड़ रुपये रहा है। इस दौरान नेट प्रॉफिट 1.13 लाख करोड़ रुपये है।
पिछले एक साल में टाटा ग्रुप मार्केट कैप 6.9 लाख करोड़ रुपये घटकर 26.50 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह टीसीएस है। पिछले एक साल में टीसीएस के शेयरों की कीमतों में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है।





