
मुकेश अंबानी की कंपनी के इस सस्ते शेयर को खरीदने की लूट, 10% चढ़ा भाव, डील का असर
कंपनी की स्टेप-डाउन, पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई आलोक इंडस्ट्रीज इंटरनेशनल लिमिटेड ने मिलेटा ए.एस. में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। कंपनी ने बताया कि 16 दिसंबर 2025 को इस संबंध में क्रेस्कॉन, ए.एस. के साथ एक शेयर खरीद समझौता किया गया है।
Alok Industries Ltd share: मुकेश अंबानी की कंपनी आलोक इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर लगातर फोकस में हैं। कंपनी के शेयर में आज मंगलवार को कारोबार के दौरान 10% तक की तेजी देखी गई। इसी के साथ यह शेयर 17.69 रुपये के इंट्रा डे हाई पर पहुंच गया। शेयरों में इस तेजी के पीछे हाल में हुई एक डील की खबर है। दरअसल, बीएसई पर दी गई जानकारी के मुताबिक, आलोक इंडस्ट्रीज से जुड़ी एक अहम कारोबारी अपडेट सामने आई है। कंपनी की स्टेप-डाउन, पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई आलोक इंडस्ट्रीज इंटरनेशनल लिमिटेड ने मिलेटा ए.एस. में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। कंपनी ने बताया कि 16 दिसंबर 2025 को इस संबंध में क्रेस्कॉन, ए.एस. के साथ एक शेयर खरीद समझौता किया गया है।
क्या है डिटेल
इस डील के तहत आलोक इंडस्ट्रीज इंटरनेशनल लिमिटेड, मिलेटा ए.एस. में मौजूद अपनी 100% इक्विटी हिस्सेदारी को बेच रही है। यह सौदा कुल 5,58,825 यूरो की नकद राशि में किया गया है। कंपनी के अनुसार, यह कदम उसके वैश्विक कारोबार के पुनर्गठन और नॉन-कोर एसेट्स से बाहर निकलने की रणनीति का हिस्सा है। डील पूरी होने के बाद मिलेटा ए.एस. अब आलोक इंडस्ट्रीज ग्रुप की सहायक कंपनी नहीं रहेगी। इस लेनदेन से कंपनी के सब्सिडियरी स्ट्रक्चर में बदलाव होगा और इंटरनेशनल ऑपरेशंस से जुड़ी जिम्मेदारियों में कमी आएगी।
सितंबर तिमाही के नतीजे
बता दें कि सितंबर तिमाही में कंपनी की नेट सेल्स सितंबर 2025 में बढ़कर ₹941.09 करोड़ रही, जो सितंबर 2024 में ₹885.66 करोड़ थी। इस तरह सालाना आधार पर कंपनी की आय में 6.26% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कमजोर मांग और लागत दबाव के बावजूद कंपनी की टॉपलाइन में सुधार देखने को मिला है। हालांकि, मुनाफे के मोर्चे पर कंपनी को अब भी नुकसान का सामना करना पड़ा। सितंबर 2025 तिमाही में कंपनी का नेट लॉस ₹162.38 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹262.10 करोड़ था। इस तरह नेट लॉस में सालाना आधार पर 38.05% का इजाफा देखा गया। इससे साफ है कि खर्च और अन्य चुनौतियां अभी भी कंपनी की कमाई पर असर डाल रही हैं।





