मोदी सरकार देगी सस्ते किराये के घर, शहर में रहने वालों के लिए जबरदस्त स्कीम
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 स्कीम के तहत अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग (ARH) व्यवस्था राहत देने वाली है
- इसमें शहरों में साफ-सुथरे और किफायती किराये के मकान उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है

शहर में घर खरीदना आसान नहीं है। घर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की वजह से अब यह आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है। यही वजह है कि ज्यादातर नौकरीपेशा लोग किराये के घर में रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, शहर में किफायती किराये के मकान का मिलना इतना आसान नहीं है। खासकर दूसरे शहरों से नौकरी या काम की तलाश में आने वाले कम आय वाले परिवारों के सामने रहने के लिए किफायती घर ढूंढना बड़ी चुनौती होती है। ऐसे लोगों के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की एक खास स्कीम है। इस स्कीम के तहत सस्ते किराये के मकान में रह सकते हैं।
दरअसल, यह सुविधा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 स्कीम के तहत मिलती है। इस स्कीम के तहत अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग (ARH) व्यवस्था राहत देने वाली है। इसके तहत शहरों में साफ-सुथरे और किफायती किराये के मकान उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। आइए डिटेल में अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग के बारे में जान लेते हैं।
किसके लिए है योजना?
यह उन शहरी निवासियों के लिए किफायती और साफ-सुथरी रहने की जगह सुनिश्चित करता है जो अपना घर नहीं खरीदना चाहते लेकिन उन्हें कुछ समय के लिए घर की जरूरत है। यह उनके लिए भी है जिनके पास घर बनाने या खरीदने की आर्थिक क्षमता नहीं है। इसमें EWS और LIG वर्ग के लोग, शहरी प्रवासी, बेघर और जरूरतमंद लोग, औद्योगिक मजदूर, कामकाजी महिलाएं, निर्माण श्रमिक, स्ट्रीट वेंडर, रिक्शा चालक और अन्य छोटे सर्विस प्रोवाइडर शामिल हो सकते हैं। वहीं, संविदा कर्मचारियों के लिए भी किराये के घर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को इन आवासीय परिसरों में जरूरी इंफ्रा उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देना होगा। इनमें पानी, सीवर या सेप्टेज व्यवस्था, साफ-सफाई, आंतरिक सड़क, सामुदायिक केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और क्रेच जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा परिसर के आसपास जरूरत के मुताबिक छोटी दुकानें और अन्य व्यावसायिक सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं ताकि यहां रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूर न जाना पड़े।
आपको बता दें कि अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग को 2 मॉडल के जरिए लागू किया जाएगा। पहले मॉडल में सरकार द्वारा पहले से बनाए गए लेकिन खाली पड़े मकानों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) या सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से किराये के मकानों में बदला जाएगा। इससे पहले से मौजूद खाली सरकारी मकानों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। दूसरे मॉडल में निजी या सरकारी संस्थाएं जरूरतमंद लोगों के लिए नए किराये के मकान बनाएंगी और उनका संचालन, रखरखाव भी करेंगी।


