संसद में बोली सरकार, ‘8वां वेतन आयोग अभी रिपोर्ट देने को नहीं तैयार’
मुख्य बातें
- 8th Pay Commission: सरकार का कहना है कि आयोग को गठन के डेट से 18 महीने का समय दिया गया है, जिसके अनुसार अंतिम समय-सीमा मई 2027 तक है, लेकिन इस बारे में कोई संकेत नहीं दिया गया कि संशोधित वेतन-पेंशन कब प्रभावी होगी

8th Pay Commission: करीब 70 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के मन में आज-कल एक ही सवाल बार-बार गूंज रहा है। 8वां वेतन आयोग कब लागू होगा? बता दें आयोग का गठन करीब नौ महीने से अधिक हो गए। इसका गठन 3 नवंबर 2025 को कर दिया गया था, लेकिन अब तक उसने कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी है। केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि न तो संशोधित वेतन, भत्ते और पेंशन की रूपरेखा तय हुई है, और न ही उनके लागू होने की तारीख की कोई जानकारी सार्वजनिक की गई है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग अब तक अपनी सिफारिशें प्रस्तुत नहीं कर पाया है। इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अभी भी इंतजार करना होगा, क्योंकि सैलरी, डीए, अन्य भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े कोई भी ठोस प्रस्ताव आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
8वां वेतन आयोग कब लागू होगा?
सरकार का कहना है कि आयोग को गठन के डेट से 18 महीने का समय दिया गया है, जिसके अनुसार अंतिम समय-सीमा मई 2027 तक है, लेकिन इस बारे में कोई संकेत नहीं दिया गया कि संशोधित वेतन-पेंशन संरचना कब प्रभावी होगी।
यह अनिश्चितता उन 35.77 लाख कर्मचारियों और 33.76 लाख पेंशनर्स के लिए चिंता का विषय है, जो इस वेतन आयोग के दायरे में आते हैं। इसमें रक्षा पेंशनभोगी शामिल नहीं हैं, लेकिन फिर भी कुल प्रभावित आबादी लगभग 70 लाख है।
DA में 3 बार हो संशोधन
दूसरी ओर, भारत पेंशनभोगी समाज (BPS) जैसे संगठन लगातार आयोग से राहत की मांग कर रहे हैं। लगभग 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाले बीपीएस ने 7 अगस्त को आयोग अधिकारियों से मुलाकात की और महंगाई भत्ता (DA) तथा महंगाई राहत (DR) में तिमाही संशोधन की मांग रखी।
उनका तर्क है कि वर्तमान में साल में सिर्फ दो बार होने वाला संशोधन बढ़ती महंगाई के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता, इसलिए हर तीन महीने पर औसत के आधार पर संशोधन किया जाना चाहिए। साथ ही, जैसे ही DR 25% से अधिक हो, उसे मूल पेंशन में मिलाने की मांग भी प्रमुख है, ताकि पेंशनभोगियों की क्रयशक्ति बनी रहे।
कम से कम पेंशन हो 45,000 रुपये
बीपीएस ने न्यूनतम पेंशन 45,000 रुपये और न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये, साथ ही 3.83 के फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव भी रखा है, जो एनसी-जेसीएम स्टाफ साइड की मांगों के अनुरूप है। इसके अलावा, उन्होंने 10 साल की बजाय हर पांच साल पर सैलरी-पेंशन समीक्षा की बात कही है, ताकि लंबे अंतराल से होने वाले नुकसान से बचा जा सके।


