LPG सिलेंडर पर टैक्स वसूलेगी मोदी सरकार? आपकी जेब पर सीधा असर
मुख्य बातें
- एलपीजी पर 1.29 रुपये प्रति किलोग्राम का शुल्क लगाया जा सकता है
- इसका असर घरेलू उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा और 14.2 किलोग्राम के एक घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत लगभग 18 रुपये तक बढ़ सकती है

आने वाले दिनों में LPG गैस सिलेंडर और PNG की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार कुकिंग गैस और नैचुरल गैस इस्तेमाल करने वालों पर टैक्स लगाने की योजना बना रही है। जानकारी के मुताबिक सरकार करीब 42 अरब डॉलर (लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपये) का रणनीतिक ईंधन भंडार बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसका मकसद देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि, इस प्रस्ताव को अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और इस पर अलग-अलग मंत्रालयों के बीच चर्चा जारी है।
क्या है सरकार का प्लान?
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को सूत्रों ने बताया कि इस प्लान के तहत भारत के रणनीतिक भंडार को पहली बार कच्चे तेल से आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें लगभग दो महीने की कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की मांग और लगभग छह हफ्ते की लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) या कुकिंग गैस की खपत को पूरा करने के लिए स्टॉक जमा किया जाएगा। सूत्र ने कहा कि कुकिंग और नेचुरल गैस स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए यूजर्स पर लेवी (शुल्क) लगाकर फंड जुटाया जाएगा, जिससे सालाना लगभग 1.5 अरब डॉलर की कमाई हो सकती है।
18 रुपये तक बढ़ेेंगे दाम
रॉयटर्स की खबर में बताया गया है कि एलपीजी पर 1.29 रुपये प्रति किलोग्राम का शुल्क लगाया जा सकता है। इससे सालाना करीब 460 मिलियन डॉलर जुटाए जा सकेंगे। इसका असर घरेलू उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा और 14.2 किलोग्राम के एक घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत लगभग 18 रुपये तक बढ़ सकती है। इसी तरह, प्राकृतिक गैस (PNG) पर 1.43 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर का शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इससे सरकार को हर साल लगभग 1 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। कुल मिलाकर इन दोनों शुल्कों से सालाना करीब 1.5 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं, जिनका इस्तेमाल गैस भंडारण ढांचा विकसित करने में किया जाएगा।
हालांकि, यह साफ नहीं हो पाया कि ये लेवी कैसे वसूली जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से नेचुरल और कुकिंग गैस स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए किया जाएगा जबकि कच्चे तेल के भंडार और रणनीतिक ईंधन स्टॉक के लिए फंडिंग केंद्र सरकार ही करती रहेगी।
देश का इमरजेंसी फ्यूल बफर एशिया के दूसरे बड़े देशों के मुकाबले कम है। सरकार के कंट्रोल वाले रिजर्व से अभी 10 दिन से भी कम समय की जरूरतें पूरी हो पाती हैं जबकि जापान और दक्षिण कोरिया में यह क्षमता 100 दिन से अधिक की है।
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Deepak Kumarहिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।
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