सरकार बेच रही IDBI बैंक में हिस्सेदारी, खरीदने के लिए आगे आए ये 2 विदेशी, शेयर 4% उछला
मुख्य बातें
- भारत सरकार को कनाडा की कंपनी 'फेयरफैक्स फाइनेंशियल' और दुबई की 'एमिरेट्स एनबीडी' से संशोधित बोलियां मिली हैं
- सरकार के पास 45.48% और एलआईसी के पास 49.24% हिस्सेदारी है
- अगर यह सौदा हो जाता है, तो यह सरकार द्वारा किसी बैंक में बहुमत हिस्सेदारी बेचने के सबसे बड़े सौदों में से एक होगा

IDBI बैंक के शेयर आज यानी मंगलवार (14 जुलाई) को एनएसई पर 4% तक चढ़ गए। यह उछाल उस रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें कहा गया कि सरकार को बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए दो विदेशी कंपनियों की ओर से संशोधित बोलियां मिली हैं। सोमवार को 84.07 रुपये पर बंद हुए इस शेयर ने मंगलवार को 85 रुपये पर खुला और दिन के कारोबार में 87.63 रुपये का हाई भी छुआ। इस बीच बाजार लाल निशान पर है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार को कनाडा की कंपनी 'फेयरफैक्स फाइनेंशियल' और दुबई की 'एमिरेट्स एनबीडी' से संशोधित बोलियां मिली हैं। इस सौदे में केंद्र सरकार और LIC मिलकर आईडीबीआई बैंक में अपनी 60.7% हिस्सेदारी बेच रहे हैं। सरकार के पास 45.48% और एलआईसी के पास 49.24% हिस्सेदारी है। वित्त मंत्रालय, बैंक, एलआईसी और बोली लगाने वाली दोनों कंपनियों की ओर से इस पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आईडीबीआई बैंक के शेयर का प्रदर्शन कैसा रहा?
बाजार की कमजोरी के बीच आईडीबीआई बैंक के शेयर का रुझान काफी अस्थिर रहा है। पिछले एक हफ्ते में इसमें 3.35% और पिछले एक महीने में 14.27% की बढ़त दर्ज की गई है। हालांकि, साल 2026 की शुरुआत से अब तक यह शेयर 17% गिर चुका है, और पिछले एक साल में इसमें 14% की गिरावट आई है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों को इसने अच्छा रिटर्न दिया है। जबकि, पिछले 3 सालों में 51% और पिछले 5 सालों में 128% का मुनाफा दिया है।
फेयरफैक्स की बोली को लेकर क्या चर्चा है?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, IDBI बैंक के लिए भारत सरकार फेयरफैक्स कंपनी के ऑफर को स्वीकार करने के काफी करीब है। पहले फेयरफैक्स ने जो वैल्यूएशन पेश किया था, वह सरकार की तय रिजर्व प्राइस से कम था, इसलिए उसे ठुकरा दिया गया था। अब हो सकता है कि कंपनी अपनी बोली की कीमत प्रति शेयर कुछ रुपये बढ़ा दे। इस सौदे को अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय कैबिनेट और भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी जरूरी होगी।
रॉयटर्स ने पहले बताया था कि फेयरफैक्स इस संभावित सौदे से पहले भारत में पूंजी ला चुकी है। मोदी सरकार पिछले कई सालों से इस बैंक को बेचने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली। अगर यह सौदा हो जाता है, तो यह सरकार द्वारा किसी बैंक में बहुमत हिस्सेदारी बेचने के सबसे बड़े सौदों में से एक होगा। फेयरफैक्स के संस्थापक भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्सा हैं, और वह इस दौड़ में सबसे आगे हैं, जबकि एमिरेट्स एनबीडी ने भी इस सौदे के लिए बोली लगाई है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


