एथनॉल की वजह से बढ़ रहे चीनी के दाम? मोदी सरकार ने बताया पूरा सच

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मुख्य बातें

  • मोदी सरकार ने कहा है कि चीनी की मौजूदा महंगाई के लिए एथनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है
  • बता दें कि कई विपक्षी राजनीतिक पार्टियां ये दावा कर रही हैं कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी एथनॉल के कारण हो रही है

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी पर एक्शन मोड में सरकार
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी पर एक्शन मोड में मोदी सरकार

त्योहारी सीजन के बीच चीनी की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एक्शन मोड में है। बीते कुछ दिनों में सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। हालांकि, सरकार ने ये भी स्पष्ट किया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। बता दें कि कई विपक्षी राजनीतिक पार्टियां ये दावा कर रही हैं कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी एथनॉल के कारण हो रही है। दावा किया जा रहा है कि एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का उपयोग बढ़ने से ये हालात बने हैं। इसे पेट्रोल में एथनॉल मिलाए जाने के कनेक्शन से जोड़ा जा रहा है। इसी कारण सरकार ने अब सफाई दी है।

एथनॉल को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं

सरकार की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि चीनी की मौजूदा महंगाई के लिए एथनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। एथनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% रह गया है। इसके अलावा देश में बनने वाले एथनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्के से तैयार होता है।

इसके साथ ही सरकार ने कहा कि एथनॉल प्रोग्राम ने चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद की है। 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 सीजन के लिए गन्ना किसानों के 97% बकाये का भुगतान किया जा चुका है। 2014 से 2021 के बीच चीनी उद्योग को करीब ₹14,600 करोड़ की सब्सिडी दी गई थी, जबकि 2021-22 के बाद ऐसी कोई सब्सिडी घोषित नहीं हुई है।

क्यों बढ़ रहे दाम?

सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है। इसमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ती मांग, मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान मुख्य वजह हैं। इसके अलावा, दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग जगत के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी की वजह से भी चीनी के दाम बढ़ रहे हैं। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब खुदरा चीनी की कीमत 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।

अनुमान से कम हुआ चीनी उत्पादन

मौजूदा सीजन में देश में करीब 306 लाख टन (LMT) चीनी उत्पादन का अनुमान है जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों का शुरुआती अनुमान करीब 343 LMT था। सरकार का कहना है कि गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ ज्यादा बारिश और जलभराव से भी उत्पादन प्रभावित हुआ है। हालांकि उत्पादन अनुमान से कम रहने के बावजूद अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है।

दुनियाभर में बढ़ी कीमतें

चीनी की महंगाई भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में देखी गई है। 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 LMT चीनी की कमी का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 30 जून के $474 प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को $552 प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में इसमें 16% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

Deepak Kumar

लेखक के बारे में

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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