
ग्रेच्युटी के बदल गए नियम, अब क्या है एलिजिबिलिटी, सरकार ने दी यह जानकारी
सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया कि नई श्रम संहिताएं श्रम नियमों के आधुनिकीकरण, श्रमिक कल्याण और श्रम इकोसिस्टम को विकसित होती कार्य-प्रणाली के अनुरूप ढालने का काम करेंगी। यह सुधार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को गति देने के साथ-साथ उद्योगों को अधिक लचीला और प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।
Gratuity Eligibility: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को देश के श्रम ढांचे में ऐतिहासिक सुधार करते हुए 29 पुराने श्रम कानूनों को समेकित कर चार नई श्रम संहिताओं को लागू करने की घोषणा की। इन नए श्रम कोड्स का उद्देश्य दशकों पुराने नियमों को आधुनिक बनाना, उद्योगों को अधिक लचीलापन देना और कामगारों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है। सरकार का कहना है कि यह कदम बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप देश में एक भविष्य-तैयार और मज़बूत कार्यबल तैयार करेगा। सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया कि नई श्रम संहिताएं श्रम नियमों के आधुनिकीकरण, श्रमिक कल्याण और श्रम इकोसिस्टम को विकसित होती कार्य-प्रणाली के अनुरूप ढालने का काम करेंगी। यह सुधार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को गति देने के साथ-साथ उद्योगों को अधिक लचीला और प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।

क्या है ग्रेच्युटी
ग्रेच्युटी वह एकमुश्त राशि है जो नियोक्ता अपने कर्मचारी को उसकी लंबी और निरंतर सेवा के प्रति सम्मानस्वरूप देता है। पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम पांच साल की लगातार सेवा अनिवार्य थी और यह लाभ केवल सेवानिवृत्ति, इस्तीफे या सेवा समाप्ति पर मिलता था। यह व्यवस्था दशकों से लागू थी, लेकिन नए श्रम कोड्स ने इसमें महत्वपूर्ण बदलाव पेश किए हैं। नए श्रम कोड्स के तहत सबसे बड़ा परिवर्तन फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों (FTEs) के लिए किया गया है। पहले जहां उन्हें ग्रेच्युटी के लिए पाँच साल की सेवा अनिवार्य होती थी, वहीं अब नए नियमों के अनुसार वे केवल एक वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी ग्रेच्युटी के पात्र होंगे। इससे फिक्स्ड-टर्म और स्थायी कर्मचारियों के बीच समानता स्थापित होगी।
क्या है सरकार का उद्देश्य
सरकार का उद्देश्य है कि फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों की तरह ही वेतन संरचना, अवकाश सुविधाएं, मेडिकल लाभ और सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिले। इसके साथ ही कुल पारिश्रमिक का 50 प्रतिशत वेतन की गणना में शामिल किया जाएगा ताकि ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों की गणना सटीक रूप से हो सके। नए नियम निर्यात क्षेत्र में कार्यरत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए भी राहत लाते हैं। उन्हें अब ग्रेच्युटी, भविष्य निधि (PF) और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकेंगे, जिससे इस क्षेत्र में काम कर रहे श्रमिकों का आर्थिक सुरक्षा कवच मजबूत होगा।
8 से 12 घंटे तक की शिफ्ट होगी लागू
श्रम कोड्स के तहत कार्य समय में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब कंपनियां 8 से 12 घंटे तक की शिफ्ट लागू कर सकती हैं, बशर्ते कुल साप्ताहिक कार्य समय 48 घंटे से अधिक न हो। इसके अलावा, ओवरटाइम का भुगतान सामान्य वेतन की दोगुनी दर पर किया जाएगा, जबकि पहले दैनिक कार्य समय 9 घंटे तक सीमित था। ठेका श्रमिकों संबंधी प्रावधानों में भी सुधार किए गए हैं। अब ठेकेदारों को पूरे देश में काम करने के लिए केवल एक ही लाइसेंस लेना होगा, जिसकी वैधता पांच वर्ष होगी। इससे ठेका प्रणाली सरल होगी और उद्योगों को संचालन में आसानी होगी।
नए श्रम कोड्स ने पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों जैसे कैब ड्राइवर, फूड डिलीवरी पार्टनर आदि को आधिकारिक रूप से मान्यता दी है। अब ये कर्मचारी भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में आएंगे, जिससे देश की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी को नई मजबूती मिलेगी। श्रम संहिता सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए वर्क-फ्रॉम-होम को भी औपचारिक रूप से मान्यता देती है। यह प्रावधान नियोक्ता और कर्मचारी की पारस्परिक सहमति पर आधारित होगा, जिससे कार्यस्थल पर लचीलापन बढ़ेगा और आधुनिक कार्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।





